चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि नाबालिग बच्चा अपनी नानी की वास्तविक देखरेख में है, तो नानी भी उसकी ओर से गुजारे भत्ते को लेकर याचिका दाखिल कर सकती है।

अदालत ने कहा कि बच्चे के वैधानिक अधिकार को केवल इस आधार पर रोका नहीं जा सकता कि याचिका उसकी मां द्वारा दाखिल नहीं की गई।जस्टिस नीरजा के काल्सन ने अपने फैसले में कहा कि जब वैवाहिक संबंध टूट चुके हों और नानी वास्तव में बच्ची की परवरिश, देखभाल और खर्च उठा रही हो, तो उसे नाबालिग के अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत जाने का पूरा अधिकार है।
अदालत ने दोटूक कहा कि यह अधिकार नानी के व्यक्तिगत दावे पर आधारित नहीं, बल्कि बच्चे के वैधानिक अधिकार की सुरक्षा पर आधारित है।हाई कोर्ट ने पिता की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि याचिका केवल मां ही दाखिल कर सकती है।

अदालत ने क्या कहा?

अदालत ने कहा कि सामाजिक न्याय का परविधान जिसका उद्देश्य परित्याग और अभाव से सुरक्षा देता है। इसलिए इसे संकीर्ण तकनीकी दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता। खंडपीठ ने कहा कि नाबालिग बच्चे का अधिकार सर्वोपरि है और “मेंटेनेंस” का अर्थ केवल दो वक्त की रोटी नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन है, जिसमें भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा और चिकित्सा जैसी आवश्यक जरूरतें शामिल हैं।

मामले में पिता ने यह भी तर्क दिया था कि तलाक के समय एकमुश्त समझौते के तहत मां को दी गई राशि में बच्चे के लिए भी हिस्सा शामिल था, इसलिए बाद में अलग से गुजारे भत्ता दावा नहीं बनता।

अदालत ने इसे भी अस्वीकार

By Dr. Rajesh Wadhwa

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