होगी एफआईआर, मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर की जाएगी रेड एंट्री, अगले दो साल नहीं बेच पाएंगे एमएसपी पर फसलें
करनाल, 3 मई। किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग पूरी तरह से सतर्क है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेषों में आगजनी की घटना को अंजाम न दें, बल्कि उनका उचित प्रबंधन करें। उन्होंने बताया कि फसल अवशेषों में आगजनी के दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्यवाही की जाएगी, दोषी के खिलाफ संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी और मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल के रिकॉर्ड में उसकी रेड एंट्री की जाएगी जिससे दोषी किसान अगले दो वर्ष तक अपनी फसल एमएसपी पर नहीं बेच पाएंगे।
उन्होंने बताया कि जिला में लगभग 4,69,000 एकड़ में गेहूं की फसल लगाई जाती है व गेहूं की फसल की कटाई लगभग समाप्त हो गयी है और 60 प्रतिशत एरिया का प्रबंधन किया जाना शेष है। उन्होंने बताया कि फसल कटाई उपरांत बचे हुए अवशेषों में आग लगाने से हवा में हानिकारक गैसें फैलती हैं जिससे प्रदूषण बढ़ता है और सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य सम्बंधित समस्याएं होती हैं। इसके अलावा मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं व सूक्ष्म जीवों और केंचुओ की संख्या कम हो जाती है जिससे मिट्टी की उर्वरता घटती है।
उन्होंने बताया कि फसल अवेशषों में आगजनी की घटना को रोकने के लिए हरसैक हरियाणा की तरफ से सेटेलाइट के माध्यम से खेतों में नजर रखी जा रही है। फसल अवशेषों में आगजनी की घटना होने पर सैटेलाइट के माध्यम से लोकेशन कृषि विभाग की टीम को भेजी जाती है, जिस पर गठित ग्राम स्तरीय टीम द्वारा नियमानुसार कार्यवाही अमल में लाई जाती है। अभी तक जिला में हरसैक सैटेलाइट से 117 आगजनी की घटनाएं प्राप्त हुई हैं। उन्होंने बताया कि प्रति वर्ष की तरह इस वर्ष भी आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए जिला, तहसील, खंड एवं गांव स्तर पर कमेटी व एनफोर्समेंट टीमों का गठन किया गया है जो आगजनी की घटनाओं को रोकने के साथ-साथ नियमानुसार कार्यवाही भी अमल में लायेंगे। आगजनी की घटनाओं को शून्य करने के लिए विभाग द्वारा सभी गांवों में किसानों के लिए जागरूकता शिविर भी आयोजित किये जा रहे हैं। प्रत्येक गांव में मुनियादी व धार्मिक स्थानों पर लाउडस्पीकर के माध्यम से किसानों को जागरूक किया जा रहा है । स्कूल/ कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चों के सहयोग से रैलियां व प्रभात फेरी निकाली जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि जिला व खंड स्तर पर आगजनी की घटनाओं से सम्बंधित शिकायतों के समाधान के लिए कंट्रोल कक्ष स्थापित किये गये है। इन सभी कंट्रोल कक्षों में कोई भी किसान फसल अवशेष प्रबंधन की किसी भी प्रकार की समस्या के निवारण के लिए संपर्क कर सकता है। इन सभी कंट्रोल कक्षों के इंचार्ज की जानकारी निम्नलिखित है.
क्रमांक खंड इंचार्ज का नाम पद मोबाइल नंबर
1 करनाल गौरव मेहला खंड कृषि अधिकारी 94166-39696
2 घरौंडा जशनप्रीत कृषि विकास अधिकारी 79888-60273
3 इंद्री अश्वनी कम्बोज खंड कृषि अधिकारी 81681-40732
4 निसिंग बलदेव खंड कृषि अधिकारी 98965-15375
5 नीलोखेड़ी रामपाल खंड कृषि अधिकारी 94163-93447
6 असंध बलदेव खंड कृषि अधिकारी 98965-15375
7 उपनिदेशक कृषि कार्यालय पुनीत डाटा एंट्री ऑपरेटर 0184-2272623
करनाल
उन्होंने बताया कि फसल अवशेषों को जलाने की समस्या को रोकने के लिए पर्यावरण विभाग हरियाणा ने वायु (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 19(5) के प्रावधानों के अंतर्गत पूरे प्रदेश में गेहूं के अवशेषों को जलाने पर रोक लगाई हुई है। आगजनी करने वाले किसानों पर आर्थिक दंड लगाने का प्रावधान किया गया है जिसमें 2 एकड़ तक 5 हजार रुपये, 5 एकड़ तक 10 हजार रुपये तथा 5 एकड़ से ज्यादा 30 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही आगजनी के दोषी किसान के खिलाफ वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के अंतर्गत धारा 39 व भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 के अंतर्गत धारा 223 (ए) के अंतर्गत सम्बंधित थाना में एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी व उसके मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल रिकॉर्ड में रेड एंट्री की जाएगी, जिससे आगजनी के दोषी किसान अगले दो सीजन अपनी फसल एमएसपी पर नहीं बेच पाएंगे।
