करनाल, 24 जून। उपायुक्त डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने बताया कि हरियाणा सरकार द्वारा लगातार गिरते भूजल स्तर को बचाने और किसानों की लागत कम करने के लिए ‘धान की सीधी बिजाई’ (डीएसआर) योजना चलाई गई है। इस योजना के तहत जल संरक्षण और कृषि लागत को कम करने के उद्देश्य से जो किसान पारंपरिक तरीके से धान की रोपाई के बजाय सीधी बिजाई करते है, उन्हें राज्य सरकार द्वारा 4500 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। किसानों को इस योजना का लाभ लेने के लिए मेरी फसल,मेरा ब्यौरा पर पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। पंजीकरण की अंतिम तिथि 28 जून 2026 निर्धारित की गई है, जोकि यह एक आखरी मौका है।
उपायुक्त ने बताया कि धान की सीधी बिजाई से धान की खेती करने पर पारंपरिक रोपाई की तुलना में लगभग 25 से 35 प्रतिशत तक कम पानी लगता है। नर्सरी तैयार करने, पौधों को उखाड़ने और रोपाई करने की कोई आवश्यकता नहीं होती, इसमें मजदूरों और समय दोनों की बचत होती है। उन्होंने बताया कि खेतों में पानी भरकर न रखने (पडलिंग न करने) से मीथेन गैस का उत्सर्जन घटता है और भूमि की पानी ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है। पौधों को उखाडक़र दोबारा लगाने पर जो झटका या तनाव लगता है, सीधी बिजाई में ऐसी कोई समस्या नही होती, जिससे फसल का विकास अच्छा होता है। उन्होंने जिला के सभी किसानों से आग्रह किया कि वे अधिक से अधिक धान की सीधी बिजाई करके जल सरंक्षण की मुहिम में साथ दें, अपनी लागत कम करें एवं समय बचायें तथा विभाग द्वारा दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि का भी लाभ उठायें।
उन्होंने बताया कि सीधी बिजाई के दौरान किसानों को कुछ सावधानियां बरतनी चाहिएं। उन्होंने बताया कि बुवाई से पहले खेत को लेजर लैंड लेवलर से समतल अवश्य करें। सीधी बिजाई में खरपतवार की समस्या अधिक होती है इसके लिए बुवाई के तुरंत बाद या अगले 24 से 48 घंटो के भीतर (खेत मे पर्याप्त नमी होने पर) दवा का छिडक़ाव करें।
