अब रजिस्ट्री और इंतकाल की प्रक्रिया एक दूसरे से जुड़ी, इंतकाल के लिए अलग से आवेदन करने की नहीं होगी आवश्यकता
पेपरलेस रजिस्ट्री 2.0 व ऑटो इंतकाल प्रणाली की शुरुआत से किसानों और भूस्वामियों को मिलेगी बड़ी राहत
करनाल, 23 जून। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आज चंडीगढ़ में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में पेपरलेस रजिस्ट्री के दूसरे चरण और ऑटो इंतकाल प्रणाली की शुरुआत की। इस कार्यक्रम से प्रदेश के सभी जिला उपायुक्त व राजस्व विभाग के अधिकारी वर्चुअली तौर पर जुड़े। राजस्व विभाग हरियाणा का यह एक और ऐतिहासिक और क्रांतिकारी सुधार है। इस नई व्यवस्था से प्रदेश के लाखों किसानों और भूस्वामियों को बड़ी राहत मिलेगी और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।
यह जानकारी डीसी डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा गत 29 सितंबर 2025 को कुरुक्षेत्र की लाडवा तहसील से पेपरलेस रजिस्ट्री की शुरुआत की गई थी, जिसे 1 नवंबर 2025 को पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया था। आज कुछ और महत्वपूर्ण सुधारों के साथ इसके दूसरे चरण की शुरुआत की गई है जिससे अब रजिस्ट्री के साथ-साथ इंतकाल को भी शामिल कर दिया गया है।
डीसी ने बताया कि रजिस्ट्री के लिए आवेदन फॉर्म को पहले से कहीं अधिक सरल और यूजर फ्रेंडली बनाया गया है। नागरिक स्वयं, डीड राइटर, अधिवक्ता या हेल्प डेस्क के माध्यम से डीड भर सकेंगे। धोखाधड़ी और गड़बडिय़ों को रोकने के लिए रजिस्ट्री में दोनों पक्षों (क्रेता और विक्रेता) के लिए आधार ई-केवाइसी अनिवार्य किया गया है, जिससे पहचान की शत-प्रतिशत पुष्टि होगी। अब डीटीपी और एनओसी के लिए अलग से दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं होगी। विभागीय सत्यापन पूरी तरह ऑनलाइन और सिस्टम-जनरेटेड होगा।
उन्होंने बताया कि रजिस्ट्री के समय संबंधित भूमि का कौन सा हिस्सा प्राइम श्रेणी में आता है और कौन सा नॉन-प्राइम श्रेणी में, इसकी जानकारी सिस्टम में स्वत: दिखाई देगी। यदि कोई व्यक्ति, कंपनी, संस्था या एनआरआई रजिस्ट्री प्रक्रिया में स्वयं उपस्थित नहीं हो सकता, तो अब वह एक से अधिक व्यक्तियों को अपना प्रतिनिधि नियुक्त कर सकता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान प्रणाली में अलग-अलग स्तर पर किए जाने वाले आरसी और आरसी 2 के कार्यों को अब आपस में एकीकृत कर दिया गया है। पूरी प्रक्रिया डिजिटल हस्ताक्षर और बायोमेट्रिक प्रणाली पर आधारित होगी। किसी भी मामले का निपटान अधिकतम तीन अवसरों के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा।
ऑटो इंतकाल प्रणाली से खत्म होगा लंबित मामलों का बोझ: डीसी
डीसी डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने बताया कि अब रजिस्ट्री और इंतकाल की प्रक्रिया को एक-दूसरे से जोड़ दिया गया है, जिससे नागरिकों को इंतकाल के लिए अलग से चक्कर काटने या आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। जिन मामलों में खेवट विभाजन की जरूरत नहीं होगी, उनमें 24 घंटे के भीतर इंतकाल मंजूर हो जाएगा। जिन मामलों में खेवट विभाजन जरूरी होगा, उनमें अधिकतम 10 दिनों के भीतर इंतकाल का निपटान कर दिया जाएगा। नागरिक अपने इंतकाल की स्थिति ऑनलाइन देख सकेंगे और इसकी कॉपी को घर बैठे डाउनलोड व प्रिंट भी कर सकेंगे।
उन्होंने बताया कि इस प्रणाली को लागू करने से पहले एक महीने तक पायलट आधार पर चलाया गया था, जिसके दौरान प्राप्त फीडबैक को इसमें शामिल किया गया है। प्रारंभिक चरण में ही लगभग 50 हजार इंतकाल स्वत: दर्ज किए जा चुके हैं। जिला में आगामी 15 दिनों के भीतर शेष सभी लंबित इंतकालों का समयबद्ध समाधान किया जाएगा।
