कुरुक्षेत्र, 28 अक्टूबर। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग की ओर से हरियाणा दिवस के अवसर पर राज्य स्तरीय रत्नावली समारोह का आयोजन 1 से 4 नवंबर 2026 तक किया जाएगा जिसका शुभारंभ भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू द्वारा किया जाएगा। चार दिवसीय यह समारोह हरियाणवी लोक संस्कृति, कला, संगीत, नृत्य, नाट्य एवं पारंपरिक विरासत को समर्पित होगा। समारोह के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को युवा पीढ़ी से जोड़ने और कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच प्रदान किया जाएगा।
समारोह का उद्घाटन 1 नवंबर को प्रातः 10 बजे तथा समापन समारोह 4 नवंबर को सायं 3.30 बजे आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रमों का आयोजन कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के विभिन्न प्रमुख स्थलों, जिनमें श्रीमद्भगवद्गीता सदन, आर.के. सदन, ओपन एयर थिएटर, सीनेट हॉल, खुला मंच तथा क्रश हॉल शामिल हैं, में किया जाएगा।
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने जानकारी देते हुए बताया कि समारोह में भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु सहित हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष तथा हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी समारोह से जुड़े प्रमुख अतिथियों में शामिल हैं। समारोह में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा, सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्री कृष्ण कुमार बेदी, पूर्व मंत्री सुभाष सुधा, कुरुक्षेत्र के सांसद नवीन जिंदल, श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय, पलवल के संस्थापक कुलपति डॉ. राज नेहरू, पूर्व न्यायाधीश व मानवाधिकार आयोग हरियाणा के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा तथा मुख्यमंत्री हरियाणा के विशेष कर्तव्य अधिकारी भारत भूषण भारती, प्रो. दिनेश कुमार, कुलपति, श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय, पलवल, प्रो. सुदेश छिकारा, कुलपति, भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय, खानपुर कलां (सोनीपत), प्रो. करतार सिंह धीमान, कुलपति, श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र, प्रो. के.सी. शर्मा, अध्यक्ष, हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद, प्रो. दीप्ति धर्माणी, कुलपति, चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय, भिवानी, प्रो. संजय कौशिक, कुलपति, गुरुग्राम विश्वविद्यालय, गुरुग्राम, एनआईटी के निदेशक डॉ. ब्रह्मजीत सिंह, दादा लख्मीचंद स्टेट यूनिवर्सिटी आफ परफार्मिंग एंड विजुअल आर्टस, रोहतक के कुलपति डॉ. अमित आर्य, चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय, सिरसा के कुलपति प्रो. विजय कुमार, महर्षि वाल्मीकी संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल के कुलपति प्रो. राजेन्द्र कुमार अनायत, चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद के कुलपति प्रो. रामपाल सैनी, हरियाणा कला परिषद के उपाध्यक्ष महेश जोशी, हरियाणवी लोक रंगकर्मी डॉ. जगबीर राठी, कुलसचिव प्रो. वीरेन्द्र पाल, सांस्कृतिक परिषद के अध्यक्ष डॉ. रोहित दत्त, पूर्व अध्यक्ष डॉ. ऋषिपाल सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति रहेगी।
लोकगीत, नृत्य और रागिनी प्रतियोगिताएं होंगी आकर्षण
रत्नावली महोत्सव के संयोजक व छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एआर चौधरी ने बताया कि रत्नावली समारोह के दौरान हरियाणवी संस्कृति के विविध रंग देखने को मिलेंगे। पहले दिन हरियाणवी भजन, हरियाणवी लोक नृत्य, पॉप सॉन्ग हरियाणवी तथा रागिनी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही हरियाणवी हास्य एवं लोक अभिव्यक्तियों को भी मंच प्रदान किया जाएगा। 2 नवंबर को हरियाणवी फैशन शो, एनआरआई हरियाणवी फैशन, हरियाणवी नृत्य-रचना, रितु नृत्य, हरियाणवी लोकगीत, हरियाणवी गजल तथा महिला एकल नृत्य जैसी प्रस्तुतियां होंगी। इसी दिन हरियाणवी प्रश्नोत्तरी, हरियाणवी स्किट एवं ‘टिट बिट्स’ क्विज के साथ विद्यार्थियों की प्रतिभा को भी सामने लाया जाएगा। 3 नवंबर को हरियाणवी चौपाल, लोक परिधान, समूह नृत्य रासिया, संगीत संध्या, एकल अभिनय, हरियाणवी एकांकी, समूह गीत तथा हरियाणवी अथवा हरियाणा विषय पर आधारित लघु फिल्म जैसी प्रतियोगिताएं एवं प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। वहीं 4 नवंबर को हरियाणवी समूह नृत्य और पुरस्कार वितरण समारोह के साथ कार्यक्रम का समापन होगा। इस दिन पेशेवर कलाकारों की रागिनी प्रतियोगिता तथा ‘डे परफॉर्मर प्रेजेंटेशन’ भी आकर्षण का केंद्र रहेगा।
पारंपरिक कला एवं शिल्प को भी मिलेगा मंच
युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक प्रो. विवेक चावला ने बताया कि रत्नावली में केवल मंचीय प्रस्तुतियों तक ही कार्यक्रम सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि हरियाणा की पारंपरिक कला एवं शिल्प को भी विशेष स्थान दिया गया है। 2 से 4 नवंबर तक लोक चित्रकला की कार्यशाला एवं प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। इसके अलावा बोहिया, इंधी, पीढ़ा, बिंदरवाल, फुलझड़ी और सांझी आदि पारंपरिक कलात्मक वस्तुओं की तैयारी, सजावट और प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। क्रश हॉल में पुरानी एवं प्राचीन हरियाणवी वस्तुओं के संग्रह की प्रदर्शनी भी आयोजित होगी। 4 नवंबर को मौके पर चित्रकला प्रतियोगिता तथा पारंपरिक कलाकृतियों की प्रस्तुति एवं प्रदर्शनी का निर्णायक मूल्यांकन किया जाएगा।
हरियाणवी विरासत और युवा प्रतिभाओं का संगम
कुवि सांस्कृतिक परिषद के अध्यक्ष डॉ. रोहित दत्त ने बताया कि रत्नावली समारोह हरियाणा की लोक परंपराओं, बोली, वेशभूषा, संगीत, नृत्य, नाट्य और लोक कलाओं को एक मंच पर प्रस्तुत करने वाला महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजन है। समारोह में विद्यार्थियों के साथ विभिन्न क्षेत्रों के कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। इस आयोजन के माध्यम से हरियाणवी संस्कृति की विविध विधाओं को संरक्षित करने तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग की ओर से आयोजित इस चार दिवसीय राज्य स्तरीय समारोह में प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता, लोक कलाओं की जीवंतता और युवा प्रतिभाओं की रचनात्मकता का व्यापक प्रदर्शन देखने को मिलेगा।
