वियतनाम की मीडिया में छाया कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का 8वां अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने दी बधाई
वियतनामी फिल्म प्रेम की सुरधारा- लव गार्डन’ को मिला ‘बेस्ट इंटरनेशनल फिल्म’ अवॉर्ड
कुरुक्षेत्र, 26 मार्च। 
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग द्वारा संस्कृति सोसाइटी फॉर आर्ट एंड कल्चरल डेवलपमेंट, कुरुक्षेत्र के सहयोग से
आयोजित 8वें हरियाणा अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुनाई दे रही है। वियतनाम की मीडिया में भी इस फिल्म महोत्सव की विशेष चर्चा हो रही है। इस महोत्सव में वियतनाम से जुड़ी फिल्म “प्रेम की सुरधारा-लव गार्डन” को ‘द बेस्ट इंटरनेशनल फिल्म’ का प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया गया। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सिनेमा विभिन्न देशों की संस्कृतियों को जोड़ने और वैश्विक संवाद को मजबूत करने का प्रभावशाली माध्यम है।

युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक प्रो. विवेक चावला ने बताया कि यह “प्रेम की सुरधारा-लव गार्डन फिल्म वियतनाम की प्रसिद्ध लोक गायन परंपरा क्वान हो पर आधारित है, जिसे यूनेस्को द्वारा विश्व सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता प्राप्त है। फिल्म की कहानी वियतनाम के प्रख्यात कलाकार चु बाओ क्वे  के जीवन और उनके सांस्कृतिक योगदान से प्रेरित है, जिन्होंने वियतनाम की पारंपरिक धरोहर के संरक्षण और शोध के लिए अपना जीवन समर्पित किया है।
प्रो. विवेक चावला ने बताया कि इस फिल्म का निर्माण डॉ. बिस्वरूप रॉय चौधरी, मुख्य संपादक (इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स) और अध्यक्ष (वर्ल्ड रिकॉर्ड्स यूनियन) के निर्देशन में किया गया है। फिल्म में एक भारतीय युवा कलाकार और वियतनामी लोकगायन क्वान हो के बीच भावनात्मक संबंध और उसके सपनों के माध्यम से इस सांस्कृतिक विरासत की खोज की संवेदनशील कहानी दिखाई गई है।
फेस्टिवल निदेशक धर्मेन्द्र डांगी ने बताया कि  फिल्म में प्रोफेसर एवं मानद डॉक्टरेट से सम्मानित कलाकार चु.बाओ. क्वे. ने न केवल सलाहकार के रूप में योगदान दिया बल्कि अभिनय भी किया। उनके अनुभव और मार्गदर्शन ने फिल्म को गहराई प्रदान की और यह सुनिश्चित किया कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत की गई क्वान हो परंपरा की आत्मा और मौलिकता पूरी तरह बरकरार रहे।
धर्मेन्द्र डांगी ने बताया कि यह फिल्म “हेरीटेज प्रोटेक्टर नामक पुस्तक से प्रेरित है, जिसे स्वयं डॉ. बिस्वरूप रॉय चौधरी ने लिखा है और जो कलाकार चु बाओ क्वे के जीवन और उनके सांस्कृतिक योगदान पर आधारित है।
लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि अपनी विशिष्ट प्रस्तुति और सांस्कृतिक गहराई के कारण यह फिल्म दर्शकों और निर्णायकों पर गहरा प्रभाव छोड़ने में सफल रही। फिल्म ने वियतनामी संस्कृति, लोकसंगीत और मानवीय भावनाओं को इस तरह प्रस्तुत किया कि यह परंपरा और आधुनिकता के बीच एक सशक्त सेतु बनकर उभरी। 25 मार्च को उद्घाटन समारोह में इस फिल्म को ‘बेस्ट इंटरनेशनल फिल्म’ का पुरस्कार प्रदान किया गया, जिसे स्वयं कलाकार चु बाओ क्वे ने ग्रहण किया।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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