राष्ट्रीय एकता शिविर का दूसरा दिन
कुरुक्षेत्र, 13 नवम्बर।
 कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में राज्य एनएसएस प्रकोष्ठ द्वारा पोषित एवं राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा आयोजित सात दिवसीय राष्ट्रीय एकता शिविर (एनआईसी) के द्वितीय दिवस का शुभारंभ योगाभ्यास एवं योग का दैनिक जीवन में क्या महत्व के बारे में अवगत कराकर किया गया।  प्रथम सत्र में कविता पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न राज्यों से आए स्वयंसेवकों ने श्रीकृष्ण, महिला सशक्तिकरण तथा भारत माता जैसे विविध विषयों पर कविताएँ प्रस्तुत की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव लेफ्टिनेंट डॉ. वीरेंद्र पाल ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए  एनएसएस स्वयंसेवक के रूप में स्वयं के अनुभव साझा करते हुए कहा कि राष्ट्रीय एकता शिविर विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं को जानने का अनूठा अवसर प्रदान करता है।  उन्होंने स्वयंसेवकों से कहा कि “भारत विविधताओं का देश है यहाँ हर राज्य, हर क्षेत्र अपनी अलग पहचान रखता है, फिर भी हम सब एक हैं।” उन्होंने गुजरात और गोवा में आयोजित अपने राष्ट्रीय एकता शिविरों की यादें साझा करते हुए बताया कि कैसे भोजन, संस्कृति और रहन-सहन की विविधता भारत की सुंदरता को दर्शाती है।
डॉ. वीरेन्द्र पाल ने कहा कि भारत को जानने के लिए एक जीवन भी कम है ।  सभी स्वयंसेवकों से आग्रह किया कि वे हर वर्ष एक पौधा अवश्य लगाएँ, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सेवा की भावना को भी बल मिले। उन्होंने बताया कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय देश के सबसे हरे-भरे परिसरों में से एक है। उन्होंने कहा कि एनएसएस का आदर्श वाक्य नॉट मी, बट यू हमें आत्मसेवा से ऊपर उठकर समाजसेवा की प्रेरणा देता है।
विशिष्ट अतिथि एवं मुख्य वक्ता डॉ. भीमराव आंबेडकर अध्ययन केंद्र के निदेशक डॉ. प्रीतम सिंह ने स्वयंसेवकों द्वारा प्रस्तुत कविताओं  की सराहना करते हुए “भारत बनाम मेरा भारत” विषय पर प्रेरणादायी व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि भारत केवल एक देश नहीं, बल्कि एक भावनात्मक परिवार है। जहाँ अपनापन, त्याग और सेवा की भावना निहित है। उन्होंने कहा कि “भारत” का अर्थ केवल भौगोलिक सीमाओं से नहीं बल्कि विविधता, संस्कृति और परंपराओं के एकीकरण से है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की अवधारणा को समझाते हुए उसकी महत्वत्ता पर प्रकाश डाला। प्रत्येक स्वयंसेवक को देश के विकास में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया ।
दोपहर  बाद  सत्र में वक्ता डॉ. आबिद अली ने समय प्रबंधन के महत्व को विभिन्न गतिविधि के माध्यम से समझाया। उन्होंने स्वयंसेवकों को पहले बिना समय सीमा और फिर केवल पांच सेकंड की सीमा में बुलाकर यह बताया कि जीवन में अनुशासन और समय का मूल्य कितना आवश्यक है।
सांस्कृतिक संध्या में  महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, असम और जम्मू-कश्मीर सहित अनेक राज्यों के स्वयंसेवकों ने अपने-अपने पारंपरिक नृत्य, समूह गीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। कार्यक्रमों में एकता में विविधता की झलक स्पष्ट दिखाई दी।
एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक डॉ. आनंद कुमार द्वारा मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि एवं वक्ताओं का स्वागत किया और उप कार्यक्रम समन्वयक डॉ नीरज बातीश ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर कार्यक्रम अधिकारी अमनदीप कौर, भुनेश्वर लाल साहू, महेश कुमार पी.वर्मा, शरबत हुसैन, नमनि भुइंयां, मंजू कुशवाह, महेश कुमार शेट्टी, संजय, कुमार गौतम, जगदीप सिंह तुली, समीर रॉय, विशाल एम. दशमुखा, कविता मेहता, स्वरित शर्मा, रामनिवास, सविता मलिक, मीनू, अमनदीप, कुमारी नीतू रानी, मोनिका, डॉ. राजरतन, डॉ. सतीश, डॉ. ज्योति, डॉ. निधि माथुर, स्वयंसेवक अंकिता, कुलदीप, सुमित,  मीनाक्षीकांत, जीतेल, आदित्य, गरिमा, हरमन आदि मौजूद रहे।

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