एकाग्रता, अभ्यास  एवं गुरु के मार्गदर्शन के बिना बांसुरी वादन में निपुणता संभव नहीं
कुरुक्षेत्र, 22 मई। गीता मनीषी परमपूज्य स्वामी ज्ञानानंद जी की प्रेरणा से तथा  हरियाणा कला परिषद् एवं जीओ गीता गुरुकुल के सहयोग से आज बांसुरी वादन कार्यशाला के 12 वें दिन मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध समाज सेवी प्रो डॉ आर के देसवाल जी, चेयरमैन श्रीमद भगवद्गीता अध्ययन केंद्र, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय उपस्थित रहे । भगवद्गीता के स्वरूप के समक्ष दीपक जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया । प्रशिक्षुओं ने मुख्य अतिथि के समक्ष  बांसुरी पर कुछ विशिष्ट अभ्यास एवं राष्ट्र गान प्रस्तुति कर के अब तक की हुई कार्यशाला की प्रगति से अवगत कराया।
गीता ज्ञान संस्थानम के शिक्षा प्रमुख डॉ वी के कोहली तथा डॉ तरुण शास्त्री द्वारा मुख्य अतिथि का विस्तृत परिचय दिया गया तथा कार्यशाला संयोजक डॉ सचिंद्र कुमार ने मुख्य अतिथि सहित सभी का आभार ज्ञापित किया। इसके उपरांत मुख्य अतिथि डॉ देसवाल ने अपने उद्बोधन में  सभी प्रतिभागियों की प्रशंसा करते हुए सभी को बधाई दी एवं उनके भविष्य में सफलता की कामना करते हुए प्रतिभागियों को बांसुरी में निपुणता प्राप्त करने की युक्तियां बताते हुए आवाह्न किया कि एकाग्रता, सतत् अभ्यास व गुरु का मार्गदर्शन ही उन्हें अभीष्ट लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक हो सकते हैं ।
हरियाणा कला परिषद् का विशेष धन्यवाद ज्ञापित करते हुए उन्होंने  हरियाणा सरकार का विशेष आभार प्रकट किया तथा भविष्य में भी इस तरह की कार्यशालाओं का आयोजन समय समय पर करवाने का अनुरोध किया। उन्होंने संस्थान में में चल रहे विभिन्न आयोजनों एवं बांसुरी कार्यशाला की उपयोगिता पर अपने विचार रखते हुए संस्थान के सभी अधिकारियों व विशेष रूप से गीता मनीषी परमपूज्य स्वामी ज्ञानानंद जी को इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरणा देने हेतु  शुभकामनाएं अभिव्यक्त की। इसके उपरांत कार्यशाला के संचालक एवं प्रशिक्षक डॉ मनीश कुकरेजा, कार्यशाला संयोजक डॉ सचिंद्र कुमार, पुस्तकालय अध्यक्ष वेद मिश्रा, सहप्रशिक्षक पवन गुंबर व सहयोगी प्रशिक्षक देवेंद्र, ने मुख्य अतिथि जी को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। सभी प्रतिभागियों एवं उनके अभिभावकों ने अपनी फीड बैक देते हुए कहा कि बांसुरी वादन कार्यशाला के बारहवें दिन  संस्थान की नियमित की जाने वाली प्रार्थना हे योगेश्वर हे परमेश्वर  की स स्वर लिपि बजाने से उनका बांसुरी वादन के प्रति श्रद्धा  उत्पन्न हुई है।
गीता ज्ञान संस्थान के पवित्र वातावरण में उन्हें भगवान कृष्ण की अराधना बांसुरी के माध्यम से करने की दिव्य अनुभूति हो रही है तथा आग्रह किया कि इस प्रकार की कार्यशालाओं का आयोजन प्रत्येक विद्यालय में किया जाना चाहिए।  ऐसा क्रियान्वित होने से  अधिकाधिक  संगीत में रुचि रखने वाले विद्यार्थी लाभान्वित हो पाएंगे। कार्यशाला का समापन शांति पाठ से किया गया। डॉ कुकरेजा ने आगामी  जानकारी देते हुए बताया कि आगामी शनिवार  23 मई 2026 को उनके बांसुरी के गुरु एवं प्रेरणा स्त्रोत उस्ताद डॉ मुजतबा हुसैन जी पटियाला से विशेष रूप से आयेंगे व दोपहर 3 से 5 बजे तक सभी प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करेंगे । कार्यक्रम का समापन शांति पाठ एवं प्रसाद वितरण कर किया गया ।

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