कुरुक्षेत्र, 25 जुलाई। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में फार्मास्यूटिकल साइंसेज़ संस्थान द्वारा पंचकोश द्वारा आत्म-चिकित्सा विषय पर एक ज्ञानवर्धक सत्र का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय तथा श्री कृष्णा आयुष विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र के मध्य हुए एमओयू के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य समग्र स्वास्थ्य तथा शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक कल्याण को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. (डॉ.) जितेंद्र शर्मा एवं प्रो. (डॉ.) नीरा राघव के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। प्रारंभ में डॉ. कमल ने विषय का परिचय देते हुए मानव अस्तित्व की पाँच परतों पंचकोश की अवधारणा और उसके महत्व पर प्रकाश डाला।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. नीरा राघव ने कहा कि पंचकोश की अवधारणा ऐसे स्वास्थ्य पेशेवर तैयार करने में सहायक है जो शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से संतुलित हों। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण, तनाव प्रबंधन, सहानुभूति और समग्र व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अंत में विशेषज्ञ वक्ताओं, आयोजन समिति तथा सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया।
डॉ. तरविंदर जीत कौर ने अन्नमय कोश के माध्यम से पोषण, स्वस्थ जीवनशैली तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व को स्पष्ट किया। वहीं डॉ. बलराम ने प्राणमय कोश के अंतर्गत श्वसन तकनीकों और जीवन ऊर्जा के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों की जानकारी दी। डॉ. कमल ने मनोमय कोश के माध्यम से मानसिक जागरूकता, विचारों एवं भावनाओं के संतुलन पर व्याख्यान दिया। कार्यक्रम में 50 से अधिक विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन, भावनात्मक दृढ़ता, बौद्धिक विकास तथा आंतरिक सामंजस्य जैसे विषयों पर सक्रिय चर्चा की।
