पंचकूला। करोड़ों रुपये के बैंक घोटाले में गिरफ्तार नगर निगम पंचकूला के पूर्व आयुक्त आईएएस आरके सिंह को सीबीआई ने कोर्ट में पेश कर तीन दिन के रिमांड पर लिया। जांच एजेंसी मोबाइल, दस्तावेज और दुबई भेजी 2.5 करोड़ की रकम के बारे में पता लगाएगी।
सीबीआई के अधिवक्ता ने दलील दी कि आरके सिंह जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। उनसे मोबाइल भी रिकवर करना है। कुछ दस्तावेज भी उनसे मिले हैं, जिसके बारे में पूछताछ करनी है।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता डीएस चावला ने सीबीआई की दलील का विरोध करते हुए कहा कि सीबीआइ ने आरके सिंह को चार बार पूछताछ के लिए बुलाया और वह हर बार सहयोग करने पहुंचे। इसके अलावा मोबाइल सीबीआई पहले ही उनसे ले चुकी है।
डीएस चावला ने दलील दी कि इस मामले की जांच के लिए हरियाणा सरकार ने तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी, उसमें उनका कोई रोल नहीं था। एफआइआर में उनका नाम नहीं था। दोनों पक्षों की दलीलों के बाद कोर्ट ने आरके सिंह को तीन दिन के रिमांड पर भेज दिया।
आरके सिंह पर आरोप है कि उन्होंने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर पंचकूला नगर निगम के खाते से 79.46 करोड़ की हेराफेरी में भूमिका निभाई। सीबीआई के अनुसार, यह मामला हरियाणा सरकार के आठ विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के दो विभागों के बैंक खातों से करोड़ों निकालकर फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर करने से जुड़ा है।
जांच एजेंसी ने कुल घोटाले की राशि 657 करोड़ बताई है, जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नुकसान का आंकड़ा 645 करोड़ बताया है। जांच के दौरान पता चला कि आरके सिंह ने करीब 2.5 करोड़ दुबई में बेटे के बैंक खाते में ट्रांसफर किए थे।
एजेंसी ने इस रकम के स्रोत और लेन-देन से जुड़े दस्तावेज मांगे, लेकिन पूछताछ में इसका स्पष्ट ब्योरा नहीं दिया जा सका। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह रकम वैध आय से जुड़ी थी या फिर घोटाले से जुड़े धन का कोई हिस्सा विदेश भेजा गया।
आईडीएफसी बैंक चंडीगढ़ में निर्देशों का उल्लंघन कर खोला था खाता
जांच में सामने आया है कि पंचकूला नगर निगम का खाता आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32, चंडीगढ़ शाखा में हरियाणा वित्त विभाग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर खोला गया था। सीबीआई का आरोप है कि उस समय नगर निगम आयुक्त रहे आरके सिंह ने फिक्स्ड डिपाजिट (एफडी) बनाने के नाम पर बैंक अधिकारियों को मध्यस्थों के जरिए कई हस्ताक्षरित चेक सौंपे।
इन चेकों के माध्यम से खाते से रकम निकाली गई, लेकिन कोई एफडी नहीं बनाई गई। निकाली गई राशि को कथित तौर पर बैंक अधिकारियों द्वारा नियंत्रित शेल कंपनियों में भेज दिया गया।
सीबीआई ने दावा किया है कि यह गबन तत्कालीन आयुक्त और नगर निगम के वरिष्ठ लेखाकार की जानकारी एवं सक्रिय भागीदारी से किया गया। इस मामले में वरिष्ठ लेखाकार सुरेंद्र जैन को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
चंडीगढ़ और करनाल के आवास से मिले थे महत्वपूर्ण दस्तावेज
आरके सिंह के चंडीगढ़ और करनाल स्थित आवासों पर छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। हरियाणा सरकार ने 8 अप्रैल को आरके सिंह और 2011 बैच के आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार को निलंबित कर दिया था।
पंचकूला नगर निगम में हुआ 79.46 करोड़ का घोटाला आइडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े बड़े फर्जीवाड़े का हिस्सा है, जिसमें हरियाणा सरकार के आठ विभागों से लगभग 504 करोड़ रुपये फर्जी एफडी और डेबिट नोट्स के जरिए निकालकर शेल कंपनियों में ट्रांसफर किए गए।
छह अन्य आईएएस अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
इस मामले में हरियाणा सरकार ने छह अन्य आइएएस अधिकारियों मोहम्मद शायन, पंकज अग्रवाल, डीके बेहरा, मणिराम शर्मा, विनीत गर्ग और साकेत कुमार की भूमिका की जांच की अनुमति भी दी है। इनमें से मोहम्मद शायन, पंकज अग्रवाल और प्रदीप कुमार के ठिकानों पर 6 जून को छापेमारी की गई थी।
अब तक इस मामले में 15 लोगों और तीन शेल कंपनियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। हालांकि आइएएस अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट अभी दाखिल नहीं की गई है।
छह महीने आयुक्त रहे थे आरके सिंह
आरके सिंह ने 10 जुलाई 2025 से 28 जनवरी 2026 तक पंचकूला नगर निगम आयुक्त का पद संभाला था। इसी दौरान शहरी स्थानीय निकाय में धन का गबन हुआ। जब यह मामला उछला तो हरियाणा सरकार ने उन्हें 8 अप्रैल 2026 को निलंबित कर दिया था।
निलंबित होने से पहले आरके सिंह राजस्व और आपदा प्रबंधन के विशेष सचिव और पंचकूला मेट्रोपालिटन डेवलपमेंट अथारिटी के अतिरिक्त सीईओ के पद पर तैनात थे। उनके पास 27 जुलाई 2025 से 28 जनवरी 2026 तक डीएमएफ का भी चार्ज रहा। इनकी रिटायरमेंट 30 नवंबर 2027 को होनी है।
