नीलोखेड़ी/ करनाल, 27 जुलाई। ग्रामीण विकास मंत्रालय तथा कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा आयोजित उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतिम दिन कारगिल विजय दिवस के अवसर पर अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान, नीलोखेड़ी के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान तथा विषय विशेषज्ञ एच. के. भट्ट के नेतृत्व में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आई स्वयं सहायता समूहों की महिला प्रतिभागियों ने कारगिल के वीर योद्धाओं की स्मृति में पौधारोपण किया।
डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर देशभर में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान जनभागीदारी के साथ चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “आज का दिन केवल एक पेड़ माँ के नाम लगाने का नहीं, बल्कि उन माताओं के अमर सपूतों को नमन करने का भी है, जिन्होंने भारत माता की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। आज लगाया गया प्रत्येक पौधा उन अमर बलिदानियों की स्मृति को समर्पित है।
उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध में दुर्गम और बर्फ से ढकी ऊँची चोटियों पर कब्जा जमाए पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए भारतीय सेना ने अद्वितीय साहस का परिचय दिया। इस विजय की कीमत भारत ने अपने 527 वीर सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान से चुकाई, जिनमें हरियाणा के 58 रणबांकुरे भी शामिल थे। इन अमर शहीदों में करनाल जिले के बल्ला गांव के वीर गुलाब सिंह तथा इंद्री विधानसभा क्षेत्र के मुखाड़ा गांव के वीर प्रवेश कुमार भी थे।
डॉ. चौहान ने बताया कि शहीद प्रवेश कुमार अविवाहित थे। उनकी सगाई हो चुकी थी, लेकिन विवाह से पहले ही उन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दे दिया। उन्होंने कहा कि प्रवेश कुमार के जीवन की एक और प्रेरक विशेषता यह थी कि उनके दादा भी देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए शहीद हुए थे। इस प्रकार राष्ट्रभक्ति और बलिदान की गौरवशाली परंपरा इस परिवार की दो पीढ़ियों में दिखाई देती है।
डॉ. चौहान ने कहा कि प्रवेश कुमार जैसे असंख्य युवाओं ने अपने आज को राष्ट्र के कल के लिए समर्पित कर दिया। इन्हीं वीर सपूतों के अद्वितीय साहस, त्याग और बलिदान के कारण आज प्रत्येक भारतीय स्वतंत्र, सुरक्षित और सम्मानपूर्ण जीवन जी रहा है। राष्ट्र उनके इस अमूल्य बलिदान का ऋण कभी नहीं चुका सकता।
डॉ. चौहान ने महिला प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे अपने बच्चों को कारगिल युद्ध की गौरव गाथा अवश्य सुनाएँ। उन्हें बताएं कि किस प्रकार भारतीय सैनिकों ने विपरीत परिस्थितियों में भी अदम्य साहस, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का परिचय देकर तिरंगे की आन, बान और शान की रक्षा की। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों में राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यबोध और बलिदान की भावना का संस्कार देना हम सभी का राष्ट्रीय दायित्व है।
इस अवसर पर एनआईईएसबड के स्टेट हेड (पानीपत, हरियाणा)एल. पी. भट्ट, समन्वयक शोभित मैठाणी, स्टेट कोऑर्डिनेटर अमित शर्मा, मास्टर ट्रेनर कुलदीप शर्मा तथा प्रदेश के विभिन्न जिलों से आई स्वयं सहायता समूहों की महिला प्रतिभागी उपस्थित रहीं।
