कुरुक्षेत्र, 30 जून। जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी डॉ. नरेंद्र सिंह ने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को पढ़ाने का कार्य नहीं करता, बल्कि उनके व्यक्तित्व, चरित्र और संस्कारों का निर्माण भी करता है। इसलिए प्रत्येक शिक्षक का दायित्व है कि वह समय के साथ स्वयं को निरंतर ज्ञान, कौशल और नैतिक मूल्यों से समृद्ध करता रहे। वे मंगलवार को महार्षि विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सांवला में तीन दिवसीय 25 घंटे के विद्यालय स्तरीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि नई शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करना है। इसे सफल बनाने में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। शिक्षक यदि स्वयं सीखने की भावना बनाए रखेगा, तभी वह विद्यार्थियों को बेहतर दिशा दे सकेगा। विशिष्ट अतिथि के तौर पर डॉ सुशील टाया ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ वेद विद्या मार्तंड ब्रह्मचारी डॉ. गिरीश चंद्र वर्मा, अध्यक्ष, महार्षि विद्या मंदिर विद्यालय समूह के मार्गदर्शन में गुरु पूजन, दीप प्रज्ज्वलन तथा सामूहिक ध्यान से हुआ, जिससे पूरे प्रशिक्षण का वातावरण शांत, सकारात्मक और प्रेरणादायी बन गया।
विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती महिंदर कौर ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को नई शिक्षा नीति, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा तथा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप शिक्षण की नई विधियों, मूल्यपरक शिक्षा और विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए तैयार करना है।
प्रशिक्षण के प्रथम दिन के विभिन्न सत्रों का संचालन शिक्षाविद् डॉ. रूबी दलाल ने किया। उन्होंने शिक्षकों को मूल्य शिक्षा, चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों, अनुभव आधारित शिक्षण तथा कक्षा में सकारात्मक वातावरण बनाने के विभिन्न उपायों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि शिक्षा तभी सार्थक है, जब वह विद्यार्थियों में अच्छे संस्कार, अनुशासन, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करे।
दोपहर के सत्र में समूह चर्चा, व्यवहारिक गतिविधियों और वास्तविक जीवन के उदाहरणों के माध्यम से शिक्षकों ने मूल्य आधारित शिक्षण की विभिन्न विधियों को समझा। गतिविधि सत्र में सभी शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपने अनुभव साझा किए और सीखी गई बातों को विद्यालयी जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
प्रशिक्षण के प्रथम दिवस का समापन सामूहिक ध्यान के साथ हुआ। इस अवसर पर विद्यालय का समस्त शिक्षण स्टाफ उपस्थित रहा।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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