करनाल, 29 अगस्त – हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग ने एक मामले की सुनवाई के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ)कार्यालय,करनाल में पाई गई गंभीर लापरवाही और अव्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि अधीनस्थ कार्यालय के स्टाफ और डीपीओ कार्यालय के बीच समन्वय की कमी और समय पर दिशा-निर्देश न देने के कारण लाभार्थी को योजना का लाभ निर्धारित समय सीमा में उपलब्ध नहीं कराया गया,जिससे हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम, 2014 का उल्लंघन हुआ।

आयोग के प्रवक्ता ने बताया आयोग ने जांच में पाया गया कि यह मामला इस बात का उदाहरण है कि अधिकारियों की उदासीनता और जवाबदेही की कमी किस प्रकार नागरिकों को अनुचित कठिनाई में डाल सकती है। आयोग ने डीपीओ कार्यालय की कार्यप्रणाली को अव्यवस्थित बताया और स्पष्ट किया कि कार्यालय प्रमुख की जिम्मेदारी है कि वे समयबद्ध और प्रभावी संचालन सुनिश्चित करें।

आयोग ने डीओ-कम डीपीओ,करनाल को अधिनियम के तहत दोषी पाते हुए उन पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है और अपीलकर्ता को 5 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह राशि उनके सितंबर 2025 के वेतन से काटी जाएगी। जुर्माना राज्य कोषागार में जमा होगा और मुआवजा सीधे अपीलकर्ता के बैंक खाते में हस्तांतरित किया जाएगा। आयोग ने महानिदेशक,महिला एवं बाल विकास विभाग को निर्देश दिया है कि वे राशि की कटौती और भुगतान सुनिश्चित कर 13 अक्टूबर 2025 तक अनुपालन रिपोर्ट आयोग को भेजें।

इसके साथ ही, आयोग ने महिला एवं बाल विकास विभाग के महानिदेशक को निर्देश दिया है कि अपीलकर्ता के खाते में योजना की राशि 5 सितंबर 2025 तक जमा की जाए तथा फील्ड स्टाफ को ई-कुबेर प्रणाली पर व्यापक प्रशिक्षण प्रदान किया जाए,ताकि भविष्य में लाभार्थियों को अनावश्यक देरी या असुविधा का सामना न करना पड़े।

आयोग ने विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को भी यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि सभी योजनाओं और सेवाओं का वितरण पूर्णतः ऑनलाइन किया जाए, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे। उल्लेखनीय है की करनाल निवासी शिकायतकर्ता ने आयोग के समक्ष दर्ज शिकायत में यह आरोप लगाया गया कि महिला एवं बाल विकास विभाग की योजना के तहत अपीलकर्ता को निर्धारित समय पर हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम, 2014  के भीतर लाभ नहीं दिया गया। मामला 26 जुलाई 2024 को सरल पोर्टल पर दर्ज हुआ था, किंतु लाभार्थी को राशि 30 अप्रैल 2025 को प्रदान की गई, जो तय सीमा से काफी विलंबित था। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि इस देरी के पीछे कार्यालयीन समन्वय की कमी, सहायक स्तर पर यूनिकोड सत्यापन में देरी तथा लेखाकार द्वारा बिल प्रसंस्करण में लापरवाही मुख्य कारण रहे। अपीलकर्ता ने आरोप लगाया कि समय पर लाभ न मिलने के कारण उसे अनावश्यक कठिनाई का सामना करना पड़ा।

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