नीलोखेड़ी/ करनाल, 21 जुलाई। आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। संसद और विधानसभा में उनकी भागीदारी लगातार बढ़ रही है तथा सरकार महिलाओं और बेटियों के सशक्तिकरण के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही है। यह बात हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कही। वे संस्थान एवं हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित छह दिवसीय उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे । कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य विभिन्न जिलों से आए संसाधन व्यक्तियों को उद्यमिता विकास, स्वरोजगार संवर्धन तथा स्वयं सहायता समूहों के प्रभावी मार्गदर्शन के लिए प्रशिक्षित करना है।
डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि स्वयं सहायता समूह केवल बचत और ऋण तक सीमित संगठन नहीं हैं, बल्कि ये आत्मविकास, आत्मनिर्भरता और ग्राम विकास की मजबूत आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि समूहों से जुड़ी महिलाओं को अपने आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ समाज और गांव के समग्र विकास में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने में स्वयं सहायता समूहों की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। जब गांव की महिलाएं सशक्त बनेंगी, स्वरोजगार अपनाएंगी और अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगी, तभी विकसित भारत का सपना साकार होगा।
उन्होंने कहा कि भारत में स्वयं सहायता समूहों का परिवार आज विश्व का सबसे बड़ा सामुदायिक महिला सशक्तिकरण नेटवर्क बन चुका है। देश के लगभग 10.5 करोड़ परिवार स्वयं सहायता समूहों से जुड़े हुए हैं। वर्तमान में 90.91 लाख स्वयं सहायता समूह सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं तथा इन्हें 12.18 लाख करोड़ रुपये का संस्थागत ऋण उपलब्ध कराया जा चुका है, जो इस अभियान की सफलता और सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि देश में अब तक 3 करोड़ से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं और वर्ष 2029 तक इनकी संख्या 6 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह अभियान महिलाओं की आर्थिक उन्नति के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने का सशक्त माध्यम बन रहा है।
कार्यक्रम के समन्वयक एवं संस्थान के सहायक आचार्य डॉ. सुशील मेहता ने प्रशिक्षण की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को उद्यमिता विकास, व्यवसाय योजना निर्माण, नेतृत्व क्षमता, संचार कौशल, वित्तीय प्रबंधन, बाजार से जुड़ाव तथा प्रशिक्षण तकनीकों पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण प्रतिभागियों को प्रभावी मास्टर ट्रेनर एवं फैसिलिटेटर के रूप में विकसित करने में सहायक सिद्ध होगा।
मुख्य प्रशिक्षक एल. पी. भट्ट ने अपने सत्र में कहा कि सफल उद्यमिता का आधार सही मार्गदर्शन, व्यवहारिक प्रशिक्षण और आत्मविश्वास है। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण की आधुनिक तकनीकों, समूह सहभागिता, समस्या समाधान तथा उद्यम स्थापना से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी देते हुए प्रेरित किया कि वे अपने अनुभवों का उपयोग ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने में करें।
इस अवसर पर संस्थान की सहायक आचार्य कमलदीप सांगवान, संदीप कुमार तथा हरियाणा के विभिन्न जिलों से पधारे संसाधन व्यक्ति एवं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
