कुरुक्षेत्र, 3 जून : मारकंडा नदी के तट पर श्री मारकंडेश्वर महादेव मंदिर ठसका मीरां जी में अखिल भारतीय श्री मारकंडेश्वर जनसेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत जगन्नाथ पुरी एवं अन्य संतों के सान्निध्य में बुधवार को पूरे विधि विधान के साथ श्री गणेश चतुर्थी के अवसर पर विभुवन संकष्टी चतुर्थी  का पूजन एवं अनुष्ठान किया गया। इस अवसर भगवान शिव पार्वती नंदन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के साथ भजनों का गुणगान किया गया। महंत जगन्नाथ पुरी ने बताया कि अधिकमास में विभुवन संकष्टी चतुर्थी के पूजन का दुर्लभ अवसर है। उन्होंने बताया कि विभुवन संकष्टी चतुर्थी पूजन अत्यंत दुर्लभ और पुण्य फलदायी अवसर है, जो हर तीन साल में केवल एक बार अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को पड़ता है। यह सीधे तौर पर विघ्नहर्ता भगवान गणेश को समर्पित है। महंत जगन्नाथ पूरी ने बताया कि जहां एक वर्ष में 12 संकष्टी चतुर्थी होती हैं, वहीं अधिक मास आने पर यह 13वीं चतुर्थी विभुवन संकष्टी चतुर्थी कहलाती है। अधिक मास तीन साल के अंतराल पर आता है, इसलिए यह विशिष्ट अवसर भी तीन साल में केवल एक बार ही प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि अधिक मास भगवान विष्णु को समर्पित है, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस पवित्र महीने में गणपति की आराधना करने से सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फल की प्राप्ति होती है। इस विशेष दिन विभुवन पालक महागणपति की पूजा-अर्चना का विधान होता है। मंदिर में स्वामी अमर दास, स्वामी संतोषानंद, स्वामी रामनाथ, बिल्लू पुजारी, नरेंद्र सिंह चौहान, सुरेंद्र सिंह, संतोष रानी, सीमा, नाजर सिंह, सुक्खा सिंह, गगनदीप सिंह इत्यादि भी मौजूद रहे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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