कुरुक्षेत्र, 23 जुलाई। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सोहन लाल को हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद (एचएसएचईसी) द्वारा हरियाणा राज्य अनुसंधान निधि (एचएसआरएफ) के अंतर्गत 18 लाख रुपये का प्रतिष्ठित शोध अनुदान स्वीकृत किया गया है। यह परियोजना दो वर्ष की अवधि के लिए स्वीकृत की गई है।
डॉ. सोहन लाल की शोध परियोजना का शीर्षक “जैविक कचरे (बायो-वेस्ट) के साथ अपशिष्ट प्लास्टिक के कंपोजिट तैयार कर प्लास्टिक प्रदूषण का प्रभावी समाधान” है। इस परियोजना का उद्देश्य अपशिष्ट प्लास्टिक एवं जैविक कचरे का उपयोग कर पर्यावरण-अनुकूल कंपोजिट सामग्री विकसित करना है, जिससे प्लास्टिक प्रदूषण की गंभीर समस्या का समाधान करने के साथ-साथ कृषि एवं जैविक अपशिष्ट का मूल्यवर्धित उपयोग भी सुनिश्चित किया जा सके।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने इस उपलब्धि पर डॉ. सोहन लाल को बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में शोध एवं नवाचार को निरंतर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देगी तथा विश्वविद्यालय की शोध उपलब्धियों को नई पहचान प्रदान करेगी। यह शोध कार्य कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग में संचालित किया जाएगा। परियोजना के माध्यम से पर्यावरण हितैषी सामग्रियों के विकास, प्लास्टिक अपशिष्ट के पुनर्चक्रण तथा सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा मिलने की अपेक्षा है। साथ ही यह परियोजना शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के लिए उन्नत अनुसंधान के नए अवसर भी उपलब्ध कराएगी।
डॉ. सोहन लाल ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने मार्गदर्शक प्रो. संजीव अरोड़ा, सीनियर प्रोफेसर (सेवानिवृत्त), रसायन विज्ञान विभाग को देते हुए उनके सतत मार्गदर्शन, प्रेरणा एवं शोध प्रस्ताव तैयार करने में दिए गए अमूल्य सहयोग के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने रसायन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. जी.पी. दुबे का भी बहुमूल्य सुझावों, प्रोत्साहन एवं निरंतर सहयोग के लिए विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया।
डॉ. सोहन लाल ने विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के प्रति भी आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व, शोध-अनुकूल वातावरण तथा नवाचार एवं गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को निरंतर प्रोत्साहन देने के कारण विश्वविद्यालय में उत्कृष्ट शोध कार्यों को नई गति मिली है।
इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय एवं रसायन विज्ञान विभाग के शिक्षकों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों ने डॉ. सोहन लाल को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना न केवल विश्वविद्यालय की शोध गतिविधियों को सशक्त बनाएगी, बल्कि प्लास्टिक प्रदूषण जैसी वैश्विक पर्यावरणीय चुनौती के समाधान में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।
