(कुरुक्षेत्र)जंतर-मंतर पर अपने अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे छात्रों व नवयुवाओं पर किया गया लाठीचार्ज बेहद निंदनीय, दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। यह घटना न केवल युवाओं की आवाज़ को दबाने का प्रयास है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सरकार युवाओं के मुद्दों को सुनने की बजाय बल प्रयोग का रास्ता अपना रही है।युवा जेजेपी, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह खैहरा ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार है। जब देश का युवा अपने भविष्य को लेकर सड़कों पर उतरता है, तो सरकार का कर्तव्य बनता है कि वह उनकी बात सुने और समाधान निकाले, न कि लाठीचार्ज कर उनकी आवाज़ को कुचले।उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर जैसी ऐतिहासिक जगह, जहां से हमेशा लोकतांत्रिक आंदोलनों की आवाज़ उठती रही है, वहां इस प्रकार का दमनकारी कदम बेहद चिंताजनक है। यह घटना साफ तौर पर दर्शाती है कि सरकार युवाओं की समस्याओं के प्रति संवेदनशील नहीं है।डॉ. खैहरा ने केंद्र सरकार से मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करवाई जाए तथा जिन अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत इस्तीफा देने की मांग भी की।उन्होंने आगे कहा कि देश का युवा आज बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था और अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। ऐसे समय में सरकार को चाहिए कि वह युवाओं के साथ संवाद स्थापित करे और उनकी जायज़ मांगों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करे।अंत में उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता। यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो यह आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।जंतर-मंतर पर अपने अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे छात्रों व नवयुवाओं पर किया गया लाठीचार्ज बेहद निंदनीय, दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। यह घटना न केवल युवाओं की आवाज़ को दबाने का प्रयास है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सरकार युवाओं के मुद्दों को सुनने की बजाय बल प्रयोग का रास्ता अपना रही है।युवा जेजेपी, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह खैहरा ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार है। जब देश का युवा अपने भविष्य को लेकर सड़कों पर उतरता है, तो सरकार का कर्तव्य बनता है कि वह उनकी बात सुने और समाधान निकाले, न कि लाठीचार्ज कर उनकी आवाज़ को कुचले |उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर जैसी ऐतिहासिक जगह, जहां से हमेशा लोकतांत्रिक आंदोलनों की आवाज़ उठती रही है, वहां इस प्रकार का दमनकारी कदम बेहद चिंताजनक है। यह घटना साफ तौर पर दर्शाती है कि सरकार युवाओं की समस्याओं के प्रति संवेदनशील नहीं है।डॉ. खैहरा ने केंद्र सरकार से मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करवाई जाए तथा जिन अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत इस्तीफा देने की मांग भी की।उन्होंने आगे कहा कि देश का युवा आज बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था और अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। ऐसे समय में सरकार को चाहिए कि वह युवाओं के साथ संवाद स्थापित करे और उनकी जायज़ मांगों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करे।अंत में उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता। यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो यह आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
