चंडीगढ़। बीते शुक्रवार कांग्रेस ने अपने संगठन में बड़ा बदलाव किया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव और कांग्रेस के सह प्रभारी सजय दत्त को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें हरियाणा का नया कांग्रेस प्रभारी बनाया गया है। वह कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नियुक्त हुए बीके हरिप्रसाद की जगह लेंगे।
कौन हैं संजय दत्त?
संजय दत्त कांग्रेस के सीनियर लीडर और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के सचिव हैं। महाराष्ट्र से कांग्रेस की छात्र राजनीति (एनएसयूआइ) के जरिये सक्रिय उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया। संजयचंद्र दत्त ने महाराष्ट्र विधान परिषद (एमएलसी) के सदस्य के रूप में कई कार्यकाल पूरे किए।
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वह महाराष्ट्र विधान परिषद में कांग्रेस के मुख्य सचेतक (व्हिप) भी रहे। साल 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण को विधान परिषद का सदस्य बनाने के लिए उन्होंने अपनी एमएलसी सीट से इस्तीफा दिया, जिसे पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा का उदाहरण माना जाता है। साल 2008-09 और 2017-1
प्रमुख राजनीतिक खूबियां
- बेहतरीन संगठनकर्ता : संगठन निर्माण
- और बूथ स्तर तक नेटवर्क खड़ा करने में दक्ष माने जाते हैं।
- लो-प्रोफाइल लेकिन प्रभावी : पर्दे के पीछे रणनीति बनाने वाले नेता की छवि।
- आंतरिक गुटबाजी सुलझाने का अनुभव : विभिन्न राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालने का अनुभव।
- आलाकमान के भरोसेमंद : कठिन
- राज्यों में प्रभारी या सह-प्रभारी बना भेजे जाने से नेतृत्व का विश्वास झलकता है।
- विधानमंडलीय अनुभव : संगठन और
- सदन, दोनों स्तरों पर काम करने का लंबा अनुभव।
- अनुशासित नेता : पार्टी लाइन का
- पालन करने वाले और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से अधिक संगठन को प्राथमिकता देने वाले नेता माने जाते हैं।
प्रमुख राजनीतिक कमजोरियां
- जनाधार वाले जननेता नहीं: उनकी पहचान
- मुख्यतः संगठनात्मक नेता की है, बड़े जनआंदोलनों या चुनावी चेहरा के रूप में नहीं।
- मीडिया में कम उपस्थिति: राष्ट्रीय स्तर पर
- उनकी सार्वजनिक पहचान सीमित रही है।
- करिश्माई वक्ता की छवि नहीं: वे मंचीय
- राजनीति की बजाय संगठनात्मक काम में अधिक सक्रिय रहे हैं।
- चुनावी जीत का सीमित प्रत्यक्ष रिकॉर्ड: अधिकतर जिम्मेदारियां संगठन और विधान परिषद तक केंद्रित रहीं।
- गुटबाजी वाले राज्यों में चुनौती: हरियाणा
- जैसे राज्यों में विभिन्न नेताओं के बीच संतुलन बनाना उनकी सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
हरियाणा के संदर्भ में ताकत
- किसी भी स्थानीय गुट से सीधे जुड़े नहीं हैं, इसलिए अपेक्षाकृत तटस्थ माने जाएंगे।
- संगठनात्मक पुनर्गठन और सभी गुटों के बीच समन्वय स्थापित करने का अनुभव।
- यदि वे भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कुमारी सैलजा, रणदीप सिंह सुरजेवाला और अन्य नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बना पाए, तो यह उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी।
तमिलनाडु, पुडुचेरी व हिमाचल प्रदेश में काम करने का अनुभव
संजय सतीशचंद्र दत्त महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ संगठनात्मक नेताओं में गिने जाते हैं। वे लंबे समय तक संगठन और विधान परिषद दोनों स्तरों पर सक्रिय रहे हैं। वे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में राष्ट्रीय सचिव, तमिलनाडु, पुडुचेरी, मध्य प्रदेश तथा हिमाचल प्रदेश के सह-प्रभारी जैसी जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।
