इस्कॉन के संस्थापक आचार्य एवं जगद्गुरु His Divine Grace A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada ने वर्ष 1975 में कुरुक्षेत्र धाम की यात्रा के दौरान ज्योतिसर की पवित्र भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण और उनके प्रिय भक्त अर्जुन को समर्पित एक भव्य मंदिर तथा भगवद्गीता के संदेश को विश्वभर में पहुँचाने की अपनी इच्छा व्यक्त की थी। 1 दिसंबर 1975 को ज्योतिसर पहुंचकर श्रील प्रभुपाद ने इस स्थान पर कृष्ण-अर्जुन मंदिर की स्थापना की इच्छा व्यक्त की थी।
श्रील प्रभुपाद की इसी दिव्य इच्छा को आगे बढ़ाते हुए यह परियोजना उनके वरिष्ठ शिष्य एवं इस्कॉन के GBC रहे परम पूज्य गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज के मार्गदर्शन में आगे बढ़ी। इसके पश्चात परियोजना की जिम्मेदारी परम पूज्य साक्षी गोपाल दास जी महाराज, अध्यक्ष, इस्कॉन कुरुक्षेत्र, ने संभाली। भक्तों, सेवकों एवं शुभचिंतकों के सहयोग से वे वर्षों से इस महत्वाकांक्षी परियोजना को साकार करने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।
श्रीकृष्ण-अर्जुन मंदिर: विश्वभर के लिए आकर्षण का केंद्र
ज्योतिसर की लगभग 6 एकड़ भूमि पर विकसित हो रहा श्रीकृष्ण-अर्जुन मंदिर एक भव्य आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में आकार ले रहा है। वर्ष 2014 में तत्कालीन हरियाणा मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा मंदिर परियोजना का शिलान्यास किया गया था। इसके बाद 29 अगस्त 2015 को तत्कालीन हरियाणा एवं पंजाब के राज्यपाल श्री कप्तान सिंह सोलंकी की उपस्थिति में मंदिर निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण समारोह आयोजित किया गया तथा भगवान अनंतदेव की स्थापना की गई।
मंदिर की वास्तुकला को भगवान श्रीकृष्ण के अर्जुन के सारथी रूप को ध्यान में रखते हुए रथ के स्वरूप में विकसित किया जा रहा है। परियोजना में आध्यात्मिक शिक्षा, भगवद्गीता अध्ययन, सांस्कृतिक एवं वैदिक ज्ञान के प्रसार तथा आगंतुकों के लिए विभिन्न सुविधाओं का विकास शामिल है।
मंदिर परिसर में विशाल घोड़ों की प्रतिमाएँ, गोविंदा रेस्टोरेंट, महाभारत एवं भगवद्गीता से संबंधित संग्रहालय/प्रदर्शनी तथा अन्य आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक आकर्षण विकसित किए जा रहे हैं। परियोजना का उद्देश्य कुरुक्षेत्र को विश्वभर से आने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों, विद्यार्थियों और आध्यात्मिक जिज्ञासुओं के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है।
परियोजना के अंतर्गत विशाल आकार की भगवद्गीता को भी विशेष आकर्षण के रूप में स्थापित किए जाने की योजना है। मंदिर परियोजना के पूर्ण होने के पश्चात इसके उद्घाटन एवं संबंधित कार्यक्रमों की जानकारी आधिकारिक रूप से साझा की जाएगी।
19 सितंबर को भव्य श्री राधाष्टमी महोत्सव
प्रेस वार्ता में आगामी श्री राधाष्टमी महोत्सव के संबंध में भी जानकारी दी गई। इस्कॉन कुरुक्षेत्र द्वारा 19 सितंबर 2026 को मेन बाजार, सीकरी चौक स्थित श्री श्री राधा-राधाकांत मंदिर में राधाष्टमी का भव्य आयोजन किया जाएगा। 2026 में राधाष्टमी 19 सितंबर को मनाई जा रही है।
महोत्सव की शुरुआत प्रातः 4:30 बजे मंगल आरती के दर्शन से होगी। इस अवसर का विशेष आकर्षण श्री राधारानी के चरणों के वर्ष में एक बार होने वाले विशेष दर्शन होंगे।
इसके पश्चात प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक विशेष अभिषेक, हरिनाम संकीर्तन, कथा एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। श्रद्धालुओं के लिए भरपेट भंडारा प्रसाद की भी व्यवस्था की गई है।
‘श्री राधा कथामृत’ — तीन दिवसीय विशेष कथा
राधाष्टमी के उपलक्ष्य में 17, 18 एवं 19 सितंबर को विशेष तीन दिवसीय ‘श्री राधा कथामृत’ कथा का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें परम पूज्य गोविंद कृष्ण दास जी भक्तों को श्रीमती राधारानी के तत्त्व, भाव एवं लीलाओं का रसपान कराएंगे।
इस तीन दिवसीय कथा में श्री राधा तत्त्व, श्री राधारानी के दिव्य प्रेम एवं सेवा-भाव तथा उनकी मधुर लीलाओं के माध्यम से भक्तों को भक्ति, प्रेम और सेवा का संदेश दिया जाएगा।
इस्कॉन कुरुक्षेत्र की ओर से सभी शहरवासियों, श्रद्धालुओं एवं कृष्ण भक्तों से आग्रह किया गया है कि वे श्री राधाष्टमी महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर श्री राधारानी का आशीर्वाद प्राप्त करें।
राधाष्टमी पर इस्कॉन कुरुक्षेत्र में होंगे विशेष आयोजन, राधा रानी के चरण दर्शन होंगे विशेष आकर्षण
सोनिका वधवा
कुरुक्षेत्र। इस्कॉन कुरुक्षेत्र द्वारा आज श्रीकृष्ण-अर्जुन मंदिर, ज्योतिसर में आयोजित प्रेस वार्ता में मंदिर निर्माण परियोजना की प्रगति तथा आगामी श्री राधाष्टमी महोत्सव के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की गई।
