कुरुक्षेत्र, 18 मई : संसार में प्रत्येक मानव तथा जीव अपना कल्याण तो चाहता है, लेकिन कल्याण की लालसा में दूसरों का अहित करता है। जग ज्योति दरबार में सोमवार को श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हुए कठोर पंच धूणी अग्नि तपस्या पर बैठे महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि दूसरों का कल्याण एवं हित किए बिना स्वयं का कल्याण नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि ईश्वर की आराधना एवं तपस्या में ही जन कल्याण एवं समाज हित की भावना का मार्ग बताया गया है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने अग्नि तपस्या स्थल के दर्शन एवं परिक्रमा करते हुए भजन संकीर्तन भी किया। महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि धरती पर भगवान द्वारा मनुष्य रूप में लिए अवतारों एवं उद्देश्यों को समझना होगा। मनुष्य को कल्याण के मार्ग को समझना होगा। कल्याण का वास्तविक अर्थ क्या है, इन बातों पर मनुष्य विचार नहीं करता है। इसलिए जीवन भर मनुष्य दुखी रहता है। कल्याण का तात्पर्य है पूर्ण रूप से दुखों का नाश तथा परमानंद का नित्य अनुभव है। अध्यात्म के मार्ग से ही मानव का कल्याण संभव है। चंचल मन एवं इच्छाओं के कारण ही मनुष्य गलत मार्ग को आकर्षित होता है। महंत राजेंद्र पुरी ने बताया कि खुली वायु हमारे कल्याण का कारण होती है क्योंकि यह वायु हमारे सब प्रकार के रोगों को दूर करने का कारण होती है। इसके साथ ही साथ धूप का सेवन करने की प्रेरणा भी की गई है। धूप का मानव जीवन में विशेष महत्व होता है। जब हम धूप नहीं ले पाते तो चिकित्सक के पास जाना पड़ता है तथा वह हमें अनेक प्रकार की औषधियों का सेवन करने की सलाह देने के साथ ही कहता है कि धूप का सेवन ही यह कमीं दूर कर सकता है तथा हमारी हड्डियों को शक्ति दे सकता है। तपस्या की शक्ति का महत्व महंत राजेंद्र पुरी ने बताया कि कई ऋषि-मुनियों ने तो वेदों की मंत्र-शक्ति को कठोर योग व तपोबल से साधकर ऐसे अद्भुत कारनामों को अंजाम दिया कि बड़े-बड़े राजवंश व महाबली राजाओं को भी झुकना पड़ा। इस अवसर पर डा. मंजीत गुप्ता, डा. नंदिनी गुप्ता, जागीर सिंह नीमवाला, हर्ष कुमार, गुलशन, सोमदत्त, जतिन, स्वर्ण सिंह, अरमान, अनिल कुमार, कुशल, राहुल, दीपक, देवराज गुप्ता, विजय दत्त गोस्वामी, सुरेंद्र सिंह, अंग्रेज संधू, मोहिंदर पाल, हरजीत सिंह, कुलदीप सिंह, मंयक गोयल, जोगिंदर सिंह, योगध्यान सिंह, कमल गुप्ता, मीनाक्षी गुप्ता, सोहन लाल राणा, अजय राठी, राजेश्वर सिंह, विजय राठी, अक्षय राठी व मनप्रीत सिंह इत्यादि भी मौजूद रहे।
