पंचकूला। Haryana News: बिजली वितरण निगमों द्वारा एलडीसी (लोअर डिविजन क्लर्क) के पदों पर चयनित उम्मीदवारों को सूचना देने में अपनाई गई दोहरी प्रणाली ने न्यायपालिका को चौंका दिया है।
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने इसे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सीधा प्रहार मानते हुए हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार विजिलेंस को जांच के आदेश दिए हैं।
कोर्ट ने साफ कहा है कि इस प्रकार के भेदभावपूर्ण रवैये को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और अगर इसमें जानबूझकर गड़बड़ी की गई है तो उसकी तह तक जाना न्याय का तकाजा है।
जस्टिस हरकेश मनुजा ने कहा कि एलडीसी (लोअर डिविजन क्लर्क) के पदों पर चयनित उम्मीदवारों को सूचना देने में जिस तरह से दो अलग-अलग तरीके अपनाए गए, चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर संदेह पैदा करता है।
2019 में निकली थी भर्ती
कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार, हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने 2019 में 946 एलडीसी के पदों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था, जिनमें 478 पद दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम और 486 पद उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के लिए थे।
चयन प्रक्रिया के बाद दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम को पहले 419 और फिर 71 उम्मीदवारों की अनुशंसा प्राप्त हुई। हाई कोर्ट ने पाया कि सूचना देने के तरीकों में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं।
240 उम्मीदवारों को व्यक्तिगत मैसेंजर के माध्यम से सूचना दी गई, जिनमें से 220 ने ज्वाइनिंग दी। 190 उम्मीदवारों को डाक के माध्यम से सूचना भेजी गई, लेकिन इनमें से केवल 20 ने ही ज्वाइन किया।
मैनेजिंग डायरेक्टर नहीं दे पाए जवाब
कोर्ट ने जब भारतीय डाक सेवा की वेबसाइट पर रैंडम डाक रसीदों की जांच करवाई तो पाया गया कि अधिकतर डाक की कोई पुष्टि नहीं मिली।
दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के मैनेजिंग डायरेक्टर अशोक कुमार गर्ग, जो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई के दौरान कोर्ट में उपस्थित थे, यह नहीं बता पाए कि राज्य सरकार या बिजली विभाग द्वारा सूचना देने के लिए कोई लिखित निर्देश जारी किए गए थे या नहीं।
