कुरुक्षेत्र, 24 जुलाई प्रेरणा वृद्धाश्रम में शुक्रवार को भारत माता के महान सपूत चंद्रशेखर आजाद एवं लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित हुए डा. जय भगवान सिंगला ने कहा कि महान सपूत चंद्रशेखर आजाद ने कहा था कि जब तक मैं जीवित हूँ अंग्रेज मुझे छू तक नहीं सकते। हम आजाद हैं, आजाद ही रहेंगे और उन्होंने इसको सिद्ध भी कर दिखाया।
डा. सिंगला ने कहा कि महान स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद की जयंती मना रहे हैं। उनका जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के भाबरा (अब आजाद नगर) में हुआ था।
इसी प्रकार वृद्धाश्रम में बड़े हर्षोल्लास के साथ लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के तौर पर विद्वान अरुण पाराशर एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में मां यशोदा वाटिका की संस्थापक राजकुमारी पंवर उपस्थित रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रेरणा वृद्धाश्रम के संस्थापक एवं संचालक डा. जय भगवान सिंगला ने कहा कि भारत माता के पांवो में पड़ी दासता की जंजीरों को काट फेंकने के लिए जो बलिदान लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी ने दिया, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। वो न केवल स्वतंत्रता संग्राम के सिपाही थे, अपितु इसके साथ साथ महान दार्शनिक विद्वान, चिंतक और समाज सुधारक भी थे। अरुण पराशर ने कहा कि बाल गंगाधर तिलक जी बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के स्वामी थे। उन्होंने अंग्रेजों के राज्य का सामना करने के लिए मराठा और केसरी के नाम से दो अखबार चलाए। जिन्होंने समाज में नई क्रांति पैदा की, भारत ही नहीं, विदेशों में भी उन अखबारों ने अंग्रेजी सरकार के कुशासन की पोल खोल कर रख दी। उन्होंने आगे कहा कि बाल पाल और लाल की तिकड़ी ने स्वतंत्रता संग्राम के यज्ञ में ऐसी चिंगारी उत्पन्न की कि अंग्रेजी साम्राज्य की चूलें हिल गई।
इस अवसर पर क्षमा मेहरोत्रा ने भी अपने विचार रखे। उपाध्यक्ष किरण गर्ग ने एक मार्मिक कविता के माध्यम से तिलक जी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर सुरेखा ने देशभक्ति का गीत सुनाकर सबको भाव विभोर कर दिया। अध्यक्ष जसवीर गुंबर ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि प्रेरणा संस्था सभी महापुरुषों का जन्म हर्षोल्लास के साथ मनाती है। इस अवसर पर मंच पर संचालन महासचिव हरकेश पपोसा ने किया।
