गुरुद्वारा साहिब पातशाही पहली और छठी में हजारों की तदाद में संगत ने नवाया शीश
दुनिया के रहबर श्री गुरु नानक देव जी महाराज की शिक्षाओं को जीवन में अपनाए : हरमनप्रीत सिंह
कुरुक्षेत्र। पहली पातशाही श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर धर्मनगरी के ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिबान में हजारों की तदाद में संगत ने शीश नवाया। यहां सुशोभित गुरुद्वारा साहिब पातशाही पहली एवं छठी में सुबह से ही संगत के आने का सिलसिला शुरु हो गया। संगत ने समागम के दौरान गुरुद्वारा साहिब के हजूरी रागी भाई मलिंदर सिंह, भाई बेअंत सिंह हैड ग्रंथी गुरुद्वारा साहिब पातशाही छठी और भाई सतनाम सिंह ने संगत को सिख इतिहास से जोड़ा। कार्यक्रम में हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमैंट कमेटी के प्रधान जत्थेदार जगदीश सिंह झींडा, मैंबर इंदरजीत सिंह, हरमनप्रीत सिंह बुट्टर, बीबी जसबीर कौर मसाना व सुखजिंदर सिंह मसाना, चीफ सैकेटरी जसविंदर सिंह दीनपुर, एडिशनल सैकेटरी कार्यालय पीए सतपाल सिंह डाचर, फलाईंग प्रभारी जज सिंह, मैनेजर हरमीत सिंह समेत अन्य ने भी शिरकत की।
समागम में संगत का मार्गदर्शन करते हुए धर्म प्रचार के ढाडी जत्थे बीबी सतनाम कौर अपनी ढाडी वारों के माध्यम से संगत के साथ गुरु इतिहास सांझा किया। उन्होंने कहा कि गुरबाणी, शबद और नाम सिमरन तीनों ही अमृत हैं। इन तीनों से मानव को आत्मिक जीवन व शांति मिलती है। नाम सिमरन/अमृत से सभी कष्ट दूर होते हैं। यही संदेश श्री गुरु नानक देव जी महाराज ने देश-दुनिया को दिया। उन्होंने कहा कि गुरबाणी, शबद और नाम सिमरन कर संगत को पाखंड व अंध विश्वास के मक्कड़ जाल से दूर रहना चाहिए। व्यक्ति को संसारिक यात्रा से मुक्ति दिलाने में सच्चे व पवित्र मन से नाम सिमरन ही अचूक माध्यम है।
हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमैंट कमेटी के मैंबर हरमनप्रीत सिंह बुट्टर ने कहा कि दुनिया के रहबर श्री गुरु नानक देव जी महाराज की शिक्षाओं को हमें जीवन में अपनाना चाहिए। उनकी शिक्षाओं को जीवन अपनाने से हम समाज को अंध विश्वास से मुकत कर सकते हैं। इसलिए हमें गुरु साहिब के संदेश एवं शिक्षाओं पर चलने का प्रण लेना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान कुरुक्षेत्र, कपाल मोचन, यमुनानगर, करनाल, सोनीपत, पानीपत, अमृतसर, रोहतक, कैथल, अंबाला, राजपुरा, मालवा समेत हरियाणा व पंजाब के कई जिलों से हजारों की तदाद में संगत ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज के समक्ष शीश नवाया।

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