चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 15,000 ट्रामाडोल टैबलेट बरामदगी से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार रैपिडो कैब चालक राम कुमार पांडेय को जमानत देकर टिप्पणी की है कि केवल दंडात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए किसी आरोपी को बेल से वंचित नहीं किया जा सकता।

अदालत ने स्पष्ट कहा कि भारतीय आपराधिक न्यायशास्त्र का स्थापित सिद्धांत है कि बेल नियम है और जेल अपवाद।जस्टिस सुभाष मेहला ने अपने आदेश में कहा कि राज्य के जवाब के अनुसार याचिकाकर्ता चालक का सह-आरोपितों से कैब बुकिंग से पहले कोई संपर्क नहीं पाया गया। ऐसे में फिलहाल प्रथम दृष्टया यह माना जा सकता है कि बरामद कथित प्रतिबंधित सामग्री कैब में सवार ग्राहकों की थी, जिन्हें रैपिडो ऐप के माध्यम से यात्रा के लिए वाहन बुक किया गया था।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वास्तविक स्वामित्व और आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगा।मामले के अनुसार मेवात में 19 नवंबर 2025 को वाहन की पिछली सीट पर रखे दो बैगों से 800 और 700 स्ट्रिप्स में कुल 15,000 ट्रामाडोल टैबलेट बरामद हुई थीं।

उस समय चालक राम कुमार पांडेय के साथ सह-आरोपित अमन और मोहम्मद अरशद वाहन में मौजूद थे। राज्य ने इसे व्यावसायिक मात्रा बताते हुए जमानत का विरोध किया था ,सरकार की तरफ अदालत को बताया कि इतनी बड़ी बरामदगी गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है।

वहीं याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी कि चालक को झूठा फंसाया गया, क्योंकि न तो उसके कब्जे से कोई बरामदगी हुई और न ही यात्रियों से पूर्व संपर्क का कोई प्रमाण मिला।

उन्होंने अदालत को बताया कि चालक पिछले पांच माह से अधिक समय से जेल में है, उसका आपराधिक रिकॉर्ड साफ है और मुकदमे के शीघ्र समाप्त होने की संभावना नहीं।हाई कोर्ट ने चालक के स्वच्छ पूर्ववृत्त, लंबी हिरासत और जांच की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए कहा कि उसे और अधिक समय तक जेल में रखना न्यायोचित नहीं होगा। अदालत ने माना कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर याचिका में उचित है।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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