करनाल 16 जुलाई, नगर निगम कार्यालय के सभागार में गुरुवार को कुपोषण एवं नशा मुक्ति जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर की अध्यक्षता अतिरिक्त निगम आयुक्त अशोक कुमार ने की, जबकि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-सह-सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मीनाक्षी यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। शिविर में सी.एम.ओ. एवं कुपोषण व नशा मुक्ति अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. मनीष, मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. निर्णय सचदेवा, विशेषज्ञ हर्ष वत्स, यास्ता फाउंडेशन की अध्यक्ष तेजिन्द्र सूरी एवं उनकी टीम ने भाग लिया। कार्यक्रम में नगर निगम के पार्षद, वार्ड समिति सदस्य, सफाई शाखा के अधिकारी-कर्मचारी तथा स्वच्छ भारत मिशन-शहरी की टीम भी मौजूद रही।
समाज को नशा मुक्त बनाने के लिए जन जागरूकता सबसे प्रभावी माध्यम- मीनाक्षी यादव।
मुख्य अतिथि मीनाक्षी यादव ने कहा कि कुपोषण एवं नशा मुक्ति जैसे गंभीर विषयों पर नियमित रूप से जागरूकता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि लोगों, विशेषकर बच्चों और युवाओं को समय रहते इसके दुष्प्रभावों से अवगत कराया जा सके। उन्होंने कहा कि नशे की शुरुआत अक्सर बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू जैसे पदार्थों के सेवन से होती है और धीरे-धीरे व्यक्ति गंभीर नशे की गिरफ्त में पहुंच जाता है।
उन्होंने कहा कि नगर निगम के सफाई कर्मचारी अधिकांश समय फील्ड में कार्य करते हैं। ऐसे में उन्हें नशे से दूर रहने के लिए जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि नशे की इस कड़ी को सामूहिक प्रयासों से तोडऩा होगा और प्रत्येक नागरिक को नशा मुक्त भारत अभियान का सहभागी बनना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी ऐसे शिविर आयोजित कर अधिक से अधिक लोगों को जागरूक किया जाएगा।
नशे का इलाज जिला नागरिक अस्पताल में पूरी तरह नि:शुल्क- डॉ. मनीष।
सी.एम.ओ. एवं कुपोषण व नशा मुक्ति अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. मनीष ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति नशे की लत से बाहर निकलना चाहता है तो उसे बिना किसी झिझक के जिला नागरिक अस्पताल लाना चाहिए। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा आवश्यक जांच के बाद उसका उपचार तुरंत शुरू किया जाता है, जिससे वह शीघ्र सामान्य जीवन में लौट सके।
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा नशा मुक्ति का उपचार पूर्णत: नि:शुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही काला पीलिया, एनीमिया, एच.आई.वी. सहित अन्य आवश्यक चिकित्सीय जांचें भी निशुल्क की जाती हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि नशे से पीड़ित व्यक्तियों को उपचार के लिए प्रेरित करें और उन्हें समय पर अस्पताल तक पहुंचाने में सहयोग करें।
नशे के शिकार व्यक्ति को अपराधी नहीं, मरीज समझें- विशेषज्ञ।
मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. निर्णय सचदेवा तथा विशेषज्ञ हर्ष वत्स ने कहा कि आज के समय में कम उम्र के बच्चे और युवा भी तेजी से नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। अधिकांश बच्चों को नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी नहीं होती, इसलिए परिवार, विद्यालय और समाज की जिम्मेदारी है कि उन्हें समय रहते जागरूक किया जाए।
उन्होंने कहा कि नशे का आदी व्यक्ति अपराधी नहीं बल्कि एक मरीज होता है, जिसे सहानुभूति, परामर्श और उपचार की आवश्यकता होती है। ऐसे लोगों को जिला नागरिक अस्पताल अथवा यास्ता फाउंडेशन तक पहुंचाकर उनका उचित एवं नि:शुल्क उपचार कराया जा सकता है।
नशा अपराध और मानसिक बीमारियों का प्रमुख कारण।
विशेषज्ञों ने बताया कि देश में बढ़ते अनेक अपराधों के पीछे नशा एक प्रमुख कारण बनकर सामने आ रहा है। नशे की लत के कारण व्यक्ति आर्थिक रूप से कमजोर हो जाता है और कई बार अपराध की राह पर चल पड़ता है। लगातार नशा करने से उसकी सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है तथा मस्तिष्क की कार्यक्षमता कमजोर होने लगती है। उन्होंने बताया कि नशे के आदी व्यक्ति में गुस्सा, चिड़चिड़ापन, नींद न आना, हाथ-पैर कांपना, धडक़न तेज होना तथा मानसिक अस्थिरता जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। व्यक्ति नुकसान जानते हुए भी बार-बार नशा करने के लिए मजबूर हो जाता है, इसलिए समय पर उपचार और परामर्श बेहद आवश्यक है।
हर नागरिक बने नशा मुक्ति अभियान का एम्बेसडर- तेजिन्द्र सूरी
यास्ता फाउंडेशन की अध्यक्ष तेजिन्द्र सूरी ने कहा कि नशा मुक्त और स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए प्रत्येक व्यक्ति की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने उपस्थित सभी प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे अपने परिवार, मित्रों और आस-पास के लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करें तथा नशे की लत से जूझ रहे लोगों को उपचार के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक एक जागरूक एम्बेसडर की भूमिका निभाए, तो कुपोषण एवं नशा मुक्त भारत अभियान को सफल बनाया जा सकता है।
जागरूकता फैलाने का दिलाया संकल्प।
शिविर के अंत में अतिरिक्त निगम आयुक्त अशोक कुमार ने सफाई शाखा के अधिकारियों, कर्मचारियों, स्वच्छ भारत मिशन-शहरी की टीम, पार्षदों एवं वार्ड समिति सदस्यों को समाज को नशा मुक्त बनाने और कुपोषण के प्रति व्यापक जन जागरूकता फैलाने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि सभी प्रतिभागी अपने-अपने क्षेत्र में लोगों को जागरूक करने तथा जरूरतमंद व्यक्तियों को उपचार उपलब्ध कराने में सहयोग करें, ताकि उन्हें नशे से दूर किया जा सके।
समाज को नशा मुक्त बनाने के लिए जन जागरूकता सबसे प्रभावी माध्यम- मीनाक्षी यादव।
मुख्य अतिथि मीनाक्षी यादव ने कहा कि कुपोषण एवं नशा मुक्ति जैसे गंभीर विषयों पर नियमित रूप से जागरूकता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि लोगों, विशेषकर बच्चों और युवाओं को समय रहते इसके दुष्प्रभावों से अवगत कराया जा सके। उन्होंने कहा कि नशे की शुरुआत अक्सर बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू जैसे पदार्थों के सेवन से होती है और धीरे-धीरे व्यक्ति गंभीर नशे की गिरफ्त में पहुंच जाता है।
उन्होंने कहा कि नगर निगम के सफाई कर्मचारी अधिकांश समय फील्ड में कार्य करते हैं। ऐसे में उन्हें नशे से दूर रहने के लिए जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि नशे की इस कड़ी को सामूहिक प्रयासों से तोडऩा होगा और प्रत्येक नागरिक को नशा मुक्त भारत अभियान का सहभागी बनना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी ऐसे शिविर आयोजित कर अधिक से अधिक लोगों को जागरूक किया जाएगा।
नशे का इलाज जिला नागरिक अस्पताल में पूरी तरह नि:शुल्क- डॉ. मनीष।
सी.एम.ओ. एवं कुपोषण व नशा मुक्ति अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. मनीष ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति नशे की लत से बाहर निकलना चाहता है तो उसे बिना किसी झिझक के जिला नागरिक अस्पताल लाना चाहिए। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा आवश्यक जांच के बाद उसका उपचार तुरंत शुरू किया जाता है, जिससे वह शीघ्र सामान्य जीवन में लौट सके।
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा नशा मुक्ति का उपचार पूर्णत: नि:शुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही काला पीलिया, एनीमिया, एच.आई.वी. सहित अन्य आवश्यक चिकित्सीय जांचें भी निशुल्क की जाती हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि नशे से पीड़ित व्यक्तियों को उपचार के लिए प्रेरित करें और उन्हें समय पर अस्पताल तक पहुंचाने में सहयोग करें।
नशे के शिकार व्यक्ति को अपराधी नहीं, मरीज समझें- विशेषज्ञ।
मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. निर्णय सचदेवा तथा विशेषज्ञ हर्ष वत्स ने कहा कि आज के समय में कम उम्र के बच्चे और युवा भी तेजी से नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। अधिकांश बच्चों को नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी नहीं होती, इसलिए परिवार, विद्यालय और समाज की जिम्मेदारी है कि उन्हें समय रहते जागरूक किया जाए।
उन्होंने कहा कि नशे का आदी व्यक्ति अपराधी नहीं बल्कि एक मरीज होता है, जिसे सहानुभूति, परामर्श और उपचार की आवश्यकता होती है। ऐसे लोगों को जिला नागरिक अस्पताल अथवा यास्ता फाउंडेशन तक पहुंचाकर उनका उचित एवं नि:शुल्क उपचार कराया जा सकता है।
नशा अपराध और मानसिक बीमारियों का प्रमुख कारण।
विशेषज्ञों ने बताया कि देश में बढ़ते अनेक अपराधों के पीछे नशा एक प्रमुख कारण बनकर सामने आ रहा है। नशे की लत के कारण व्यक्ति आर्थिक रूप से कमजोर हो जाता है और कई बार अपराध की राह पर चल पड़ता है। लगातार नशा करने से उसकी सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है तथा मस्तिष्क की कार्यक्षमता कमजोर होने लगती है। उन्होंने बताया कि नशे के आदी व्यक्ति में गुस्सा, चिड़चिड़ापन, नींद न आना, हाथ-पैर कांपना, धडक़न तेज होना तथा मानसिक अस्थिरता जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। व्यक्ति नुकसान जानते हुए भी बार-बार नशा करने के लिए मजबूर हो जाता है, इसलिए समय पर उपचार और परामर्श बेहद आवश्यक है।
हर नागरिक बने नशा मुक्ति अभियान का एम्बेसडर- तेजिन्द्र सूरी
यास्ता फाउंडेशन की अध्यक्ष तेजिन्द्र सूरी ने कहा कि नशा मुक्त और स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए प्रत्येक व्यक्ति की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने उपस्थित सभी प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे अपने परिवार, मित्रों और आस-पास के लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करें तथा नशे की लत से जूझ रहे लोगों को उपचार के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक एक जागरूक एम्बेसडर की भूमिका निभाए, तो कुपोषण एवं नशा मुक्त भारत अभियान को सफल बनाया जा सकता है।
जागरूकता फैलाने का दिलाया संकल्प।
शिविर के अंत में अतिरिक्त निगम आयुक्त अशोक कुमार ने सफाई शाखा के अधिकारियों, कर्मचारियों, स्वच्छ भारत मिशन-शहरी की टीम, पार्षदों एवं वार्ड समिति सदस्यों को समाज को नशा मुक्त बनाने और कुपोषण के प्रति व्यापक जन जागरूकता फैलाने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि सभी प्रतिभागी अपने-अपने क्षेत्र में लोगों को जागरूक करने तथा जरूरतमंद व्यक्तियों को उपचार उपलब्ध कराने में सहयोग करें, ताकि उन्हें नशे से दूर किया जा सके।
