करनाल, 22 जुलाई।
ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर चलाए जा रहे “छात्रों की गूंज” अभियान के अंतर्गत जिला कांग्रेस कमेटी (शहरी) के जिला अध्यक्ष पराग गाबा, जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के जिला अध्यक्ष राजेश वैध तथा पूर्व लोकसभा प्रत्याशी दिव्यांशु बुद्धिराजा के नेतृत्व में करनाल के वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने छात्रों पर हुए कथित बर्बर लाठीचार्ज के विरोध में एक भावपूर्ण कैंडल मार्च निकालकर पीड़ित छात्रों के प्रति अपनी गहरी संवेदना और एकजुटता व्यक्त की।
इस कैंडल मार्च में पराग गाबा, राजेश वैध, दिव्यांशु बुद्धिराजा, शमशेर सिंह गोगी, भूपिंदर लाठर, सोमिल संधू, हरि राम साबा, पप्पू लाठर, दिलशेर डाचर, जोगिन्दर वाल्मीकि, बिंदर पोसवाल, ललित अहूजा, संदीप महाजन (दीपक), परवीन पुनिया, लाडी संधू, अशोक दुग्गल, सुरिंदर नंबरदार, युवराज सिंह भट्टी, पंकज गाबा, रजत लाठर, नरेन्द्र कुमार अग्घी (जोगा जी), कपिल ठाकुर, राजेश चौधरी, गजदीप सिंह मट्टू, पीयूष, पुष्कर मनचंदा, सपना राणा, डॉ. नवजोत कश्यप, शारदा सिंधु, राजीव गोंदर, राजिंदर कल्याण, अंकित चौहान, अनहद प्रताप सिंह, शेर सिंह डबरी, नवनीत रंधावा, बजिंद्र खोखर, मुनीश परवेज राणा, मनीष मुनक, अनिल शर्मा, जसबीर पन्नू, निप्पी मान, जितेंद्र नरवाल, विकास काम्बोज तथा सतपाल सरपंच सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता एवं युवा मौजूद रहे।
हाथों में जलती हुई मोमबत्तियां और आंखों में छात्रों के दर्द की टीस लिए कांग्रेस कार्यकर्ता जब सड़कों पर उतरे, तो यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि उन टूटे हुए सपनों, घायल उम्मीदों और न्याय की पुकार के साथ खड़े होने का संकल्प था। कलम थामने वाले हाथों पर बरसी लाठियां, लोकतंत्र हुआ शर्मसार। जिन हाथों में किताबें और कलम होनी चाहिए थीं, उन्हीं हाथों पर लाठियों के निशान छोड़ दिए गए। यह प्रश्न आज पूरे देश की अंतरात्मा से जवाब मांग रहा है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जिस उम्र में युवाओं के हाथों में किताबें, कॉपियां और कलम होनी चाहिए थीं, उसी उम्र में उनके हाथों पर लाठियों के गहरे निशान छोड़ दिए गए। जिन आंखों में सुनहरे भविष्य के सपने थे, उनमें आंसू, दर्द और भय भर दिया गया। यह केवल छात्रों पर हमला नहीं, बल्कि देश के भविष्य, लोकतंत्र और संविधान की आत्मा पर किया गया गहरा प्रहार है।
नेताओं ने कहा कि सबसे अधिक पीड़ा इस बात की है कि छात्राओं तक को नहीं बख्शा गया। उनके साथ धक्का-मुक्की की गई, उनके सम्मान को ठेस पहुंची और उनके वस्त्र तक फट गए। यह दृश्य किसी भी संवेदनशील समाज का सिर शर्म से झुका देने वाला है। शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने वाले छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकार युवाओं की आवाज़ सुनने के बजाय उन्हें डराने और दबाने का प्रयास कर रही है। सवाल पूछने वाले छात्रों को जवाब देने के बजाय लाठियां दी जा रही हैं। लेकिन इतिहास गवाह है कि विचारों और सच्चाई की आवाज़ को कभी डंडों के बल पर नहीं दबाया जा सकता।
उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष एवं न्यायिक जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए तथा घायल छात्रों और छात्राओं को शीघ्र न्याय और उचित सहायता प्रदान की जाए।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह कैंडल मार्च केवल मोमबत्तियां जलाने का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उन मासूम छात्रों के सम्मान, उनके सपनों और उनके भविष्य की रक्षा का संकल्प था। कांग्रेस पार्टी हर छात्र, हर युवा और उनके अधिकारों की लड़ाई में सदैव उनके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी। जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक उनकी आवाज़ को बुलंद करने का संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।
