कुरुक्षेत्र, 3 जून : मनुष्य जीवन परमात्मा का अनमोल उपहार है। मनुष्य को अपना जीवन कैसा बनाना है यह उसकी अपनी सोच एवं आंतरिक स्थिति पर निर्भर करता है। कठोर पंच धूणी अग्नि तपस्या कर रहे महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि यह उनका स्वयं का संकल्प एवं निश्चय है कि पिछले करीब दो दशक से जग ज्योति दरबार में हर वर्ष तपती गर्मी में भी कठोर अग्नि तपस्या करते हैं। उन्हें प्रेरणा अपने स्थान देवता एवं गुरु से मिलती है लेकिन शक्ति एवं ऊर्जा अपने संकल्प व आस्था से ही मिलती है। महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि जग ज्योति दरबार सनातन धर्म को मानने, सनातन को मजबूत करने एवं रक्षा करने वाले हर नागरिक का सम्मान व स्वागत करता है। उन्होंने कहा कि धर्म का मनुष्य के जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान है। यह हमारे जीवन को दिशा प्रदान करता है, हमें सही और गलत के बीच का अंतर समझने में मदद करता है। धर्म से हमें नैतिकता और मूल्यों की भी शिक्षा मिलती है। उन्होंने अग्नि तपस्या के दौरान सत्संग में महात्मा बुद्ध के संदेश पर चर्चा करते हुए कहा कि मनुष्य जैसा सोचता है उसका जीवन व आसपास का संसार भी वैसा ही बनता है। मनुष्य जैसा सोचता है वैसा ही बन जाता है। मनुष्य जैसा महसूस करता है वैसा ही आकर्षित होता है। मनुष्य की जैसी कल्पना करते हो, वैसा ही सृजित करता है। उन्होंने कहा कि हमारी आंतरिक स्थिति ही बाहरी दुनिया का निर्माण करती है। हमारे विचार ही हमारी चेतना का निर्माण करते हैं। अगर मनुष्य स्वयं को असफल, कमजोर या भ्रमित मानता है तो आप वैसी ही ऊर्जा को भीतर संजोता है। अगर मनुष्य खुद को प्रेम, शक्ति और शांति से जोड़ता है तो मनुष्य एक नए जीवन का निर्माण करता है। इस अवसर पर शक्ति सिंह, भीमसेन, बनारसी दास, मोहन सिंह, पूजा गुप्ता, अभिषेक गुप्ता, अनुपमा, अंजलि, नीलम जसूजा, सुदेश शर्मा, पुष्पा, सविता जसूजा, दिनेश, नवजोत सिंह, राज रानी गर्ग, बलविंदर, हरप्रीत सिंह, रितेश कुमार, सतपाल, ममता, ज्योति, जितेंद्र शर्मा, कैलाश देवी, सुमन, जगतार सिंह, रविंद्र, अजय राठी, विजय राठी, अक्षय राठी, कन्हैया लाल इत्यादि भी मौजूद रहे।

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