कुरुक्षेत्र, 19 अक्टूबर। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में युवा एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग की ओर से ‘रत्नावली’ हरियाणा दिवस राज्य स्तरीय महोत्सव-2026 का आयोजन 30 अक्टूबर से 2 नवंबर 2026 तक किया जाएगा। चार दिवसीय राज्य स्तरीय रत्नावली समारोह में हरियाणवी लोकगीत, भजन, रागनी, एकल एवं समूह नृत्य, हरियाणवी लूर, रसिया, लोक वेशभूषा, फैशन शो, नाटक, एकांकी, समूह गान, भाषण, प्रश्नोत्तरी सहित विभिन्न 33 सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त लोक चित्रकला कार्यशाला, पारंपरिक हस्तकला एवं प्राचीन हरियाणवी वस्तुओं की प्रदर्शनियां भी समारोह के प्रमुख आकर्षण रहेंगी।
रत्नावली महोत्सव के संयोजक छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. ए.आर. चौधरी ने बताया कि पहले दिन 30 अक्टूबर को ऑडिटोरियम हॉल में प्रातः 11 बजे उद्घाटन समारोह होगा। इसके बाद हरियाणवी पॉप गीत, हरियाणवी भजन, पुरुष एकल नृत्य और हरियाणवी भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। दोपहर बाद हरियाणवी कोरियोग्राफी, हरियाणवी लूर नृत्य, युगल रागनी तथा रागनी प्रतियोगिता आयोजित होगी। इसी दिन छात्रों की सांग प्रतियोगिता भी होगी।
पहले दिन ही लोक संस्कृति को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से लोक चित्रकला की कार्यशाला एवं प्रदर्शनी शुरू होगी, जो 30 अक्टूबर से 2 नवंबर तक चलेगी। इसमें प्रतिभागियों को पारंपरिक लोक चित्रकला के साथ-साथ बोहिया, इंधी, पीढ़ा, बिंदरवाल, फुलझड़ी और सांझी जैसी पारंपरिक कलात्मक वस्तुओं के निर्माण एवं सजावट से जुड़ी गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलेगा।
प्रो. ए.आर. चौधरी ने बताया कि 31 अक्टूबर को भी दिनभर विभिन्न प्रतियोगिताओं का सिलसिला जारी रहेगा। प्रातः 10 बजे महिला एकल नृत्य, पुरुष एवं महिला लोक परिधान, हरियाणवी लोकगीत, हरियाणवी स्किट तथा हरियाणवी क्विज की प्रारंभिक प्रतियोगिता होगी। छात्रों की सांग प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। दोपहर बाद हरियाणवी फैशन शो, हरियाणवी गजल तथा अन्य सांस्कृतिक गतिविधियां होंगी। शाम 5 बजे हरियाणवी लोक ऑर्केस्ट्रा की प्रस्तुति होगी, जबकि हरियाणवी क्विज के फाइनल का आयोजन भी निर्धारित है। इस दिन प्राचीन हरियाणवी वस्तुओं के संग्रह की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रहेगी। इसके साथ ही बोहिया, इंधी, पीढ़ा, बिंदरवाल, फुलझड़ी और सांझी की पारंपरिक सजावट से संबंधित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इस प्रकार महोत्सव में नई पीढ़ी को हरियाणा की पारंपरिक जीवनशैली और लोक कलाओं से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा।
युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक प्रो. विवेक चावला ने बताया कि 1 नवंबर को महोत्सव में हरियाणवी लोक जीवन और रंगमंच की विविध विधाओं का प्रदर्शन होगा। प्रातः हरियाणवी चौपाल, मोनो एक्टिंग, हरियाणवी समूह गीत तथा कविता से संबंधित कार्यक्रम होंगे। दोपहर 2 बजे रसिया समूह नृत्य और हरियाणवी एकांकी का आयोजन होगा। छात्रों की सांग प्रतियोगिता भी जारी रहेगी। हरियाणवी भाषा अथवा हरियाणा विषय पर आधारित लघु फिल्म की प्रस्तुति भी इस दिन कार्यक्रम का हिस्सा होगी। 1 नवंबर की शाम संगीत संध्या का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हरियाणवी लोक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का समागम देखने को मिलेगा। इसी दिन मौके पर चित्रकला प्रतियोगिता तथा चित्रकला प्रदर्शनी का आयोजन भी किया जाएगा। पारंपरिक बोहिया, इंधी, पीढ़ा, बिंदरवाल, फुलझड़ी और सांझी की प्रस्तुतियां निर्णयन के लिए प्रदर्शित की जाएंगी। महोत्सव के अंतिम दिन 2 नवंबर को प्रातः हरियाणवी समूह नृत्य तथा पेशेवर रागनी प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इस दिन ‘डे परफॉर्मर’ की प्रस्तुति भी निर्धारित है। चार दिनों तक चलने वाली विभिन्न प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक गतिविधियों के बाद पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
प्रो. विवेक चावला ने बताया कि ‘रत्नावली’ के माध्यम से हरियाणा की लोक परंपराओं को आधुनिक मंच पर प्रस्तुत करने के साथ-साथ विद्यार्थियों और प्रतिभागियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। लोक नृत्य, रागनी, सांग, लोकगीत, नाटक, पारंपरिक वेशभूषा, चित्रकला और लोक शिल्प जैसी विधाओं को एक ही मंच पर शामिल किए जाने से यह महोत्सव हरियाणवी संस्कृति के विविध रंगों को सामने लाएगा। चार दिवसीय आयोजन का समापन 2 नवंबर को पुरस्कार वितरण समारोह के साथ होगा।
