अंबाला। देश में रेल सेवा 174 साल पुरानी हो चुकी है, लेकिन आतंकी हो या फिर आंदोलनकारी, सबसे आसान टारगेट यही होती है। बंद के आह्वान या फिर किसी भी विरोध की सूचना मिलते ही रेलवे पहले से ही ट्रेनों को रद कर यात्रियों को सफर में होने वाले खलल से बचाने का प्रयास तो करता है, लेकिन आज तक पटरी पर विरोध ही न हो पाए, इसका विकल्प ही रेलवे नहीं ढूंढ़ पाया।

अब अंबाला मंडल में दोहरा सुरक्षा घेरा बनाया गया है। जमीन पर खाकी गश्त करेगी और आसमान में ड्रोन से निगरानी शुरू कर दी है। बुधवार को रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने पंजाब के शंभू पास पटरी पर हुए धमाकास्थल का दौरा कर ड्रोन से सुरक्षा की बात कही और अंबाला में इसे उड़ा भी दिया गया।
मंडल में एक ही ड्रोन आया है, जबकि दूसरा मंगवाने के लिए उत्तर रेलवे के बड़ौदा हाउस मुख्यालय पत्राचार किया गया है। मंडल में करीब 135 स्टेशन हैं, जिसमें बड़े स्टेशनों की संख्या भी काफी हैं पर एक ड्रोन नाकाफी माना जा रहा है।

सीसीटीवी नेटवर्क को भी मजबूत किया जा रहा

रेल राज्य मंत्री ने कहा अंबाला मंडल में पहले से लगे सीसीटीवी नेटवर्क को भी मजबूत किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, ट्रैक के आसपास हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए मल्टी-लेयर निगरानी व्यवस्था लागू की जा रही है, ताकि किसी भी संदिग्ध हलचल को तुरंत पकड़ा जा सके।

रेलवे ईडीएफसी पर 24 घंटे गश्त को और सघन करेगा तथा निगरानी व्यवस्था का व्यापक विस्तार किया जाएगा। मंडल के पंजाब क्षेत्र में 173 सीसीटीवी कैमरे पहले ही लगाए जा चुके हैं और अतिरिक्त कैमरों की स्थापना जारी है।

कॉरिडोर के एकांत एवं संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां ड्रोन निगरानी सहित उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इसके अतिरिक्त ट्रैक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे के की-मैन द्वारा निरंतर जमीनी गश्त की जाएगी।

तीन महीने में दूसरी घटना

पिछले तीन महीनों में लगभग 35 किलोमीटर के दायरे में दूसरी घटना है। पहली घटना 23 जनवरी को हुई थी, जो राष्ट्रीय राजमार्ग-44 से लगभग 800–900 मीटर की दूरी पर थी, जबकि ताजा विस्फोट स्थल इसी राजमार्ग से लगभग 300 मीटर दूर स्थित है। प्रारंभिक आकलन से संकेत मिलता है कि असामाजिक तत्व राजमार्ग से आसान पहुंच का उपयोग कर रेलवे ट्रैक को निशाना बना रहे हैं।

ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, जो साहनेवाल को पश्चिम बंगाल से जोड़ता है, एक महत्वपूर्ण आर्थिक धुरी है, जहां प्रतिदिन लगभग 30 ट्रेनें औद्योगिक और कृषि उत्पादों का परिवहन करती हैं।

इस नेटवर्क में किसी भी प्रकार का व्यवधान राज्य और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक है। मंत्री ने लोको पायलट की सतर्कता की सराहना की, जिन्होंने झटका महसूस होते ही तुरंत जानकारी दी।

स्टेशल ट्रेन से पहुंचे मंत्री

दिल्ली से अंबाला छावनी स्टेशन पर स्पेशल ट्रेन से रेल राज्य मंत्री पहुंचे। यहां से मंडल अधिकारियों के साथ बिट्टू निरीक्षण ट्रेन में पंजाब घटनास्थल पर पहुंचे और फिर अंबाला से स्पेशल ट्रेन में रवाना हो गये।

रेल राज्य मंत्री की स्पेशल ट्रेन दिल्ली के लिए रवाना होने के लिए अंबाला छावनी के प्लेटफार्म नंबर तीन पर खड़ी थी। इसी बीच दिल्ली जाने वाली डीलेक्स एक्सप्रेस भी प्लेटफार्म नंबर दो पर पहुंच गई।

मंडल अधिकारी प्लेटफार्म पर ही खड़े थे। ऐसे में असमंजस में थे कि पहले कौन सी ट्रेन को हरी झंडी दें। इसके बाद रेल राज्य मंत्री ने खुद ही बोल दिया डीलेक्स को निर्धारित समय पर रवाना करें और बाद में उनकी स्पेशल ट्रेन रवाना की गई।

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