करनाल, 16 मई। कृषि तथा किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉ वजीर सिंह ने बताया कि  हरियाणा भूमिगत जल संरक्षण अधिनियम के तहत कोई भी किसान 15 जून से पहले धान रोपाई नहीं कर सकता है। अगर कोई किसान इसका उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही अमल में लाई जाएगी जिसमें नियमानुसार 4,000 रुपए प्रति एकड़ प्रति माह का जुर्माना व  धान रोपित खेत नष्ट करने की लागत भी किसान से वसूली जाएगी।
उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष जिला प्रशासन व कृषि विभाग की ओर से ऐसा न करने की अपील की जाती है लेकिन कुछ गांवों के किसान इन्हें अनसुना कर देते हैं। हर वर्ष ऐसे मामले सामने आते हैं जिसमे समय से पहले खेतों में धान रोपाई की जाती हैं। हालांकि विभाग की ओर से नर्सरी व धान को नष्ट करने का कार्य किया जाता है। उन्होंने बताया कि समय से पहले अगर किसान अपने खेतों में धान रोपाई से संबंधित कार्य करता है तो पानी की खपत अधिक बढ़ जाती है जिस कारण प्रतिवर्ष भू जल का स्तर गहरा होता जा रहा है। धान की खेती करने से हर वर्ष पानी का स्तर नीचे खिसक रहा है। जिला के कई क्षेत्र तो डार्क जोन घोषित हो चुके हैं। अगर समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में यह स्थिति और भयावह होगी। उन्होंने बताया कि एक किलो चावल पैदा करने में लगभग 2500 से 3000 लीटर पानी की जरूरत पड़ती है। ऐसे में जल स्तर को बचाए रखने के लिए हरियाणा सरकार उन किसानों को प्रोत्साहन राशि भी दे रही है जो अब धान की खेती से पीछे हटते नजर आ रहे है। कृषि विभाग की ओर से किसानों को धान के स्थान पर अन्य फसल पैदा करने की सलाह दी जाती है। अगर कोई किसान धान के स्थान पर मक्का या अन्य फसल का उत्पादन करता है तो उसे प्रति एकड़ 8 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है।
इसके अलावा हर बार की तरह इस वर्ष भी जागरूकता अभियान चलाकर किसानों को समय से पहले धान न लगाने बारे, धान की सीधी बिजाई करने बारे व धान की जगह अन्य फसल लगाने बारे में जानकारी दी जा रही है। समय से पहले धान नर्सरी की बिजाई और 15 जून से पहले धान रोपाई को लेकर जिला प्रशासन करनाल एवं कृषि विभाग करनाल पूरी तरह से सतर्क है। अत: किसानों से अनुरोध है कि किसान 15 जून से पहले धान की रोपाई न करें ।

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