पंचकूला।  खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन के साथ अब हरियाणा भी कदमताल करेगा। विशेष रूप से सरसों-सूरजमुखी का रकबा और उत्पादन बढ़ाने पर फोकस रहेगा।

राज्य तिलहन मिशन की कमान मुख्य सचिव खुद संभालेंगे। प्रदेश सरकार ने राज्यस्तरीय कमेटी के साथ ही सभी जिलों में भी कमेटियां गठित कर दी हैं।

कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पंकज अग्रवाल ने कार्यक्रम के कार्यान्वयन की योजना बनाने एवं निगरानी के लिए राज्य स्तरीय बीज मिशन-कार्यकारी समिति की अधिसूचना जारी कर दी है।

पहले जहां राज्य स्तरीय बीज मिशन-कार्यकारी समिति की कमान कृषि विभाग के प्रधान सचिव के पास होती थी, वहीं अब मुख्य सचिव इस समिति की जिम्मेदारी संभालेंगे। कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अब सदस्य सचिव की भूमिका में रहेंगे।

समिति के सदस्यों में सहकारिता, उद्योग, ग्रामीण विकास, वित्त और खाद्य एवं आपूर्ति वितरण विभाग के प्रशासनिक सचिवों को भी शामिल किया गया है।

कृषि महानिदेशक, हिसार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के निदेशक, नाबार्ड के राज्य प्रभारी, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के नोडल अधिकारी, तिलहन से जुड़ी एफपीओ के दो प्रतिनिधि, खाद्य तेल उत्पादन से जुड़े दो उद्यमी और केंद्र सरकार के दो प्रतिनिधि शामिल होंगे।
तिलहन मिशन का उद्देश्य प्राथमिक तिलहन फसलों जैसे रेपसीड और सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी, तिल, कुसुम, नाइजर, अलसी और अरंडी के उत्पादन को बढ़ाना है। हरियाणा के सात जिलों झज्जर, भिवानी, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, हिसार और नूंह में तिलहन की खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चलाया गया है।

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