कुरुक्षेत्र, 25 मई।  गीता मनीषी परमपूज्य स्वामी ज्ञानानंद जी की प्रेरणा से तथा  हरियाणा कला परिषद् एवं जीओ गीता गुरुकुल के सहयोग से आज बांसुरी वादन कार्यशाला के 15 वें दिन श्री कपिल शर्मा, नगर आयुक्त, कैथल व पूर्व में थानेसर के एस.डी.एम. एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती अर्चना शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में तथा कुरुक्षेत्र के प्रसिद्ध तबला वादक विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे । भगवद्गीता के समक्ष दीपक प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया । प्रशिक्षुओं ने मुख्य अतिथि के समक्ष  बांसुरी पर कुछ सरगमों का अभ्यास वादन कर के दिखाया तथा संस्थान के ध्येय गीत “हे योगेश्वर  हे परमेश्वर ऐसी कृपा प्रभु हम सब पे कर” तथा “राष्ट्र गान” की प्रस्तुति कर के अब तक की हुई कार्यशाला की प्रगति से अवगत कराया। इसके उपरांत श्री कपिल शर्मा जी ने अपने उद्बोधन में  सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया तथा प्रशंसा करते हुए सभी को बधाई दी एवं सभी प्रतिभागियों को भविष्य में सफलता की कामना करते हुए बांसुरी की प्रासंगिकता को इंगित किया।  उन्होंने बताया कि बांसुरी हमारी सांस्कृतिक धरोहर है एवं इसे सहेज कर रखना हमारा दायित्व है।  इसके पश्चात पॉलिटेक्निक उमरी में कार्यरत बहन अर्चना शर्मा ने अपने उद्बोधन में बांसुरी वादन कार्यशाला के प्रयास के लिए हरियाणा कला परिषद् व जीओ गीता गुरुकुल का विशेष धन्यवाद ज्ञापित करते हुएं परमपूज्य स्वामी ज्ञानानंद जी का आभार प्रकट किया जिन्होंने इसकी प्रेरणा दी व सुंदर स्थान प्रदत्त किया।

 उन्होंने  डॉ  कुकरेजा को साधुवाद देते हुए कहा कि इतने सुंदर ढंग से व मात्र 14 दिनों के अभ्यास में इतनी बड़ी उपलब्धि प्रतिभागियों द्वारा अर्जित करना एक सामान्य घटना नहीं है। इस कार्यशाला में योगेश्वर भगवान कृष्ण की सूक्ष्म उपस्थिति को स्पष्ट रूप में अनुभव किया जा सकता है। उन्होंने भी सभी प्रतिभागियों को शाबाशी दी। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित मशहूर तबला वादक यूनुस हुसैन ने विद्यार्थियों से तबला वादन की तालों संबंधित नवीनतम प्रयोगों को सांझा करते हुए विशेष तौर पर “कहरवा” तथा “दादरा” तालों का विस्तृत परिचय बड़े ही व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत किया। सभी प्रतिभागियों से प्रश्नोत्तर  द्वारा इन तालों के विभाग, मात्राएं, सम, खाली आदि की जानकारी साझा कर सभी ने ज्ञान वर्धन किया गया । इसके उपरांत कार्यशाला के संचालक एवं प्रशिक्षक डॉ मनीश कुकरेजा ने सभी को एक स्वर छोड़कर  वादन करने वाले अलंकार का अभ्यास सरलता से कराया तथा बताया कि बांसुरी वादन की कुल 5 कार्यशालाएं  इससे पूर्व आयोजित की जा चुकी हैं जिनमें से 4 ऑफलाइन तथा एक ऑनलाइन आयोजित की गई जिनमें लगभग 100 प्रतिभागी इस विद्या को उनके माध्यम से सीख चुके हैं। संयोजक डॉ सचिंद्र कुमार, पुस्तकालय अध्यक्ष वेद मिश्रा, मुख्य प्रशिक्षक डॉ कुकरेजा, सहप्रशिक्षक  पवन गुंबर व सहयोगी प्रशिक्षक देवेंद्र, ने मुख्य अतिथि जी को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

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