हरियाणा कला परिषद के उपाध्यक्ष बनने पर महेश जोशी ने हरियाणवी संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने का लिया संकल्प
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कुरुक्षेत्र 1 जून। हरियाणा की कला, संस्कृति और लोक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय रहे महेश जोशी ने सोमवार को हरियाणा कला परिषद के उपाध्यक्ष के रूप में अपना पदभार ग्रहण कर लिया। कुरुक्षेत्र स्थित कला कीर्ति भवन में आयोजित समारोह के दौरान उन्होंने विधिवत रूप से कार्यभार संभाला। इस अवसर पर कला, शिक्षा, सामाजिक एवं प्रशासनिक जगत से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे और उन्होंने महेश जोशी को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।
गौरतलब है कि कला और संस्कृति के क्षेत्र के अनुभवी तथा मूल रूप से महेंद्रगढ़ जिले के निवासी महेश जोशी हरियाणवी कला, संस्कृति, लोक साहित्य और सांस्कृतिक परंपराओं के गहरे जानकार हैं। कला परिषद में उनकी यह नियुक्ति उनके लंबे अनुभव और सांस्कृतिक क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों की स्वाभाविक पहचान के रूप में देखी जा रही है।
महेश जोशी इससे पहले हरियाणा कला परिषद में अतिरिक्त मुख्य सलाहकार और मुख्य सलाहकार जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा वे गुरुग्राम जोन के क्षेत्रीय निदेशक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। अपने पूर्व कार्यकाल में उन्होंने परिषद की विभिन्न योजनाओं और सांस्कृतिक गतिविधियों को नई दिशा प्रदान की। उनके नेतृत्व में परिषद ने अनेक महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। पदग्रहण समारोह के दौरान हरियाणा पशुधन बोर्ड के अध्यक्ष धर्मवीर मिर्जापुर ने बधाई देते हुए कहा कि महेश जोशी की प्रशासनिक क्षमता, सांस्कृतिक समझ और कलाकारों से सीधा संवाद स्थापित करने की विशेष योग्यता उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त बनाती है। यही कारण है कि उनकी नियुक्ति को कला और संस्कृति जगत में सकारात्मक दृष्टि से देखा जा रहा है। महेश जोशी के नेतृत्व में हरियाणा की संस्कृति देश और दुनिया में लगातार अपनी पहचान बनाएगी तथा लोक संगीत, लोक नृत्य, लोक साहित्य, रंगमंच और पारंपरिक कलाओं के माध्यम से हरियाणा कला परिषद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी विशिष्ट उपस्थिति दर्ज करेगी।

हरियाणवी संस्कृति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का संकल्प
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पदभार ग्रहण करने के बाद महेश जोशी ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें जो महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसका वह पूरी निष्ठा, समर्पण और ईमानदारी के साथ निर्वहन करेंगे। हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और कलाकारों को उनका उचित सम्मान दिलाने के लिए वे पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि सांस्कृतिक गतिविधियों को और अधिक व्यापक बनाया जाए तथा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत केवल राज्य की धरोहर नहीं है, बल्कि यह देश की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
महेश जोशी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने जो विश्वास व्यक्त किया है, उसके लिए मैं उनका हृदय से आभारी हूं। मुझे जो जिम्मेदारी दी गई है, उसका पूरी गंभीरता और समर्पण के साथ निर्वहन करूंगा। प्रयास रहेगा कि हरियाणा की कला और संस्कृति को और अधिक मजबूती मिले तथा कलाकारों को उनके योगदान के अनुरूप सम्मान और अवसर प्राप्त हों।”

कलाकारों के सम्मान और प्रोत्साहन पर रहेगा विशेष ध्यान
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महेश जोशी ने कहा कि किसी भी राज्य की सांस्कृतिक पहचान उसके कलाकारों के माध्यम से ही स्थापित होती है। इसलिए कलाकारों के सम्मान, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन को प्राथमिकता देना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि लोक कलाकारों, रंगकर्मियों, साहित्यकारों, चित्रकारों और अन्य सांस्कृतिक विधाओं से जुड़े प्रतिभाशाली लोगों को आगे बढ़ाने के लिए विशेष योजनाएं तैयार की जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि युवा प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराने की दिशा में परिषद और अधिक प्रभावी ढंग से कार्य करेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को सामने लाने तथा उन्हें राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अवसर प्रदान करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। महेश जोशी ने कहा कि कला और संस्कृति केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे समाज को जोड़ने और उसकी पहचान को मजबूत करने का कार्य भी करती हैं। इसलिए सांस्कृतिक गतिविधियों का विस्तार समाज के समग्र विकास के लिए भी आवश्यक है।

संस्कृति के प्रचार-प्रसार को मिलेगा नया आयाम
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अपने संबोधन में महेश जोशी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि हरियाणा की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए नई तकनीकों और आधुनिक माध्यमों का उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिषद का प्रयास रहेगा कि हरियाणा की लोक परंपराएं, लोक संगीत, लोक नृत्य और सांस्कृतिक विरासत देश-दुनिया के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे। इसके लिए विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों, कार्यशालाओं, प्रदर्शनियों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
महेश जोशी ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण केवल सरकारी संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में सहयोग करें।
पूर्व कार्यकाल में हासिल की थी नई उपलब्धियां
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महेश जोशी का पूर्व कार्यकाल हरियाणा कला परिषद के लिए उपलब्धियों से भरा रहा है। उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में परिषद ने अनेक ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए, जिनसे हरियाणवी संस्कृति को व्यापक पहचान मिली। राज्य के विभिन्न जिलों में आयोजित सांस्कृतिक उत्सवों, लोक कला कार्यक्रमों और साहित्यिक आयोजनों ने कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान किया। उनके कार्यकाल में परिषद ने पारंपरिक लोक कलाओं को संरक्षण देने के साथ-साथ आधुनिक सांस्कृतिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया। महेश जोशी की सांस्कृतिक दृष्टि और संगठनात्मक क्षमता के कारण हरियाणा कला परिषद ने पहले भी नई बुलंदियां हासिल की थी और अब उनके उपाध्यक्ष बनने के बाद परिषद की गतिविधियों को और अधिक गति मिलने की संभावना है।

गणमान्य व्यक्तियों की रही उपस्थिति
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कुरुक्षेत्र के कलाकृति भवन में आयोजित पदभार ग्रहण समारोह में बड़ी संख्या में सांस्कृतिक, शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग उपस्थित रहे। समारोह के दौरान उपस्थित अतिथियों ने महेश जोशी को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं और विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में हरियाणा कला परिषद नई उपलब्धियां हासिल करेगी।
इस अवसर पर हरियाणा पशुधन विकास बोर्ड के अध्यक्ष धर्मवीर मिर्जापुर, मदन मोहन छाबड़ा, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पूर्व कुल सचिव डॉ. संजीव शर्मा, युवा कार्यक्रम विभाग के निदेशक डॉ. विवेक चावला, जनसंचार विभाग के निदेशक डॉ. मानसिंह पूनिया, डॉ. कुलदीप आर्य, डॉ. सूचिस्मिता शर्मा, लोक कलाकार डॉ. जनार्दन शर्मा, साहब सिंह, उमेश शर्मा, पंकज आत्रेय, सत्यनारायण शर्मा, लक्ष्मीकांत शर्मा, ओमप्रकाश टाक, रामकुमार शास्त्री, विजय सेठ, कृष्ण पांचाल, एडवोकेट राजपाल पांचाल, कला परिषद के कार्यालय प्रभारी धर्मपाल, ललित कला समन्वयक सीमा काम्बोज, विकास शर्मा व समस्त कर्मचारी उपस्थित रहे।

By Dr. Rajesh Wadhwa

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