अंबाला, 3 सितंबर
जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंबाला वीरेंद्र मलिक तथा मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी-सह-सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गीतांजलि गोयल द्वारा केंद्रीय कारागार, अंबाला का आधिकारिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य जेल में बंदियों के कल्याण, कारागार में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं तथा बंदियों को प्रदान की जा रही नि:शुल्क कानूनी सहायता की स्थिति का जायजा लेना था। इस दौरान माननीय न्यायिक अधिकारियों ने विभिन्न बैरकों में बंदियों से प्रत्यक्ष संवाद कर उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं के बारे में जानकारी प्राप्त की।
निरीक्षण के दौरान बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही कानूनी सहायता, भोजन एवं आहार व्यवस्था, स्वच्छता तथा स्वास्थ्य सेवाओं की भी समीक्षा की गई। लंबित कानूनी सहायता आवेदनों की स्थिति का अवलोकन करते हुए यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि किसी भी विचाराधीन बंदी को आर्थिक अथवा सामाजिक कठिनाइयों के कारण विधिक प्रतिनिधित्व से वंचित न रहना पड़े।
जेल लोक अदालत का आयोजन
निरीक्षण के साथ-साथ मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी गीतांजलि गोयल की देखरेख में जेल लोक अदालत का भी आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य विचाराधीन बंदियों से संबंधित छोटे एवं समझौता योग्य मामलों का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करना था। जेल लोक अदालत में कुल 02 मामलों को सुनवाई के लिए लिया गया, जिनमें से 01 मामले का निपटारा किया गया। निपटाए गए मामले में 01 बंदी को निर्धारित नियमों एवं शर्तों का अनुपालन करने पर रिहा किए जाने के आदेश दिए गए।
जेल प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश
निरीक्षण के दौरान जेल प्रशासन को निर्देश दिए गए कि बंदियों के मानवाधिकारों से संबंधित सभी वैधानिक दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, जेल परिसर एवं बैरकों में स्वच्छ एवं स्वास्थ्यकर वातावरण बनाए रखने तथा सभी बंदियों को आवश्यकता के अनुसार समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। न्यायिक अधिकारियों ने इस बात पर विशेष बल दिया कि जेल में निरुद्ध प्रत्येक व्यक्ति को उसके कानूनी अधिकारों की जानकारी मिले तथा जरूरतमंद बंदियों को नि:शुल्क एवं प्रभावी विधिक सहायता समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराई जाए।
