अम्बाला, 28 मई: आज ईद-उल-अज़हा (बकरीद) का त्यौहार बड़े हर्ष व उल्लास के साथ मनाया गया। शहर की सभी प्रमुख मस्जिदों हजऱत साई तवक्कल शाह (जामा मस्जिद), मस्ज़िद लक्खी शाह, मस्जिद मक्का, मस्जिद मदीना, मस्जिद बादशाही बाग, मस्जिद नसीर-उल-ओलिया, मस्जिद उस्मानी, मस्जिद ईदगाह में नमाज अदा की गई। मस्जिदों में मुल्क में अमन व चैन के लिए भी दुआ की गई। नमाज अदा करने के बाद अंजुमन इस्लाहुल मुस्लिमीन सोसायटी के जिला सदर सैयद अहमद खान ने सभी अम्बाला व प्रदेश वासियों को ईद-उल-अज़हा (बकरीद) की मुबारकबाद दी।
इस अवसर पर जिला अध्यक्ष सैयद अहमद खान ने अपने ब्यान में कहा कि हजरत इब्राहिम अल्लाह तआला के बड़े सच्चे पक्के पैगम्बर हैं। लेकिन हजरत इब्राहिम के पास कोई औलाद नहीं थी। हजरत इब्राहिम ने अल्लाह तआला से दुआ की कि मुझे नेक औलाद अता फरमा। अल्लाह तआला ने अपने पैगम्बर की इस दुआ को कबूल फरमाया और नेक औलाद अता फरमाई। यानि अल्लाह तआला ने हजरत इब्राहिम को हजरत इस्माईल अता फरमाये। जब हजऱत इस्माईल जवान हो गये तो वह अपने अब्बा (पिता) के साथ काम काज में हाथ बटाने लगे। हजऱत इब्राहिम ने खवाब (सपना) देखा कि अल्लाहा तआला ने फरमाया कि ऐ इब्राहिम हमारे रास्ते में वो चीज कुरबान करो जो तुमहे सबसे ज्यादा प्यारी हो। तो हजरत इब्राहिम अपने बेटे हजऱत इस्माईल को ले कर उस जगह पहुंचे जहां पर कुर्बानी देनी थी। जब हज़रत इस्माईल को कुर्बान करना शुरू किया तो फरिश्तों के सरदार जिब्रील अमीन ने हजरत इब्राहिम के बेटे को हटाकर उस छुरी के नीचे मैमने (बकरा) के जिबह होने के साथ पहली कुर्बानी हुई। इस याद को ताजा करने के लिए यह त्यौहार हजरत इब्राहिम के जरिये अपने लडके बेटे हज़रत इस्माईल की अल्लाह की राह मे कुर्बानी देने की याद मंे मनाया जाता है जिसका जिक्र मुकददस कुरान में है। तर्क और कुर्बानी की इसी मिसाल की याद में तमाम दुनिया के मुस्लमान मक्का मुकर्रमा में हाजिर होकर हज का फरीजा अदा करते हैं। हमंे अपने त्यौहारों से प्रेम का संदेश प्राप्त करना चाहिए।
जिला अध्यक्ष सैयद अहमद खान ने कहा कि हमें ईद उल जुहा को सादगी, स्वच्छता और कानून के दायरे में रहकर मनाना चाहिए। सभी धर्मों और समुदायों की भावनाओं का सम्मान करना हम सबकी जिम्मेदारी है ताकि किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत न हों। उन्होंने समाज से अपील की कि ईद के अवसर पर जरूरतमंद परिवारों, गरीबों, यतीमों और बेसहारा लोगों की सहायता करें ताकि हर व्यक्ति त्योहार की खुशियों में शामिल हो सके। ईद का असली संदेश इंसानियत, मोहब्बत और एक-दूसरे के दुख-दर्द में साथ खड़े होने का है।
इस अवसर पर प्रमुख कमेटी मेम्बर व पदाधिकारी कमरूल इस्लाम, जमील खान, कारी उजैर अहमद, असद अहमद, नौशाद हुसैन, कारी मौहम्मद राशिद, मो० अजीम, मो० शमीम, रिज्जुक तुल्ला खान, मो० मोहसिन, गोल्डन राजपूत, मा॰ शकील अहमद, नासिर हुसैन, मास्टर सुहैल, शाहिद ठेकेदार आदि भी मौजूद रहे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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