कुरुक्षेत्र 3 अगस्त जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वीरेंद्र चौधरी ने कहा कि हरियाणा सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और स्वयं सहायता समूहों को स्थायी स्व-रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। अब हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एचएसआरएलएम) से पंजीकृत स्वयं सहायता समूहों को ग्राम पंचायत की शामलात भूमि पर डेयरी स्थापित करने के लिए अधिकतम 500 वर्ग गज भूमि पांच वर्ष के लिए लीज पर उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी वीरेन्द्र चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि यह प्रावधान हरियाणा विलेज कॉमन लैंडस रेगुलेशन नियम-1964 के नियम-6(5) के तहत किया गया है। योजना के अनुसार उपायुक्त ग्राम पंचायत की अधिकतम 500 वर्ग गज शामलात भूमि को चयनित स्वयं सहायता समूहों को लीज पर आवंटन करने के लिए सक्षम प्राधिकारी होंगे। भविष्य में स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित डेयरी इकाई का संचालन संतोषजनक पाई जाने और हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रमाणन के बाद लीज अवधि को तीन वर्ष तक बढ़ाया भी जा सकेगा। यदि एक ही भूमि के लिए एक से अधिक स्वयं सहायता समूह आवेदन करते है तो ग्राम स्तरीय समिति द्वारा लॉटरी के माध्यम से चयन किया जाएगा। इस समिति में सरपंच, अनुसूचित जाति पंच, महिला पंच, जिला कार्यक्रम प्रबंधक (एचएसआरएलएम) तथा ग्राम सचिव शामिल होंगे, ताकी सही लाभार्थी के चयन हेतु प्रक्रिया पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनी रहे।
उन्होंने कहा कि इस योजना का लाभ केवल हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित और कम से कम एक वर्ष से सक्रिय स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा। समूह में न्यूनतम 10 सदस्य होने चाहिए तथा बैठकों में 75 प्रतिशत उपस्थिति, नियमित बचत और आंतरिक ऋण गतिविधियों संचालित होना अनिवार्य है। समूह के सभी सदस्य एक ही गांव अथवा ग्राम पंचायत के स्थायी निवासी होने चाहिए। चयनित स्वयं सहायता समूह का कोई भी सदस्य और चयनित स्वयं सहायता समूह किसी भी सरकारी योजना एवं बैंक का अतिदेय ना हो और ना ही किसी भी प्रकार का बकाया और विवाद होना चाहिए। साथ ही समूह के किसी भी सदस्य या उसके परिवार के नाम 500 वर्ग गज या उससे अधिक भूमि नहीं होनी चाहिए और किसी सरकारी योजना या बैंक का बकाया भी नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को शामलात भूमि उपलब्ध करवाने हेतु ग्राम पंचायत में प्रस्ताव पारित करवाया जाएगा तथा ग्राम सभा की स्वीकृति भी आवश्यक होगी। हरियाणा सरकार की यह पहल ग्रामीण महिलाओं को डेयरी आधारित आजीविका उपलब्ध करवा कर स्वरोजगार से जोड़ते हुए उनकी आय में वृद्धि करने और गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। इस योजना की सभी स्वयं सहायता समूहों, ग्राम संगठनों एवं क्लस्टर संगठनों के माध्यम से सभी महिलाओं को जानकारी दी जा रही है ताकि ज्यादा से ज्यादा स्वयं सहायता समूहों को इस योजना का लाभ दिलाया जा सके।
