चंडीगढ़। सरकारी स्कूलों में बच्चे कम होने पर मिड-डे मील वर्कर को नजदीक के दूसरे स्कूलों में समायोजित किया जाएगा। प्राथमिक शिक्षा महानिदेशक डॉ. विवेक अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि पदों के युक्तीकरण (रेशनलाइजेशन) की कोई योजना नहीं है। नियुक्ति को लेकर बच्चों की संख्या का पुराना फार्मूला ही लागू है।

प्राथमिक शिक्षा महानिदेशक के साथ मिड-डे मील योजना के प्रबंधक संजीव कुमार ने भी मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन हरियाणा (सीटू) के महासचिव जयभगवान और राज्य सचिव शरबती देवी से कहा कि अफवाहों पर ध्यान न दें।

यूनियन नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार 25 बच्चों तक एक, 26 से 100 बच्चों तक दो और इसके बाद अतिरिक्त 100 बच्चों पर एक अतिरिक्त कुक का प्रविधान है। इन्हीं निर्देशों के अनुरूप राज्य में मिड-डे मील कुक की भर्ती हुई है। यदि पदों के साथ छेड़छाड़ की गई तो बड़ा आंदोलन खड़ा होगा जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

यूनियन नेताओं ने निदेशक को याद दिलाया कि 19 अगस्त को शिक्षा मंत्री के साथ हुई बैठक में बनी सहमति के बिंदुओं को तुरंत लागू किया जाए। निदेशक ने भरोसा दिलाया कि जल्द ही जनवरी का 15 दिन का मानदेय दिया जाएगा।

वर्दी भत्ता 600 से बढ़ाकर 1600 रुपये किया जाएगा। साल में एक बार निशुल्क स्वास्थ्य जांच होगी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मिड डे मील कुक के मेडिकल हेतु महीने में एक दिन तय किया जाएगा। वर्कर का मानदेय प्रत्येक माह सात तारीख तक सभी कूक के खाते में एकमुश्त रूप से दिया जाएगा।

डॉ. विवेक अग्रवाल ने कहा कि सहमति के बिंदुओं पर फाइल तैयार की जा रही है। जल्द ही अमल में लाई जाएगी। यूनियन नेताओं ने कहा कि सरकार मिड-डे मील वर्कर्स के मानदेय में बढ़ोतरी करे। न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये प्रतिमाह हो और 12 महीने मानदेय मिले।

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