चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्य सूचना आयुक्त (सीआइसी) और पूर्व मुख्य सचिव टीवीएसएन प्रसाद को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से महत्वपूर्ण अंतरिम राहत प्राप्त हुई है।

हाई कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा जारी 31.13 लाख रुपये की दंडात्मक किराया वसूली (पीनल रेंट) नोटिस पर रोक लगा दी है। अदालत ने प्रथम दृष्टया यह माना कि मामले के तथ्यों को देखते हुए प्रशासन को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।

जस्टिस कुलदीप तिवारी की पीठ ने टीवीएसएन प्रसाद की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। प्रसाद ने 23 अप्रैल 2026 को जारी उस नोटिस को चुनौती दी थी, जिसके माध्यम से उनसे सेक्टर-16 स्थित सरकारी आवास पर कथित अनधिकृत कब्जे के लिए 31.13 लाख रुपये वसूलने का आदेश दिया गया था।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि प्रतिवादी अधिकारी इस बीच मामले पर पुनर्विचार करना चाहते हैं तो वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता से विवादित आदेश के आधार पर किसी प्रकार की वसूली नहीं की जाएगी। मामले में चंडीगढ़ प्रशासन से जवाब तलब करते हुए सुनवाई 25 अगस्त के लिए निर्धारित की गई है।

याचिका में कहा गया कि टीवीएसएन प्रसाद 31 अक्टूबर 2024 को हरियाणा के मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए थे। नियमों के अनुसार उन्हें फरवरी 2025 तक सरकारी आवास रखने का अधिकार था।

इसके बाद 23 मई 2025 को उन्हें हरियाणा का मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त किया गया। नियुक्ति के बाद उन्होंने उसी सरकारी आवास को दोबारा आवंटित करने के लिए आवेदन किया था।

याचिकाकर्ता का कहना है कि उनका आवेदन लंबे समय तक प्रशासन के पास लंबित रहा और अंततः 24 फरवरी 2026 को उन्हें मकान अपने पास रखने की अनुमति प्रदान कर दी गई। ऐसे में आवेदन के निस्तारण में हुई देरी प्रशासन की ओर से थी, जिसके लिए उन्हें दंडात्मक किराया और ब्याज के भुगतान के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

अदालत को यह भी बताया गया कि मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में कार्यभार संभालने के बाद टीवीएसएन प्रसाद लागू नीतियों और पूर्व प्रचलित व्यवस्थाओं के तहत सरकारी आवास में रहने के पात्र थे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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