इसी प्रकार देश भगत आयुर्वेदिक कॉलेज, मंडी गोविंदगढ़ (पंजाब) के प्राचार्य डॉ. हेमराज ने कायचिकित्सा विभाग में वातरक्त विषय पर शोध करते हुए आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्रोफेसर डॉ. बलबीर सिंह संधु के मार्गदर्शन में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। गुरुवार को कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने दोनों शोधार्थियों को पीएचडी अवार्ड प्रदान किए। इस अवसर पर परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर डॉ. हेतल दावे, सेवानिवृत्त प्रो. बलबीर संधु सहित अन्य उपस्थित रहे।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि आयुष पद्धति में वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। विश्वविद्यालय शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहित करते हुए आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने दोनों शोधार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय:प्रो.आशीष
वहीं,आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता ने बताया कि आयुष विश्वविद्यालय से पीएचडी करने वाले यह पहले बैच के प्रथम शोधार्थी हैं, जो विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में विभिन्न विषयों और शोध विषयों पर 113 शोधार्थी शोध कार्य कर रहे हैं, जो आयुर्वेद के क्षेत्र में नई संभावनाएं और शोध परिणाम सामने लाएंगे।
श्री कृष्ण आयुष विवि में स्वास्थ्य जांच शिविर आज
ओपीडी-14 में बीएमडी व ओपीडी-56 में मोटापे की होगी जांच
कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रोफेसर वैद्य करतार सिंह धीमान के मार्गदर्शन में शुक्रवार को आयुर्वेदिक अस्पताल में स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किया जाएगा। विश्व मोटापा दिवस के उपलक्ष्य में काय चिकित्सा विभाग द्वारा ओपीडी नंबर-56 में मोटापे से संबंधित जांच व परामर्श शिविर लगाया जाएगा।
वहीं, संस्थान के शल्य तंत्र विभाग की ओर से हड्डियों से संबंधित रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा लोगों को समय पर जांच की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ओपीडी नंबर-14 में निःशुल्क बोन मिनरल डेंसिटी (BMD) जांच शिविर आयोजित किया जाएगा। आयुर्वेदिक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. राजा सिंगला ने बताया कि बीएमडी शिविर में शल्य तंत्र विभाग के विशेषज्ञ अत्याधुनिक मशीन के माध्यम से हड्डियों की मजबूती की जांच करेंगे। इस जांच के माध्यम से ऑस्टियोपोरोसिस सहित अन्य हड्डी संबंधी समस्याओं का प्रारंभिक अवस्था में ही पता लगाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में मरीजों की जांच के साथ-साथ उन्हें उचित परामर्श और आवश्यक उपचार संबंधी मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाएगा।
