कुरुक्षेत्र, 20 मई : प्रेरणा वृद्धाश्रम एवं प्रेरणा संस्था के संस्थापक एवं संचालक डा. जय भगवान सिंगला समाज सेवा के साथ साथ लगातार साहित्य के क्षेत्र में भी उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं। हाल ही में सिरसा में आयोजित अखिल भारतीय लघु कविता सम्मेलन में डा. जय भगवान सिंगला ने मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत की। इस अवसर पर उन्हें सम्मानित भी किया गया। डा. सिंगला ने इस कार्यक्रम में कहा कि आज जमाना लघु की ओर जा रहा है। किसी के पास भी इतना समय नहीं है कि वह उपन्यास पढ़ सके। जहां पहले उपन्यास का समय था, उसके बाद कहानी और लघु कहानियां ने उसका स्थान ले लिया है। इसी तरह कविताओं में भी अब आज का जमाना लघु कविताओं का है। उन्होंने बताया कि प्रोफेसर रूप देवगुण ने इस विधा के जनक के रूप में एक अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अखिल भारतीय लघु कविता सम्मेलन के अवसर पर डा. जय भगवान सिंगला को शाल, अंग वस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कुरुक्षेत्र से तीन अन्य साहित्य अनुरागियों अरुण पाराशर, किरण गर्ग और सुरेखा को भी अंग वस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर बहुत से प्रसिद्ध साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। जिनमें 222 पुस्तकों के रचयिता और सूर पुरस्कार विजेता डा. मधु कांत, प्रोफेसर श्याम लाल कौशल, प्रोफेसर अंजना गर्ग, कैथल से मधु गोयल, पंचकूला से नीरू मित्तल इत्यादि 80 साहित्यकारों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर लगभग चार दर्जन पुस्तकों का विमोचन भी हुआ। जिनमें डा. जय भगवान सिंगला की पुस्तक पहला पहला प्यार का भी विमोचन किया गया। उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष यह सम्मेलन साहित्यकार सुरेन्द्र वर्मा के परिवार द्वारा उनकी स्मृति में सिरसा में आयोजित किया जाता है।

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