कुरुक्षेत्र, 17 जुलाई। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद की बैठक शुक्रवार को कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय के कमेटी रूम में संपन्न हुई। बैठक में विश्वविद्यालय के प्रशासनिक, शैक्षणिक, वित्तीय तथा विकासात्मक कार्यों से संबंधित 40 महत्वपूर्ण एजेंडा बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। परिषद ने शिक्षकों और कर्मचारियों के सेवा मामलों, नई शैक्षणिक पहलों, पदोन्नतियों, नियुक्तियों, छात्र हितों तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की। बैठक की शुरुआत 7 अप्रैल को हुई कार्यकारी परिषद की बैठक की कार्यवाही की पुष्टि तथा उस पर हुई कार्रवाई की समीक्षा से हुई।
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि कार्यकारी परिषद द्वारा लिए गए निर्णय विश्वविद्यालय को शैक्षणिक उत्कृष्टता, प्रशासनिक दक्षता और नवाचार की दिशा में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, रोजगारोन्मुख और शोध आधारित शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन निर्णयों से शिक्षकों, कर्मचारियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा और अधिक सुदृढ़ होगी।
कार्यकारी परिषद की बैठक में विश्वविद्यालय के विभिन्न शिक्षण विभागों एवं संस्थानों में कैरियर एडवांसमेंट स्कीम के अंतर्गत सीनियर प्रोफेसर, प्रोफेसर एवं एसोसिएट प्रोफेसर पदों पर पदोन्नति प्रदान करने की मंजूरी प्रदान की गई जिसमें इतिहास विभाग के प्रो. डॉ. एस.के. चहल को सीनियर प्रोफेसर, ललित कला विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पवन कुमार तथा डॉ. गुरचरण सिंह को प्रोफेसर (सीएएस) और आईआईएचएस के सहायक प्रोफेसर (एसएफएस) डॉ. विवेक को एसोसिएट प्रोफेसर(सीएएस) पद पर पदोन्नति के लिए चयन समिति ने मंजूरी प्रदान की। डॉ. सौरभ चौधरी को ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को अनुमोदित किया गया। कार्यकारी परिषद ने कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा तथा कुलसचिव डॉ. वीरेंद्र पाल की नियुक्ति की शर्तों एवं नियमों को औपचारिक स्वीकृति प्रदान की। परिषद सदस्यों ने कहा कि विश्वविद्यालय के नेतृत्व में प्रशासनिक पारदर्शिता, शैक्षणिक गुणवत्ता और नवाचार को नई दिशा मिली है।
बैठक का एक महत्वपूर्ण निर्णय शैक्षणिक परिषद की सिफारिशों को स्वीकृति देना रहा। परिषद ने पीएचडी शोध प्रबंध मूल्यांकन का मानदेय 1500 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये तथा पीएचडी वाइवा का मानदेय 1000 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये करने के निर्णय को मंजूरी प्रदान की। इसके अतिरिक्त यूजी एवं पीजी बोर्ड ऑफ स्टडीज में बाहरी विशेषज्ञों के मानदेय को बढ़ाकर 1500 रुपये करने का निर्णय भी अनुमोदित किया गया।
बैठक में अधीक्षक राकेश कुमार (पीडब्ल्यूबीडी श्रेणी), अशोक कुमार तथा सुनीता रानी को सहायक कुलसचिव (बजटेड) के पद पर पदोन्नत करने की अनुशंसा की गई इसके साथ ही सतीश कुमार, विकास, अंशुल शर्मा तथा मंदीप शर्मा को उप-अधीक्षक पद से अधीक्षक पद पर पदोन्नति के लिए स्वीकृति प्रदान की गई।
बैठक में विधि संस्थान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रमेश कुमार के उपनिदेशक के रूप में कार्यकाल विस्तार के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई। फार्मास्युटिकल साइंसेज संस्थान के पूर्व सहायक आचार्य डॉ. प्रबोध चंदर के तकनीकी त्यागपत्र से जुड़े मामले पर भी विचार कर आवश्यक निर्णय लिया गया।
बैठक में गणित विभाग के डॉ. अनुपम खन्ना तथा डॉ. सुरेंद्र सिंह को एसोसिएट प्रोफेसर पद पर पुष्टि प्रदान करने संबंधी मामलों को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही विभिन्न विभागों में कैरियर एडवांसमेंट स्कीम के अंतर्गत वरिष्ठ प्रोफेसर, प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर पदों पर पदोन्नति संबंधी चयन समितियों की सिफारिशों को भी स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में विश्वविद्यालय के प्रशासनिक ढांचे को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से सहायक कुलसचिव एवं अधीक्षक पदों पर पदोन्नति संबंधी स्थापना समिति की सिफारिशों को मंजूरी दी गई। साथ ही विभिन्न विभागों और कार्यालयों में अधीक्षक, सहायक तथा क्लर्क पदों के पुनर्वितरण (बाइफरकेशन) संबंधी प्रस्ताव को भी स्वीकृति मिली। खेल गतिविधियों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से परिषद ने संविदा खेल प्रशिक्षकों के मासिक मानदेय में वृद्धि संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की। प्रशिक्षकों के योगदान को देखते हुए यह निर्णय खिलाड़ियों के प्रदर्शन और खेल संस्कृति को मजबूत करेगा।
शैक्षणिक विस्तार और शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए परिषद ने गांधी मेमोरियल नेशनल कॉलेज, अंबाला छावनी को चार वर्षीय एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम (आईटीईपी) प्रारंभ करने हेतु अस्थायी संबद्धता प्रदान करने को स्वीकृति दी। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शिक्षक शिक्षा को नई दिशा देगा।
बैठक में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में रिक्त प्रोफेशनल असिस्टेंट पदों को आवश्यकता अनुसार प्रत्यक्ष भर्ती अथवा पदोन्नति के माध्यम से भरने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त स्ववित्तपोषित योजना के अंतर्गत विभिन्न विभागों में सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति संबंधी समिति की सिफारिशों को भी मंजूरी दी गई।
कार्यकारी परिषद ने विश्वविद्यालय में एडजंक्ट फैकल्टी की नियुक्ति के लिए दिशा-निर्देशों को स्वीकृति प्रदान की। इसके माध्यम से उद्योग, प्रशासन, शोध एवं अन्य क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञ विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान और कौशल आधारित शिक्षा प्रदान कर सकेंगे। परिषद ने इसे उद्योग-अकादमिक समन्वय को मजबूत करने वाला कदम बताया।
बैठक में सेवानिवृत्त शिक्षकों की पुनर्नियुक्ति नीति तथा विभिन्न विभागों में उनकी सेवाएं लेने संबंधी प्रस्तावों पर भी सहमति व्यक्त की गई। इसी क्रम में आईटीटीआर में अंग्रेजी विषय के लिए प्रो. (सेवानिवृत्त) डॉ. अमीषा सिंह तथा सीडीओई में दर्शनशास्त्र विषय के लिए प्रो. (सेवानिवृत्त) डॉ. आर.के. देसवाल की सेवाएं लेने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। डॉ. देसवाल को श्रीमद्भगवद्गीता अध्ययन केंद्र का दायित्व भी यथावत सौंपे रखने का निर्णय लिया गया। बैठक में इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंडो-पैसिफिक स्टडीज के निदेशक प्रो. वी.एन. अत्री के कार्यकाल विस्तार तथा विभिन्न चयन समितियों एवं विभागों के लिए विशेषज्ञ पैनलों के गठन को भी मंजूरी प्रदान की गई। विद्यार्थी हितों को ध्यान में रखते हुए परिषद ने अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (एईडीपी) से संबंधित शुल्क और संचालन व्यवस्था पर विचार करते हुए आवश्यक निर्णय लिए। परिषद ने कहा कि यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को अध्ययन के साथ-साथ उद्योगों में व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
बैठक में विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में रोज गार्डन एवं गार्डन कैफेटेरिया के निर्माण तथा सौंदर्यीकरण के लिए दिए गए सहयोग की सराहना की गई। परिषद ने इसे पूर्व विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय के बीच मजबूत संबंधों का उदाहरण बताया। शोध और छात्र कल्याण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्यकारी परिषद ने “डॉ. सोमवीर जाखड़ स्मृति छात्रवृत्ति” स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस योजना के तहत वनस्पति विज्ञान विभाग के एम.एससी. अंतिम वर्ष के एक पात्र विद्यार्थी को प्रतिवर्ष 15 हजार रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। बैठक में हिंदी विभाग में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया 2024-25 से संबंधित शिकायतों पर गठित समिति की रिपोर्ट पर भी विचार किया गया। इसके अलावा हरियाणा सरकार द्वारा पदोन्नति में आरक्षण संबंधी जारी संशोधित निर्देशों को विश्वविद्यालय में लागू करने संबंधी विषय पर भी चर्चा हुई।
कार्यकारी परिषद ने विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में अध्यक्ष पदों के अतिरिक्त कार्यभार संबंधी निर्णयों को भी अनुमोदित किया। इसके अंतर्गत हिंदी विभाग का कार्यभार प्रो. महासिंह पूनिया तथा जूलोजी विभाग का कार्यभार प्रो. जितेंद्र कुमार को सौंपे जाने के निर्णय को मंजूरी दी गई। साथ ही जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान की निदेशक के रूप में प्रो. बिंदु शर्मा को दायित्व सौंपने के निर्णय को भी अनुमोदन प्रदान किया गया।
बैठक में कुलसचिव प्रो. वीरेन्द्र पाल, डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. राकेश कुमार, डीन ऑफ कॉलेजिज प्रो. ब्रजेश साहनी, प्रो. सुनील ढींगरा सहित कार्यकारिणी परिषद के सदस्य मौजूद थे।
कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि कार्यकारी परिषद द्वारा लिए गए निर्णय विश्वविद्यालय को शैक्षणिक उत्कृष्टता, प्रशासनिक दक्षता और नवाचार की दिशा में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, रोजगारोन्मुख और शोध आधारित शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन निर्णयों से शिक्षकों, कर्मचारियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा और अधिक सुदृढ़ होगी।
कार्यकारी परिषद की बैठक में विश्वविद्यालय के विभिन्न शिक्षण विभागों एवं संस्थानों में कैरियर एडवांसमेंट स्कीम के अंतर्गत सीनियर प्रोफेसर, प्रोफेसर एवं एसोसिएट प्रोफेसर पदों पर पदोन्नति प्रदान करने की मंजूरी प्रदान की गई जिसमें इतिहास विभाग के प्रो. डॉ. एस.के. चहल को सीनियर प्रोफेसर, ललित कला विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पवन कुमार तथा डॉ. गुरचरण सिंह को प्रोफेसर (सीएएस) और आईआईएचएस के सहायक प्रोफेसर (एसएफएस) डॉ. विवेक को एसोसिएट प्रोफेसर(सीएएस) पद पर पदोन्नति के लिए चयन समिति ने मंजूरी प्रदान की। डॉ. सौरभ चौधरी को ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को अनुमोदित किया गया। कार्यकारी परिषद ने कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा तथा कुलसचिव डॉ. वीरेंद्र पाल की नियुक्ति की शर्तों एवं नियमों को औपचारिक स्वीकृति प्रदान की। परिषद सदस्यों ने कहा कि विश्वविद्यालय के नेतृत्व में प्रशासनिक पारदर्शिता, शैक्षणिक गुणवत्ता और नवाचार को नई दिशा मिली है।
बैठक का एक महत्वपूर्ण निर्णय शैक्षणिक परिषद की सिफारिशों को स्वीकृति देना रहा। परिषद ने पीएचडी शोध प्रबंध मूल्यांकन का मानदेय 1500 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये तथा पीएचडी वाइवा का मानदेय 1000 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये करने के निर्णय को मंजूरी प्रदान की। इसके अतिरिक्त यूजी एवं पीजी बोर्ड ऑफ स्टडीज में बाहरी विशेषज्ञों के मानदेय को बढ़ाकर 1500 रुपये करने का निर्णय भी अनुमोदित किया गया।
बैठक में अधीक्षक राकेश कुमार (पीडब्ल्यूबीडी श्रेणी), अशोक कुमार तथा सुनीता रानी को सहायक कुलसचिव (बजटेड) के पद पर पदोन्नत करने की अनुशंसा की गई इसके साथ ही सतीश कुमार, विकास, अंशुल शर्मा तथा मंदीप शर्मा को उप-अधीक्षक पद से अधीक्षक पद पर पदोन्नति के लिए स्वीकृति प्रदान की गई।
बैठक में विधि संस्थान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रमेश कुमार के उपनिदेशक के रूप में कार्यकाल विस्तार के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई। फार्मास्युटिकल साइंसेज संस्थान के पूर्व सहायक आचार्य डॉ. प्रबोध चंदर के तकनीकी त्यागपत्र से जुड़े मामले पर भी विचार कर आवश्यक निर्णय लिया गया।
बैठक में गणित विभाग के डॉ. अनुपम खन्ना तथा डॉ. सुरेंद्र सिंह को एसोसिएट प्रोफेसर पद पर पुष्टि प्रदान करने संबंधी मामलों को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही विभिन्न विभागों में कैरियर एडवांसमेंट स्कीम के अंतर्गत वरिष्ठ प्रोफेसर, प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर पदों पर पदोन्नति संबंधी चयन समितियों की सिफारिशों को भी स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में विश्वविद्यालय के प्रशासनिक ढांचे को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से सहायक कुलसचिव एवं अधीक्षक पदों पर पदोन्नति संबंधी स्थापना समिति की सिफारिशों को मंजूरी दी गई। साथ ही विभिन्न विभागों और कार्यालयों में अधीक्षक, सहायक तथा क्लर्क पदों के पुनर्वितरण (बाइफरकेशन) संबंधी प्रस्ताव को भी स्वीकृति मिली। खेल गतिविधियों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से परिषद ने संविदा खेल प्रशिक्षकों के मासिक मानदेय में वृद्धि संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की। प्रशिक्षकों के योगदान को देखते हुए यह निर्णय खिलाड़ियों के प्रदर्शन और खेल संस्कृति को मजबूत करेगा।
शैक्षणिक विस्तार और शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए परिषद ने गांधी मेमोरियल नेशनल कॉलेज, अंबाला छावनी को चार वर्षीय एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम (आईटीईपी) प्रारंभ करने हेतु अस्थायी संबद्धता प्रदान करने को स्वीकृति दी। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शिक्षक शिक्षा को नई दिशा देगा।
बैठक में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में रिक्त प्रोफेशनल असिस्टेंट पदों को आवश्यकता अनुसार प्रत्यक्ष भर्ती अथवा पदोन्नति के माध्यम से भरने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त स्ववित्तपोषित योजना के अंतर्गत विभिन्न विभागों में सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति संबंधी समिति की सिफारिशों को भी मंजूरी दी गई।
कार्यकारी परिषद ने विश्वविद्यालय में एडजंक्ट फैकल्टी की नियुक्ति के लिए दिशा-निर्देशों को स्वीकृति प्रदान की। इसके माध्यम से उद्योग, प्रशासन, शोध एवं अन्य क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञ विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान और कौशल आधारित शिक्षा प्रदान कर सकेंगे। परिषद ने इसे उद्योग-अकादमिक समन्वय को मजबूत करने वाला कदम बताया।
बैठक में सेवानिवृत्त शिक्षकों की पुनर्नियुक्ति नीति तथा विभिन्न विभागों में उनकी सेवाएं लेने संबंधी प्रस्तावों पर भी सहमति व्यक्त की गई। इसी क्रम में आईटीटीआर में अंग्रेजी विषय के लिए प्रो. (सेवानिवृत्त) डॉ. अमीषा सिंह तथा सीडीओई में दर्शनशास्त्र विषय के लिए प्रो. (सेवानिवृत्त) डॉ. आर.के. देसवाल की सेवाएं लेने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। डॉ. देसवाल को श्रीमद्भगवद्गीता अध्ययन केंद्र का दायित्व भी यथावत सौंपे रखने का निर्णय लिया गया। बैठक में इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंडो-पैसिफिक स्टडीज के निदेशक प्रो. वी.एन. अत्री के कार्यकाल विस्तार तथा विभिन्न चयन समितियों एवं विभागों के लिए विशेषज्ञ पैनलों के गठन को भी मंजूरी प्रदान की गई। विद्यार्थी हितों को ध्यान में रखते हुए परिषद ने अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (एईडीपी) से संबंधित शुल्क और संचालन व्यवस्था पर विचार करते हुए आवश्यक निर्णय लिए। परिषद ने कहा कि यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को अध्ययन के साथ-साथ उद्योगों में व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
बैठक में विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में रोज गार्डन एवं गार्डन कैफेटेरिया के निर्माण तथा सौंदर्यीकरण के लिए दिए गए सहयोग की सराहना की गई। परिषद ने इसे पूर्व विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय के बीच मजबूत संबंधों का उदाहरण बताया। शोध और छात्र कल्याण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्यकारी परिषद ने “डॉ. सोमवीर जाखड़ स्मृति छात्रवृत्ति” स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस योजना के तहत वनस्पति विज्ञान विभाग के एम.एससी. अंतिम वर्ष के एक पात्र विद्यार्थी को प्रतिवर्ष 15 हजार रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। बैठक में हिंदी विभाग में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया 2024-25 से संबंधित शिकायतों पर गठित समिति की रिपोर्ट पर भी विचार किया गया। इसके अलावा हरियाणा सरकार द्वारा पदोन्नति में आरक्षण संबंधी जारी संशोधित निर्देशों को विश्वविद्यालय में लागू करने संबंधी विषय पर भी चर्चा हुई।
कार्यकारी परिषद ने विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में अध्यक्ष पदों के अतिरिक्त कार्यभार संबंधी निर्णयों को भी अनुमोदित किया। इसके अंतर्गत हिंदी विभाग का कार्यभार प्रो. महासिंह पूनिया तथा जूलोजी विभाग का कार्यभार प्रो. जितेंद्र कुमार को सौंपे जाने के निर्णय को मंजूरी दी गई। साथ ही जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान की निदेशक के रूप में प्रो. बिंदु शर्मा को दायित्व सौंपने के निर्णय को भी अनुमोदन प्रदान किया गया।
बैठक में कुलसचिव प्रो. वीरेन्द्र पाल, डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. राकेश कुमार, डीन ऑफ कॉलेजिज प्रो. ब्रजेश साहनी, प्रो. सुनील ढींगरा सहित कार्यकारिणी परिषद के सदस्य मौजूद थे।
जकार्ता में चमका कुवि का सितारा, गंगा ने जीता एशियन यू-23 स्वर्ण, भारतीय टीम ने छह पदकों से बढ़ाया देश का मान, कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने दी बधाई
कुरुक्षेत्र, 17 जुलाई। एशियन यू-23 पुरुष एवं महिला बॉक्सिंग चैंपियनशिप-2026 में भारतीय मुक्केबाज़ों ने दमदार प्रदर्शन करते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का गौरव बढ़ाया। जकार्ता (इंडोनेशिया) में 5 से 17 जुलाई तक आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भारतीय यू-23 पुरुष बॉक्सिंग टीम ने 2 स्वर्ण, 1 रजत और 3 कांस्य पदक सहित कुल 6 पदक जीतकर एशिया में अपनी मजबूत दावेदारी साबित की।
इस शानदार अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के होनहार मुक्केबाज़ गंगा का नाम प्रमुखता से उभरकर सामने आया। गंगा ने 55 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया और पूरे देश के साथ-साथ कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय को गौरवान्वित किया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा तथा कुलसचिव डॉ. वीरेंद्र पाल ने स्वर्ण पदक विजेता गंगा व उनके कोच राजेश कुमार राजौंद को हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के खेल निदेशक प्रो. दिनेश राणा ने बताया कि भारतीय पुरुष टीम ने अर्जुन अवार्डी एवं ओलंपियन बॉक्सर मनोज कुमार के कुशल नेतृत्व और रणनीतिक मार्गदर्शन में यह ऐतिहासिक सफलता हासिल की। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में अनुशासन, आत्मविश्वास और उत्कृष्ट तकनीक का परिचय देते हुए भारत को गौरवान्वित किया।
प्रो. राणा ने बताया कि गंगा का यह स्वर्ण पदक कोई संयोग नहीं, बल्कि उनकी निरंतर मेहनत और उत्कृष्ट प्रदर्शन का परिणाम है। इससे पहले भी उन्होंने 2 से 8 मार्च 2026 तक कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय बॉक्सिंग चैंपियनशिप में 55 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि गंगा इसी समर्पण, अनुशासन और मेहनत के साथ आगे बढ़ते रहे तो वे आने वाले वर्षों में ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए देश के लिए पदक जीतने वाले प्रमुख दावेदारों में शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग कोच राजेश कुमार राजौंद केे नेतृत्व, समर्पण और अथक परिश्रम के कारण पिछले 12 वर्षों में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने बॉक्सिंग के क्षेत्र में अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं।
कुरुक्षेत्र, 17 जुलाई। एशियन यू-23 पुरुष एवं महिला बॉक्सिंग चैंपियनशिप-2026 में भारतीय मुक्केबाज़ों ने दमदार प्रदर्शन करते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का गौरव बढ़ाया। जकार्ता (इंडोनेशिया) में 5 से 17 जुलाई तक आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भारतीय यू-23 पुरुष बॉक्सिंग टीम ने 2 स्वर्ण, 1 रजत और 3 कांस्य पदक सहित कुल 6 पदक जीतकर एशिया में अपनी मजबूत दावेदारी साबित की।
इस शानदार अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के होनहार मुक्केबाज़ गंगा का नाम प्रमुखता से उभरकर सामने आया। गंगा ने 55 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया और पूरे देश के साथ-साथ कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय को गौरवान्वित किया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा तथा कुलसचिव डॉ. वीरेंद्र पाल ने स्वर्ण पदक विजेता गंगा व उनके कोच राजेश कुमार राजौंद को हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के खेल निदेशक प्रो. दिनेश राणा ने बताया कि भारतीय पुरुष टीम ने अर्जुन अवार्डी एवं ओलंपियन बॉक्सर मनोज कुमार के कुशल नेतृत्व और रणनीतिक मार्गदर्शन में यह ऐतिहासिक सफलता हासिल की। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में अनुशासन, आत्मविश्वास और उत्कृष्ट तकनीक का परिचय देते हुए भारत को गौरवान्वित किया।
प्रो. राणा ने बताया कि गंगा का यह स्वर्ण पदक कोई संयोग नहीं, बल्कि उनकी निरंतर मेहनत और उत्कृष्ट प्रदर्शन का परिणाम है। इससे पहले भी उन्होंने 2 से 8 मार्च 2026 तक कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय बॉक्सिंग चैंपियनशिप में 55 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि गंगा इसी समर्पण, अनुशासन और मेहनत के साथ आगे बढ़ते रहे तो वे आने वाले वर्षों में ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए देश के लिए पदक जीतने वाले प्रमुख दावेदारों में शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग कोच राजेश कुमार राजौंद केे नेतृत्व, समर्पण और अथक परिश्रम के कारण पिछले 12 वर्षों में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने बॉक्सिंग के क्षेत्र में अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं।
