हालांकि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा 30 नवंबर 2022  को जारी गजट नोटिफिकेशन में किया गया है ऐसा उल्लेख
एडवोकेट ने राज्य निर्वाचन आयोग को लिखकर मामला उठाया, व्याप्त विसंगति दूर करने की अपील
अम्बाला – सोमवार अम्बाला जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष हेतु ज़िले के एडीसी ( अतिरिक्त उपायुक्त ) द्वारा  करवाए गए चुनाव   में वार्ड नंबर 1 (महिला के सिवाए वार्ड  ) से निर्वाचित निर्दलीय सदस्य राजेश कुमार सुपुत्र हेम राज बतौर अध्यक्ष (प्रेजिडेंट ) जबकि वार्ड  नंबर 11 ( अनुसूचित जाति  महिला के सिवाए वार्ड ) से निर्वाचित बहुजन समाज पार्टी (बसपा ) के करनैल सिंह सुपुत्र करतारा राम उपाध्यक्ष (वाईस प्रेजिडेंट ) के तौर पर निर्वाचित हुए हैं.
इसी बीच शहर निवासी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने सोमवार को  हरियाणा  राज्य निर्वाचन  आयुक्त धनपत सिंह, रिटायर्ड आईएएस को एक  अभिवेदन और अपील भेजकर एक रोचक परन्तु महत्वपूर्ण कानूनी पॉइंट उठाया है जिसमें उन्होंने लिखा है कि हालांकि गत माह 27  नवंबर 2022 को जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों  की मतगणना के पश्चात विजयी उम्मीदवारों अर्थात  नव-निर्वाचित सदस्यों को जो निर्वाचन प्रमाण-पत्र (इलेक्शन सर्टिफिकेट ) सम्बंधित आर. ओ. (रिटर्निंग ऑफिसर- निर्वाचन अधिकारी ) द्वारा प्रदान किये गए, उसमें उनके राजनीतिक दल की सम्बद्धता या उनके निर्दलीय होने सम्बन्धी कोई उल्लेख नहीं  किया गया था हालांकि उसके तीन दिन पश्चात 30 नवंबर 2022 को राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा हरियाणा पंचायती  राज कानून, 1994 की धारा 161(4)  में जारी गजट नोटिफिकेशन,  जिसमें उपरोक्त नव-निर्वाचित सदस्यों के नाम सर्वसाधारण हेतु अधिसूचित किये गए हैं, उसमें हालांकि उन सभी की राजनीतिक  दल की सम्बद्धता अथात वह किस राजनीतिक दल या पार्टी के हैं अथवा  उनके निर्दलीय होने सम्बन्धी स्पष्ट उल्लेख किया गया है.
ज्ञात रहे कि अंबाला जिला परिषद के नवनिर्वाचित 15 सदस्यों के नामों को अधिसूचित करने सम्बन्धी राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा 30 नवंबर 2022 को जारी गजट नोटिफिकेशन में  3 सदस्यों – हरविंदर कौर (वार्ड नंबर 6 महिला वार्ड  ), मक्खन सिंह ( वार्ड नंबर 9 – महिला के सिवाए वार्ड )  और गुरजीत (वार्ड नंबर 12 पिछड़ा वर्ग – क महिला के सिवाए वार्ड  )  के नाम के समक्ष   आम आदमी पार्टी, 2 सदस्यों – साक्षी गौड़ ( वार्ड नंबर 10 महिला वार्ड )  और पिंकी देवी ( वार्ड नंबर 13 अनुसूचित जाति महिला वार्ड )  के समक्ष   भारतीय जनता पार्टी और 2 सदस्यों – मुकेश कुमार ( वार्ड नंबर 7 अनुसूचित जाति महिला के सिवाए वार्ड)  और करनैल सिंह ( वार्ड नंबर 11 अनुसूचित जाति  महिला के सिवाए वार्ड )  के समक्ष  बहुजन समाज पार्टी की सम्बद्धता दर्शायी  गयी. हालांकि इन सभी सातों को  प्रदान  किये गये निर्वाचन प्रमाण पत्र  में  इन सबकी ऐसी राजनीतिक दल सम्बद्धता का उल्लेख नहीं किया गया है.
जहाँ तक शेष आठ नव निर्वाचित सदस्यों  – राजेश कुमार ( वार्ड नंबर 1  महिला के सिवाए वार्ड  ) मंजीत कौर (वार्ड नंबर 2  महिला  वार्ड) , पंकज सैनी (वार्ड नंबर 3  महिला के सिवाए वार्ड   ), राजेश देवी (वार्ड नंबर 4  महिला  वार्ड),, रजत सिंह (वार्ड नंबर 5  महिला के सिवाए वार्ड ), , अंकिता (वार्ड नंबर 8  अनुसूचित जाति महिला वार्ड) , सुखविंदर सिंह (वार्ड नंबर 14  अनुसूचित जाति महिला के सिवाए  वार्ड ) और दीपिका ( वार्ड नंबर 15  महिला वार्ड ) का विषय है जिन्हें उक्त नोटिफिकेशन में निर्दलीय के तौर पर दर्शाया गया है हालांकि इन सातों के भी निर्वाचन प्रमाण पत्र में उनके  निर्दलीय होने का उल्लेख नहीं किया गया है.
हेमंत ने  आगे बताया कि  हरियाणा पंचायती राज कानून, 1994 और  उसके अंतर्गत बनाए गए  हरियाणा पंचायती राज निर्वाचन नियमों, 1994 के मौजूदा प्रावधानों के  अनुसार आम चुनावों के बाद   जिला परिषद की पहली बैठक राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा उसके नव -निर्वाचित सदस्यों के नामों की गजट नोटिफिकेशन होने के चार सप्ताह के भीतर जिले  के डीसी अथवा उसके  द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी ( एडीसी ) द्वारा बुलाई जानी चाहिए जिसके एजेंडा में जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करवाना होता है. इस पहली मीटिंग (बैठक )  का कोरम (न्यूनतम संख्या ) जिला परिषद  के  दो-तिहाई सदस्य होता है  जो संख्या अम्बाला जिला परिषद के सम्बन्ध में 10 बनती है चूँकि यहाँ  निर्वाचित सदस्य 15  हैं. अगर  कोरम की कमी के कारण उस पहली बैठक को अगले दिन या किसी अन्य  दिन के लिए उस अधिकारी ( एडीसी) द्वारा स्थगित कर दिया जाता है, तो फिर उस अगले दिन या उस अन्य निर्धारित दिन की बैठक में  कोरम की आवश्यकता नहीं होती है. ऐसा बेशक गलत प्रतीत होता हो परन्तु    हरियाणा पंचायती राज निर्वाचन नियमावली, 1994 के नियम 77 जिसे नियम 76 ( 4ए) के साथ पढ़ा जाए, के अनुसार ऐसा ही प्रावधान किया गया  है.
हेमंत ने यह   भी बताया कि हाई कोर्ट के निर्दशानुसार  और राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आदेशों अनुसार  उपरोक्त दोनों पदों का चुनाव, अगर दोनों पदों हेतु उम्मीदवारों  की संख्या एक से अधिक है, तो ई.वी.एम. (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन ) से ही  होना चाहिए.  जहाँ तक एक अम्बाला जिला परिषद सदस्य के पुलिस कस्टडी में होने का विषय है. चूँकि वह अभी मात्र अभियुक्त है, इसलिए वह कोर्ट में अर्जी लगवाकर उक्त बैठक में उपस्थित होने की प्रार्थना करने हेतु स्वतंत्र था  और यहाँ तक कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद  का चुनाव भी लड़ सकता था.

By Dr. Rajesh Wadhwa

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