कुरुक्षेत्र, 29 जुलाई। कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग हरियाणा, सांस्कृतिक संस्था नृत्य धारा तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संगीत एवं नृत्य विभाग एवं युवा एवं सांस्कृतिक विभाग के संयुक्त तत्वावधान में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर विश्वविद्यालय वरिष्ठ माध्यमिक आदर्श विद्यालय के सभागार में दो दिवसीय ’’नृत्य महोत्सव (कार्यशाला)’’ का भव्य शुभारंभ हुआ। यह महोत्सव जयपुर घराने के सुप्रसिद्ध कथक गुरु स्वर्गीय पंडित कुंदन लाल गंगानी की जन्म शताब्दी को समर्पित है तथा भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा और शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध विरासत को समर्पित किया गया।
कार्यक्रम से पूर्व विद्यालय परिसर में समाजसेवी जयभगवान सिंगला ने रुद्राक्ष के पौधों का रोपण किया। इसके बाद मुख्य अतिथि डॉ. ममता सचदेवा, विशिष्ट अतिथि प्रो. आशा पांडे, संगीत एवं नृत्य विभाग के अध्यक्ष डॉ. अशोक शर्मा तथा अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उपस्थित कलाकारों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने पंडित कुंदन लाल गंगानी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
मुख्य अतिथि डॉ. ममता सचदेवा ने कहा कि गुरु पूर्णिमा जैसे पावन अवसर पर महान नृत्याचार्य की स्मृति में आयोजित यह महोत्सव भारतीय संस्कृति और शास्त्रीय कलाओं के संरक्षण की दिशा में सराहनीय पहल है। उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने और भारतीय शास्त्रीय कला परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
कार्यशाला के प्रथम सत्र में विदुषी दीप्ति गुप्ता ने जयपुर घराने की कथक शैली, लयकारी, परण, भाव एवं तकनीकी पक्षों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने गुरुभजन पर मनमोहक प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया तथा कथक और भरतनाट्यम के फ्यूजन की आकर्षक प्रस्तुति भी दी। वहीं विदुषी वाणी माधव ने ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति के साथ इस शास्त्रीय नृत्य शैली की विशेषताओं से प्रतिभागियों को अवगत कराया।
कार्यक्रम का संयोजन डॉ. मानसी सक्सेना तथा संचालन डॉ. पुरुषोत्तम ने किया। इस अवसर पर डॉ जयभगवान सिंगला, विश्वविद्यालय वरिष्ठ माध्यमिक आदर्श विद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुखविंदर सिंह, डॉ. मनीष कुकरेजा, डॉ. आरती श्योकंद, डॉ. हरविंदर सिंह,डॉ. दीपक, डॉ.सीमा जौहरी, डॉ.मुनीस, डॉ.अमरजीत सिंह, डॉ. ज्ञान सागर सिंह, सतीश शर्मा व संदीप सैनी सहित सभी शिक्षक व गैर शिक्षक कर्मचारी उपस्थित रहे । दो दिवसीय महोत्सव का समापन 30 जुलाई को विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं कार्यशाला के समापन सत्र के साथ होगा।
