कुरुक्षेत्र, 12 जून। हिंदी भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय चेतना की सशक्त वाहक है। वैश्वीकरण और डिजिटल क्रांति के इस दौर में हिंदी की उपयोगिता और संभावनाएं निरंतर बढ़ रही हैं। इसी दृष्टि को ध्यान में रखते हुए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के निर्देशानुसार इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड एंड ऑनर्स स्टडीज (आईआईएचएस) के हिंदी विभाग द्वारा संचालित बैचलर ऑफ आर्ट्स विद सिंगल मेजर (स्कीम-सी) हिंदी ऑनर्स कार्यक्रम में प्रवेश प्रक्रिया जारी है। केयूआईआईएचएस प्राचार्या प्रो. रीटा दलाल ने बताया कि इस प्रतिष्ठित पाठ्यक्रम में वर्तमान शैक्षणिक सत्र के लिए 20 सीटें उपलब्ध हैं तथा प्रवेश हेतु ऑनलाइन आवेदन करने के लिए अंतिम तिथि 21 जून निर्धारित है।
हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप तैयार किया गया यह चार वर्षीय ऑनर्स कार्यक्रम विद्यार्थियों को हिंदी भाषा, साहित्य, संस्कृति, पत्रकारिता, अनुवाद, डिजिटल लेखन, संचार, आलोचना, अनुसंधान तथा रचनात्मक अभिव्यक्ति के विविध आयामों से परिचित कराता है। यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें रोजगार, उद्यमिता और उच्च शिक्षा के लिए भी सक्षम बनाता है।
प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि वर्तमान समय में हिंदी भाषा का क्षेत्र तेजी से विस्तृत हो रहा है। प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया, कंटेंट इंडस्ट्री, प्रकाशन संस्थान, विज्ञापन एजेंसियां, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म, सरकारी विभाग तथा निजी क्षेत्र में हिंदी विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में हिंदी ऑनर्स का यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए करियर निर्माण का उत्कृष्ट अवसर प्रदान करता है।
प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि हिंदी ऑनर्स के विद्यार्थी कंटेंट राइटर, कंटेंट क्रिएटर, पत्रकार, एंकर, संपादक, अनुवादक, प्रूफ रीडर, डिजिटल मार्केटिंग विशेषज्ञ, सोशल मीडिया मैनेजर, शिक्षक, शोधार्थी तथा प्रकाशन उद्योग से जुड़े विभिन्न पदों पर अपना भविष्य बना सकते हैं। इसके अतिरिक्त संघ लोक सेवा आयोग, हरियाणा लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, यूजीसी-नेट, जेआरएफ तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी हिंदी विषय अत्यंत उपयोगी सिद्ध होता है।
उन्होंने बताया कि पाठ्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को साहित्यिक अध्ययन के साथ-साथ लेखन कौशल, भाषायी दक्षता, प्रस्तुतीकरण कला, संचार कौशल, अनुवाद तकनीक, शोध पद्धति तथा डिजिटल कंटेंट निर्माण जैसे व्यावहारिक पक्षों का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इससे विद्यार्थियों में रचनात्मकता, विश्लेषणात्मक सोच तथा नेतृत्व क्षमता का विकास होता है। विश्वविद्यालय परिसर में समय-समय पर आयोजित होने वाली संगोष्ठियों, कार्यशालाओं, साहित्यिक गोष्ठियों, वाद-विवाद प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का पर्याप्त अवसर मिलता है।
प्रो. महासिंह पूनिया ने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय देश के अग्रणी विश्वविद्यालयों में से एक है, जिसे राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) द्वारा ए प्लस प्लस ग्रेड प्राप्त है। विश्वविद्यालय का समृद्ध शैक्षणिक वातावरण, अनुभवी शिक्षक, आधुनिक शिक्षण संसाधन और विद्यार्थी-केंद्रित दृष्टिकोण इसे उच्च शिक्षा के लिए एक आदर्श संस्थान बनाते हैं। आईआईएचएस का हिंदी विभाग भी अपने उत्कृष्ट शैक्षणिक योगदान, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण तथा विद्यार्थियों की उपलब्धियों के लिए विशेष पहचान रखता है। इच्छुक अभ्यर्थी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर प्रवेश संबंधी विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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