सांग धर्म देवी नौबहार से सजी कला परिषद की साप्ताहिक संध्या, कुरुक्षेत्र के कलाकारों ने दिखाया हुनर
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सांग हरियाणा की आत्मा है। रविंद्र सांगवान
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कुरुक्षेत्र 6 अगस्त। हरियाणा की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक सांग कला को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हरियाणा कला परिषद की साप्ताहिक संध्या में सांग कलाकार सूरजभान बेदी की टोली द्वारा सांग धर्मदेवी नौबहार का बेहद सजीव और भावपूर्ण मंचन किया गया। सांग मंचन की खासियत यह रही कि आमतौर पर पुरुषों द्वारा ही महिला पात्र निभाए जाने वाली सांग विधा में बदलाव की नई बयार देखने को मिली। इस मंचन में सभी महिला पात्रों की भूमिकाएं खुद महिला कलाकारों द्वारा पूरी शिद्दत और जीवंतता के साथ निभाई गईं। महिला कलाकारों के इस शानदार अभिनय और सशक्त संवाद अदायगी ने वहां मौजूद हर एक दर्शक का दिल जीत लिया और पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में 48 कोस तीर्थ निगरानी कमेटी के अध्यक्ष रविंद्र सांगवान उपस्थित रहे तथा विशिष्ट अतिथि की भूमिका जिला परिषद के उपाध्यक्ष धर्मपाल चौधरी ने निभाई। कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाते हुए हरियाणा कला परिषद के उपाध्यक्ष महेश जोशी ने सभी अतिथियों का पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा और सकारात्मक संदेश देते हुए पौधा भेंट किया तथा पारंपरिक अंगवस्त्र से स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन विकास शर्मा द्वारा किया गया। कार्यक्रम से पूर्व हरियाणा कला परिषद के उपाध्यक्ष ने हरियाणा के राज्य गीत जय जय हरियाणा को आमजन तक पहुंचाने के लिए कला कीर्ति भवन में आयोजित होने वाले प्रत्येक कार्यक्रम की शुरुआत हरियाणा राज्य गीत से करने का निर्णय लिया तथा सांग कार्यक्रम का शुभारम्भ भी राज्य गीत से किया गया। हरियाणा कला परिषद के उपाध्यक्ष महेश जोशी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि परिषद का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं, बल्कि हरियाणा की लुप्त होती पारंपरिक विधाओं को सहेजना और उन्हें नया मंच देना है। सांग में महिलाओं की भागीदारी से इस लोक कला को और अधिक सम्मान और विस्तार मिलेगा। वहीं मुख्य अतिथि रंविद्र सांगवान ने अपने संबोधन में कहा कि सांग हरियाणा की आत्मा है, जो हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समेटे हुए है। आज के आधुनिक दौर में जब युवा पश्चिमी सभ्यता की ओर आकर्षित हो रहे हैं, ऐसे समय में हरियाणा कला परिषद का यह प्रयास सराहनीय है। सांग धर्मदेवी नौबहार की कहानी हमें सिखाती है कि पारिवारिक मूल्यों, त्याग और बड़प्पन से ही समाज को एक सूत्र में बांधा जा सकता है। इस मंचन की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि इसमें महिला कलाकारों ने खुद मंच पर आकर सांग विधा को एक नई दिशा दी है, जो नारी सशक्तिकरण का बेहतरीन उदाहरण है। विशिष्ट अतिथि धर्मपाल चौधरी ने कहा कि ऐसी लोक कलाएं समाज को आईना दिखाने का काम करती हैं। हमारी नई पीढ़ी को अपनी इन जड़ों और लोक-विधाओं से जुड़े रहना बेहद जरूरी है।

नारी की महत्ता को दिखा गया सांग धर्मदेवी नौबहार, कलाकारों ने मोहा दर्शकों का मन
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सांग में मंच पर कलाकारों ने राजा वीरसेन और उनके पुत्र नौबहार के जीवन चक्र से जुड़ी एक बेहद मार्मिक और सीख देने वाली कहानी को बखूबी पेश किया। कथा के अनुसार, राजा वीरसेन संतान सुख न मिलने के कारण अपनी रानी के साथ बेहद दुखी और चिंतित रहते थे। एक दिन रानी राजा को एक चमत्कारी बाबा के बारे में बताती है। बाबा राजा को पुत्र प्राप्ति के लिए एक महायज्ञ करने का परामर्श देते हैं। यज्ञ के सफल समापन के बाद राजा को एक बेहद सुंदर पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है, लेकिन खुशियों के बीच एक गहरा दुख छा जाता है जब बाबा उस बालक का नाम नौबहार रखते हुए उसकी आयु केवल नौ महीने बताते हैं। बाबा राजा को पुत्र के मोह से दूर रहने और उसका त्याग करने का कड़ा आदेश देते हैं। राजा भारी मन से और लोक कल्याण के लिए अपने कलेजे के टुकड़े नौबहार का त्याग कर उसे नदी की तेज धार में बहा देता है। परंतु, नियति को कुछ और ही मंजूर था, दरिया में बहते हुए उस बच्चे को एक दूसरे प्रदेश का राजा बचा लेता है और अपने सगे पुत्र की तरह उसका लालन-पालन करता है। बड़ा होने पर नौबहार का मिलन गुणवान धर्मदेवी से होता है और दोनों का विवाह संपन्न हो जाता है। इसी बीच एक दिन नौबहार एक बगीचे में जाता है, जहां वह अपनी वीरता का परिचय देते हुए एक जहरीले सर्प से माली की बेटी आशा के प्राणों की रक्षा करता है। माली इस उपकार के बदले अपनी बेटी आशा का विवाह नौबहार से कर देता है। कहानी में असल मोड़ तब आता है जब नौबहार दोनों पत्नियों के साथ रहने का प्रयास करता है, लेकिन आशा अपने पति को किसी अन्य महिला के साथ साझा करने से साफ इंकार कर देती है। ऐसे विकट मोड़ पर धर्मदेवी अपने असाधारण बड़प्पन, त्याग और उच्च संस्कारों का परिचय देती है। वह आशा को सौत मानने के बजाय अपनी छोटी बहन का दर्जा देती है और उसके साथ बड़े प्रेम से रहना स्वीकार करती है। धर्मदेवी के इस महान त्याग और पारिवारिक सौहार्द की इस सुंदर प्रस्तुति ने दर्शकों के दिल को जीता। इस कार्यक्रम में कुरुक्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों से आए सैकड़ों कला प्रेमियों ने सांग का भरपूर आनंद लिया।

By Dr. Rajesh Wadhwa

778-779, Partap Colony, Railway Road, Near Rudra Cinema, Opp Chaat King India Row, Kurukshetra 136118 Mob. 9896352867, 9467040367

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