अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव को 9 दिन तक बढ़ाने का प्रस्ताव, महर्षि संस्कृति विश्वविद्यालय बोर्ड के साथ मिलकर शोध जैसे कार्यो में करेगा योगदान, 10 सालों के शोध, विकास कार्यो पर की चर्चा, किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है सरस्वती नदी, अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस में देश व विदेश के वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों ने दिए सरस्वती नदीं की धरा को दौबारा प्रवाहित करने के सुझाव, वैज्ञानिकों के सुझावों पर किया जाएगा अमल, दिवसीय कांफ्रेंस का हुआ समापन
कुरुक्षेत्र, 1 फरवरी। मुख्यमंत्री के ओ एस डी एवं सरस्वती नदी विशेषज्ञ भारत भूषण भारती ने कहा कि तीन करोड़ साल पुरानी ऐतिहासिक पवित्र सरस्वती नदी को फिर से धारा पर प्रवाहित करने पर सरकार का पूरा फोकस है। इस अहम विषय को लेकर तीन दिवसीय वर्कशाप में वैज्ञानिकों ने कई अहम सुझाव दिए गए है। इन सभी सुझावों पर प्रदेश सरकार की तरफ से कार्य किया जाएगा। अहम पहलू यह है कि केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के प्रयासों से महोत्सव का वर्ष 2015 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने का कार्य शुरू किया। इसके बाद इस महोत्सव को पांच दिवसीय और आने वाले समय में इस महोत्सव को 9 दिवसीय मनाने के प्रस्ताव पर मंथन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ओएसडी भारत भूषण भारती शनिवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सीनेट हाल में तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती नदी कांफ्रेंस के समापन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने देश व विदेश के वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों द्वारा तीन दिन तक किए मंथन व चिंतन पर प्रकाश डालते हुए पत्रकारों को कहा कि अंतरराष्ट्रीय सरस्वती पर पिछले दस सालों में किए शोध कार्यो व विकास कार्यो पर विस्तार चर्चा की गई है। इसके साथ भविष्य सरस्वती पर शोध व अन्य कार्यो की रूपरेखा पर चर्चा की गई है। इस मंथन के दौरान सरस्वती शोध कार्यो व अध्यन कार्य के साथ संस्कृत भाषा को साथ जोडऩे का सुझाïव दिया गया। इस सुझाव पर अब कैथल के महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय को शोध के साथ अन्य अध्यन कार्यो के साथ जोड़ा जाएगा। इस देश में सस्ंकृत एक वैज्ञानिक, स्टीक व पुरानी भाषा है। इसलिए इस भाषा को सरस्वती नदी के शोध कार्यो के साथ जोड़ा जाएगा।
उन्होंने कहा कि देश विदेश के ज्ञाताओं ने माना है कि सरस्वती नदी का इतिहास करीब तीन करोड़ वर्ष पुराना है। इसके लिए सभी साक्ष्य भी सामने आ चुके है। अब वैज्ञानिकों के सुझाव पर सरस्वती नदी को फिर से धरा पर प्रवाहित करने की योजनाओं पर काम किया जाएगा। हालांकि दस सालों में खुदाई व मैपिंग का कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके साथ आदिबद्री से लेकर सिरसा जिला तक करीब 400 किलोमीटर में सरस्वती नदी पर पानी चला कर देखा जा रहा है। इस क्षेत्र में सरस्वती नदी की प्राचीन धारा प्रवाहित हो रही है। इन तीन दिनों में भारत की संस्कृति व सभ्यता सरस्वती सिंधु सभ्यता माना जाती है। इस नदी के किनारे ही वेदों व पुराणों की रचना हुई है। इस लगता है कि सरस्वती नदी थी, है और हमेशा रहेगी। इतना ही नहीं भारत विश्व गुरु था, है और हमेशा रहेगा। इस का सीधा संबंध सरस्वती नदी के साथ जुडा है।
उन्होंने कहा कि सरस्वती नदी अब आपदा के समय किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। यह नदी बरसातों पर दूसरी नदियों का ज्यादा पानी अपने अंदर ले रही है और गर्मियों में इस नदी से किसानों को पानी मिल रहा है। इसलिए यह नदी किसानों के आपदा के समय मदद कर रही है। इतना ही नदी किसानों ने स्वयं सीएम को सरस्वती नदी को धरातल पर प्रवाहित करने का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव का आगाज आदिबद्री से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किया था और इस महोत्सव का सरस मेला 4 फरवरी तक चलेगा। इस महोत्सव में विभिन्न प्रदेशों की कला और संस्कृति की झलक पिहोवा के सरस्वती तीर्थ स्थल पर देखने को मिली है। इस महोत्सव में हर प्रदेश का सांस्कृतिक विरासत देखने को मिली है। इस मौके पर निदेशक डा. ए आर चौधरी, अधीक्षक अभियंता अरविंद कौशिक, पूर्व चेयरमैन प्रशांत भूषण आदि उपस्थित थे।
फोटो नंबर 10 व 11

By Dr. Rajesh Wadhwa

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