कुरुक्षेत्र 19 अक्टूबर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डा. गिरीश नागपाल ने कहा कि धान की कटाई के बाद फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करना पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसी उद्देश्य से कृषि एवं किसान कल्याण विभाग कुरुक्षेत्र द्वारा किसानों को जागरूक किया जा रहा है कि वे पराली को आग लगाने के बजाय उसका वैज्ञानिक प्रबंधन करें। इसी दिशा में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारीगण व कृषि विभाग व अन्य विभागों के अधिकारी/कर्मचारी जोन की सहायता से कड़ी निगरानी कर रहे है।
डीडीए डा. गिरीश नागपाल ने कहा कि किसान सुपर सीडर और हैप्पी सीडर जैसी मशीनों की सहायता से धान के अवशेषों के बीच गेहूं की बिजाई कर सकते है। इसके अतिरिक्त, बेलर और स्ट्रॉ रेक की मदद से पराली की गांठें बनाकर उसे खेत से बाहर ले जाया जा सकता है, जिससे उसका अन्य उपयोग संभव हो सके। इन विधियों को अपनाकर किसान पराली जलाने की आवश्यकता को कम कर सकते हैं। पराली को उचित तरीके से खेत में बनाए रखने से मिट्टी में जैविक पदार्थों के संरक्षण और नमी बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इसके विपरीत, पराली जलाने से धुआं फैलता है, वायु गुणवत्ता खराब होती है तथा मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्मजीव प्रभावित होते हैं। इसलिए फसल अवशेषों का प्रबंधन कृषि और पर्यावरण दोनों के लिए आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि कृषि विभाग द्वारा किसानों को पराली प्रबंधन की तकनीकों, आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग और गेहूं की समय पर बिजाई के संबंध में जागरूक किया जा रहा है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे पराली प्रबंधन की योजना समय रहते बनाएँ और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित कृषि अधिकारियों से मार्गदर्शन लें। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग कुरुक्षेत्र ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे पराली जलाने से बचें और फसल अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करके स्वच्छ वातावरण, स्वस्थ मिट्टी और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा दें।

By Dr. Rajesh Wadhwa

778-779, Partap Colony, Railway Road, Near Rudra Cinema, Opp Chaat King India Row, Kurukshetra 136118 Mob. 9896352867, 9467040367

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed