करनाल, 30 जून। एडीसी डॉ. राहुल रईया ने कहा कि नशा एक सामाजिक बुराई है और नशा मुक्त जिला बनाने के लिए प्रशासन निरंतर प्रयासरत है। जिला में नशे की प्रवृत्ति को रोकने के लिए कारगर कदम उठाए जाएं। इस सामाजिक बुराई से छुटकारा पाने के लिए सभी विभाग आपसी सामंजस्य से कार्य करें। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए कि वे स्कूलों में नशा की रोकथाम को लेकर छात्रों की विभिन्न गतिविधियां जैसे निबंध लेखन, पोस्टर मेकिंग, रंगोली, क्विज आदि प्रतियोगिताएं आयोजित करके जागरूक करें और अव्वल विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर सम्मानित करें। इसके अलावा युवाओं को नशे की बजाय खेल की ओर जाने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थाओं के आसपास के क्षेत्र में स्थापित किरयाना की दुकानों का निरीक्षण किया जाए। इसके अलावा रेलवे स्टेशन क्षेत्र में लोकल पुलिस, रेलवे पुलिस को सहयोग करे।
एडीसी डा. राहुल रईया मंगलवार को लघु सचिवालय के सभागार में जिला स्तरीय एनकॉर्ड की बैठक में अधिकारियों को दिशा-निर्देश दे रहे थे। उन्होंने ड्रग कंट्रोल अधिकारी को निर्देश दिए कि केमिस्ट दुकानों पर निरीक्षण बढ़ाया जाए तथा नशा/नशीली दवाई पाए जाने पर उचित कार्यवाही करें। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर नशा मुक्ति केंद्रों का भी निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि एनडीपीएस एक्ट के केसों व अंडर ट्रायल केसों की उचित पैरवी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने जिला कंट्रोलर को निर्देश दिए कि सभी केमिस्ट दुकानों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाना सुनिश्चित करें और कैमरे की रेंज दुकान के साथ-साथ सडक़ व बाहर के क्षेत्र को भी कवर करे, उस डाटा को कम से कम 7 दिन तक अवश्य सेव रखा जाए ताकि आपराधिक गतिविधियों पर भी रोक लग सके। इस पर औषधि नियंत्रक ने बताया कि आगामी एक माह में सभी केमिस्ट दुकानों के बाहर के एरिया को भी कवर करने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए जाएंगे।
एडीसी ने कहा कि जैसे ही मादक पदार्थों के प्रयोग पर रोकथाम के लिए कार्यवाही सख्त की जाती है तो वे दवाईयों की तरफ जाते हैं, ऐसे में केमिस्ट दुकानों पर कड़ी नजर रखें। अगर कोई केमिस्ट दुकानदार नशा की दवाईयां बेचता हुआ पाया जाता है, तो उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई करें और उसका लाइसेंस भी रद्द करें। इस पर ड्रग कंट्रोल अधिकारी अशोक राठी ने बताया कि मई माह के दौरान औषधी मानकों को बनाए रखने के लिए 111 निरीक्षण किए गए। इस दौरान औषधी एवं प्रसाधन सामग्री नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित 22 फर्मों को कारण बताओं नोटिस जारी किया गया है तथा गत माह के नोटिस का संतोषजनक उत्तर नहीं दिए जाने पर 23 फर्मों का ड्रग लाइसेंस निलंबित किया गया है।
बैठक में डीएसपी मीना कुमारी ने पिछली बैठक के एजेंडे की प्रगति रिपोर्ट तथा नए एजेंडों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुलिस विभाग द्वारा नशा मुक्ति अभियान के तहत दो टीमें नियुक्त की गई हैं। इन टीमों द्वारा खेल गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। इसके साथ ही नशा ग्रस्त व्यक्तियों को नशा छोडऩे की दवा भी दिलवाई जाती है। उन्होंने बताया कि अब तक 211 गांवों व 47 वार्ड नशा मुक्त हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि 774 नशा ग्रस्त व्यक्तियों की पहचान कर काउंसिलिंग करवाई गई। इनमें से 541 का डॉक्टर से उपचार चल रहा है। बैठक में जिला न्यायवादी डॉ. पंकज ने बताया कि 21 केसों का निपटारा किया गया। इनमें से 14 केसों में सजा हुई व 6 केस बरी हुए है और एक केस के आरोपी की मृत्यु हो गई। इसके अलावा 3 आईओ को नोटिस भी दिया गया है।
बैठक में एसीयूटी सोहम शैलेंद्र, जिला न्यायवादी डॉ. पंकज, डीईओ रोहताश वर्मा, डीडीपीओ कंचनलता, ड्रग कंट्रोल अधिकारी विकास राठी, स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
