कुरुक्षेत्र, 03 जून 2026। गुजरात के महामहिम राज्यपाल एवं वैदिक संस्कृति के प्रखर संवाहक आचार्य देवव्रत जी की पावन प्रेरणा से गुरुकुल कुरुक्षेत्र में आयोजित सार्वदेशिक आर्य वीर दल के राष्ट्रीय शिविर का तीसरा दिन वैदिक संस्कारों, अनुशासन और राष्ट्रनिर्माण की भावना से ओत-प्रोत रहा। शिविर में देश के विभिन्न प्रांतों से आए 400 से अधिक आर्यवीरों को वैदिक परंपरा के अनुसार अग्निहोत्र (यज्ञ) का विधिवत प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

अग्निहोत्र है मानवता के कल्याण का श्रेष्ठ साधन : आचार्य नन्दकिशोर जी

शिविर के प्रधान संचालक आचार्य नन्दकिशोर जी के मार्गदर्शन में आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण सत्र में आर्यवीरों को यज्ञ की विधि, उसके आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व तथा दैनिक जीवन में उसकी उपयोगिता के विषय में विस्तार से जानकारी दी गई। इस अवसर पर सोममुनि जी, आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा के वेद प्रचार अधिष्ठाता स्वामी सच्चिदानन्द जी, रोहताश आर्य, मा. कृष्णपाल आर्य तथा वरिष्ठ व्यायाम शिक्षक संदीप आर्य ने प्रशिक्षण कार्य में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।

अपने संबोधन में आचार्य नन्दकिशोर जी ने कहा कि अग्निहोत्र संसार का सर्वोत्तम कर्म है, जिसका विस्तृत वर्णन वेदों में प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि आर्य समाज के संस्थापक महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती ने अपने अमर ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश में प्रत्येक आर्यजन को नित्य यज्ञ करने का संदेश दिया है। यज्ञ केवल व्यक्तिगत उन्नति का साधन नहीं, बल्कि समस्त प्राणीमात्र और पर्यावरण के कल्याण का माध्यम है।

यज्ञ से होता है पर्यावरण शुद्ध और मन प्रसन्न

उन्होंने कहा कि वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ जब हवनकुंड में गोघृत एवं साकल्य सामग्री की आहुतियाँ दी जाती हैं, तो उससे वातावरण की शुद्धि होती है तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। वैदिक मंत्रों का उच्चारण मनुष्य के मन-मस्तिष्क पर अनुकूल प्रभाव डालता है और मानसिक शांति, एकाग्रता तथा आत्मबल की वृद्धि करता है।

आचार्य जी ने सभी आर्यवीरों का आह्वान किया कि शिविर समाप्ति के पश्चात वे अपने-अपने घरों में नियमित यज्ञ करके वैदिक संस्कृति के इस महान अभियान को आगे बढ़ाएँ।

योग, लाठी, कराटे और स्तूप निर्माण का भी हुआ अभ्यास

अग्निहोत्र प्रशिक्षण से पूर्व प्रातःकालीन सत्र में परम आदरणीय स्वामी देवव्रत सरस्वती जी के मार्गदर्शन में व्यायाम शिक्षकों द्वारा आर्यवीरों को योगासन, लाठी संचालन, कराटे प्रशिक्षण तथा स्तूप निर्माण का अभ्यास कराया गया। इन गतिविधियों के माध्यम से युवाओं में शारीरिक दक्षता, आत्मविश्वास, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता का विकास किया जा रहा है।

राष्ट्रनिर्माण के लिए तैयार हो रहे हैं युवा

राष्ट्रीय शिविर में देश के विभिन्न राज्यों से आए 400 से अधिक आर्यवीर भाग ले रहे हैं। शिविर का उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रभक्ति, चरित्र निर्माण, वैदिक संस्कार, सेवा भावना और नेतृत्व गुणों का विकास करना है, ताकि वे भविष्य में आदर्श नागरिक बनकर राष्ट्र की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।

उत्कृष्ट व्यवस्थाओं की हुई सराहना

शिविर में भाग ले रहे सभी आर्यवीरों के भोजन, आवास एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था गुरुकुल कुरुक्षेत्र प्रबंधक समिति द्वारा की गई है। गुरुकुल के प्रधान राजकुमार गर्ग सहित समस्त पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शिविर के सफल संचालन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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