करनाल, 28 अप्रैल।   उपायुक्त उत्तम सिंह ने बताया कि गर्मी के मौसम में गर्म हवा और बढ़े हुए तापमान से लू (हीट वेव) लगने का खतरा बढ़ जाता है, खासकर धूप में घूमने वालों, खिलाडिय़ों, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को लू लगने का डर ज्यादा रहता है। लू लगने पर उसके इलाज से बेहतर है, हम लू से बचे रहें यानी बचाव इलाज से बेहतर है। जिला प्रशासन द्वारा जनहित में लू से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की गई है, जिसका सभी पालन करते हुए स्वास्थ्य सुरक्षा बनाए रखें।
हीट वेव से बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय
उपायुक्त उत्तम सिंह ने आमजन से आह्वान किया कि प्रशासन की ओर से जारी की गई एडवाइजरी की पालना करें और हीट वेव से बचे रहें। उन्होंने बताया कि हीट वेव से बचाव के लिए स्थानीय मौसम संबंधी खबरों के लिए रेडियो सुनें, टीवी देखें, समाचार पत्र पढ़ें। गर्मी में हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनें, अपना सिर ढककर रखें, कपड़े, हैट अथवा छतरी का उपयोग करें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं-भले ही प्यास न लगी हो, ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन), घर में बने पेय जैसे लस्सी, तोरानी (चावल का मांड) नींबू पानी, छाछ आदि का सेवन कर तरोताजा रहें। पार्किंग के समय बच्चों को वाहनों में छोड़कर न जाएं, उन्हें लू लगने का खतरा हो सकता है, नंगे पांव बाहर न जाएं, गर्मी से राहत के लिए हाथ का पंखा अपने पास रखें, काम के बीच में थोड़ा-थोड़ा विश्राम लें, खेत खलिहान में काम कर रहे हैं तो समय-समय पर पेड़ या छाया में ही आसरा लें। गर्मी के मौसम में जंक फूड का सेवन ना करें। ताजे फल, सलाद तथा घर में बना खाना खाएं। खासतौर से दोपहर 12 बजे से सायं 3 बजे के बीच धूप में सीधे ना जाएं। यदि बच्चे को उल्टी, घबराहट अथवा तेज सिरदर्द हो, सीने में दर्द हो अथवा सांस लेने में कठिनाई हो तो चिकित्सक को दिखाएं।
उपायुक्त ने बताया कि बढ़ती गर्मी में वृद्ध एवं कमजोर व्यक्तियों की खास देखभाल करें, तेज गर्मी, खासतौर से जब वे अकेले हों तो कम से कम दिन में दो बार उनकी जांच करें। ध्यान रहे कि उनके पास फोन हो, यदि वे गर्मी से बेचैनी महसूस कर रहे हों तो उन्हें ठंडक देने का प्रयास करें, उनके शरीर को गीला रखें, उन्हें नहलाएं अथवा उनकी गर्दन तथा बगलों में गीला तौलिया रखें, उनके शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ डॉक्टर अथवा एम्बुलेंस को बुलाएं, उन्हें अपने पास हमेशा पानी की बोतल रखने के लिए कहें।

हीटवेव में पशुओं का भी रखें विशेष ध्यान
उपायुक्त उत्तम सिंह ने बताया कि जारी एडवाइजरी के अनुसार पशुपालक इस बात पर ध्यान दें कि पशुओं का शेड खुला व हवादार हो और शेड की छत ऊंची हो। अगर शेड की छत टीन की बनी है तो उस पर पराली आदि की परत डाल देनी चाहिए ताकि शेड के अन्दर का तापमान कम रहे। पशुओं के शेड की दिशा पूर्व से पश्चिम की तरफ होनी चाहिए। पशुओं के शैड में पंखे व डेजर्ट कूलर का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। पशु शेड के बाहर खुले में केवल घने छायादार वृक्ष के नीचे ही बांधने चाहिए। पशु को कम से कम दो बार जोहड़ आदि में ले जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पशुओं के पीने के लिए हर समय सामान्य तापमान या थोड़ा ठंडा पानी उपलब्ध होना चाहिए। छोटे पशुओं के लिए ध्यान रखा जाए कि पानी की हौदी की ऊंचाई कम होनी चाहिए या उनके लिए किसी खुले मुंह के बर्तन में पानी पीने की व्यवस्था होनी चाहिए। गांव में सभी सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित पानी की होदियों में पशुओं के पीने के लिए स्वच्छ पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। गर्मियों में हरे चारे की कमी रहती है इसलिए इसकी उपलब्धता सुनिश्चित कर लेनी चाहिए तथा हरे चारे का संरक्षण कर साइलेज का प्रयोग भी किया जा सकता है। पशुओं को आहार सुबह जल्दी तथा शाम को या रात को देना चाहिए। पशुओं को संतुलित व पौष्टिक आहार देना चाहिए तथा आहार में खनिज मिश्रण का प्रयोग अवश्य करें।
उन्होंने बताया कि गर्मियों में भैंस मद (हीट) के दौरान केवल तार देती है व बोलती नहीं है, इसलिए सुबह व शाम को पशु मद (हीट) में है या नहीं इसकी जांच कर लेनी चाहिए। विदेशी नस्ल या संकर प्रजाति की गायों में इस मौसम में दुग्ध उत्पादन में भारी कमी आ जाती है इसलिए उन्हें उष्मीय तनाव से बचाने के लिए विशेष ध्यान देना अति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि किसी पशु को लू लग जाए तो पशुपालक तुरंत अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय /औषधालय में सम्पर्क करें।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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